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स्टेट बैंक ने 20 हज़ार करोड़ से ज़्यादा का क़र्ज़ बट्टे खाते में डाला

वित्त वर्ष 2016-17 में हज़ार करोड़ से ऊपर की राशि बट्टे खाते में डालने वाले स्टेट बैंक ने अप्रैल से नवंबर 2017 के बीच न्यूनतम बैलेंस न रखने पर आम ग्राहकों से 1,771 करोड़ का जुर्माना वसूला था.

Auto rickshaws wait in front of the head office of State Bank of India (SBI) in New Delhi August 12, 2013. SBI, the country's largest lender, posted a second consecutive drop in quarterly net profit, missing estimates, on worsening asset quality, higher operating expenses and muted growth in interest income. REUTERS/Anindito Mukherjee (INDIA - Tags: BUSINESS) - RTX12I6I

फोटो: रॉयटर्स

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने 2016-17 में 20,339 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टे खाते (एनपीए) में डाल दिया. यह सरकारी बैंकों में सबसे अधिक राशि है, जो बट्टे खाते में डाली गई है.

इस प्रकार 2016-17 में बैंकों के बट्टे खाते में कुल मिलाकर 81,683 करोड़ रुपये की राशि डाली गई.

यह आंकड़े तब के हैं जब भारतीय स्टेट बैंक में उसके सहयोगी बैंकों का विलय नहीं किया गया था. सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि वित्त वर्ष 2012-13 में सरकारी बैंकों का कुल बट्टा खाता 27,231 करोड़ रुपये था.

इस प्रकार पांच साल की अवधि में यह राशि तीन गुना बढ़ गई है. वित्त वर्ष 2013-14 में सरकारी बैंकों ने 34,409 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टे खाते डाला था.

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वित्त वर्ष 2014-15 में यह राशि 49,018 करोड़, 2015-16 में 57,585 करोड़ और मार्च 2017 में समाप्त हुए वित्त वर्ष में 81,683 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. स्टेट बैंक के अलावा पंजाब नेशनल बैंक ने भी 2016-17 में 9,205 करोड़ रुपये बट्टे खाते डाले हैं.

इसके बाद बैंक ऑफ इंडिया ने 7,346 करोड़ रुपये, केनरा बैंक ने 5,545 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ बड़ौदा ने 4,348 करोड़ रुपये बट्टे खाते डाले हैं. चालू वित्त वर्ष में सितंबर छमाही तक सरकारी बैंकों ने 53,625 करोड़ रुपये के कर्ज को बट्टे खाते डाला है.

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