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भाजपा केरल में हिंसा भड़काने का प्रयास कर रही है: माकपा

माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य प्रकाश करात का आरोप, राजनीतिक मुकाबले में नाकाम भाजपा की पदयात्रा राज्य में दंगे भड़काने की कवायद.

Yogi Adityanath BJP Kerala

केरल में भाजपा की जनरक्षा यात्रा में शिरकत करते यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: माकपा ने भाजपा पर केरल में वामपंथी दलों का राजनीतिक तौर पर मुकाबला कर पाने में नाकाम रहने के कारण राज्य में भीषण हिंसा फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कथित वामपंथी हिंसा के विरोध में मंगलवार को 15 दिवसीय जनरक्षा यात्रा शुरू की थी, जिसमें यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए.

माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य प्रकाश करात ने पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेमोक्रेसी के संपादकीय लेख में यह बात कही. केरल में भाजपा द्वारा आयोजित 15 दिवसीय पदयात्रा को राज्य में दंगे भड़काने की कवायद करार देते हुए कहा कि यह भाजपा आरएसएस का यह हथकंडा केरल में माकपा की चुनौती को स्वीकार कर पाने में नाकामी का परिणाम है.

करात ने कहा कि सत्ता के अहंकार में डूबे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सोचते हैं कि वह केरल में वामपंथ के आतंक का झूठा झंडा फहराने की संघ की राजनीति को कामयाब बनाने में सफल होंगे. लेकिन शाह ने माकपा के खिलाफ तथ्यहीन झूठे आरोप लगाकर हिंसा का खतरनाक दौर शुरू कर दिया है.

करात ने कहा कि केरल में आरएसएस का हिंसक हमलों का 45 साल पुराना इतिहास रहा है. यह घटनाएं सिर्फ मौजूदा एलडीएफ सरकार में ही नहीं हो रही हैं बल्कि 1990 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री ईके नयनार और फिर पिछले दशक में मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन तक के कार्यकाल में भी हमलों का दौर जारी था.

केरल में भाजपा के मौजूदा अभियान के दौरान शाह और अन्य पार्टी नेताओं ने भाजपा एवं आरएसएस के कार्यकर्ताओं की हत्या के पीछे वाम उग्रवाद को प्रमुख वजह बताते हुए राज्य की माकपा सरकार को आरोपों के घेरे में लिया है.

इन आरोपों को गलत बताते हुए करात ने कहा कि राज्य के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की अगुवाई वाली केरल सरकार का पिछले 17 महीने के कार्यकाल में किया गया काम दर्शाता है कि भाजपा की प्रतिक्रियावादी आर्थिक नीतियों और विभाजनकारी सांप्रदायिक एजेंडे का राज्य में एकमात्र विकल्प एलडीएफ सरकार ही है. उन्होंने कहा कि केरल में भाजपा की पदयात्रा में किये जा रहे झूठे दावों से लोगों में वामपंथ और गैरसांप्रदायिक राजनीति के प्रति विश्वास बढ़ेगा.