राजनीति

गैंगरेप के आरोपी गायत्री प्रजापति गिरफ़्तार, 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए

एक महिला से सामूहिक बलात्कार और उसकी बेटी से छेड़खानी के आरोपी सपा नेता गायत्री प्रजापति को बुधवार को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें पोस्को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

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मुलायम सिंह यादव के साथ गायत्री प्रजापति. (फाइल फोटो: पीटीआई)

करीब महीने भर फरार रहने के बाद सपा सरकार में मंत्री रहे गायत्री प्रसाद प्रजापति को बुधवार को लखनऊ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.

गायत्री सामूहिक बलात्कार के एक मामले में आरोपी हैं. उनके अलावा मामले के छह अन्य आरोपियों को पहले ही पकड़ा जा चुका है. प्रदेश के पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने इस ख़बर की पुष्टि कर दी है कि प्रजापति को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया गया है.

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजिल सैनी ने बताया कि उन्हें बुधवार सुबह आशियाना क्षेत्र से पकड़ा गया. 49 वर्षीय सपा नेता को पोक्सो अदालत के समक्ष पेश किया गया. अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है.

इस बीच पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद ने बताया कि प्रजापति लगातार ठिकाना बदल रहे थे. इससे पुलिस का काम अधिक मुश्किल हो गया था.

सपा नेता की गिरफ्तारी पर भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने कहा कि राज्य पुलिस का अब तक राजनीतिकरण किया गया था. जैसे ही वह राजनीतिक दबाव से मुक्त हुई, उसने कार्रवाई की और प्रजापति को गिरफ्तार किया.

इससे पहले सुबह प्रजापति को आलमबाग कोतवाली लाया गया, जहां बड़ी संख्या में उनके समर्थक पहले से ही पहुंचे हुए थे. पुलिस प्रजापति को जब मेडिकल के लिए ले जाने लगी तो उनके समर्थकों ने उन्हें पुलिस वाहन में नहीं जाने दिया बल्कि वे उन्हें लग्जरी कार में बैठाकर ले गए. जैसे ही प्रजापति को लग्जरी कार में ले जाने वाले फोटो और वीडियो टीवी चैनलों पर प्रसारित और सोशल मीडिया पर वायरल हुए, उन्हें तुरंत पुलिस वाहन में बैठा दिया गया.

मंजिल सैनी ने बताया कि लखनऊ पुलिस को पिछले तीन दिनों में प्रजापति को लेकर महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे थे. जैसे ही सूचना मिली कि वह आत्मसमर्पण की तैयारी कर रहे हैं, पुलिस हरकत में आई और उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की.

पकड़ने में इतना वक्त क्यों लगा और सत्ता परिवर्तन के बाद ही गिरफ्तारी क्यों हुई, इन सवालों पर मंजिल सैनी ने कहा कि चुनाव महज़ इत्तेफाक की बात है. प्रजापति लगातार ठिकाने बदल रहे थे और उनके कभी दिल्ली तो कभी गुरुग्राम और पश्चिम बंगाल में होने की सूचना मिली थी.

एसएसपी सैनी ने कहा कि 15 से 20 दिनों में प्रजापति के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा. मामला चूंकि वर्ष 2013 का है इसलिए पुलिस के लिए सभी साक्ष्य एकत्र कर अदालत के समक्ष पेश करना ज़रूरी है.

पुलिस ने मंगलवार को प्रजापति के बेटे अनुराग और भतीजे सुरेंद्र को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था. दोनों पर आरोपियों को शरण देने का आरोप लगाया गया है.

मामले के तीन सह अभियुक्तों को भी मंगलवार को लखनऊ में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस महानिरीक्षक ए. सतीश गणेश ने बताया था कि सामूहिक बलात्कार के मामले में प्रजापति के साथ अभियुक्त बनाए गए अमरेंद्र उर्फ पिंटू, रूपेश्वर और विकास वर्मा को लखनऊ के हज़रतगंज इलाके से गिरफ्तार किया गया.

इस मामले में प्रजापति के अलावा अशोक तिवारी, आशीष शुक्ला, प्रजापति के गनर चंद्रपाल और बीते मंगलवार को पकड़े गए तीन अन्य समेत कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था.

प्रजापति ने संवाददाताओं से कहा, ‘मैं आत्मसमर्पण करने जा रहा था लेकिन मुझे गिरफ्तार कर लिया गया. मैं निर्दोष हूं. मुझे बदनाम करने की साजिश की गई है.’ उन्होंने कहा कि वह सच्चाई को सामने लाने के लिए नार्को परीक्षण कराने को तैयार हैं. प्रजापति ने नाबालिग पीडि़ता का भी नार्को परीक्षण कराने की मांग की.

प्रजापति और उनके छह अन्य साथियों पर एक महिला का सामूहिक बलात्कार करने और उसकी बेटी से छेड़खानी के आरोप में सुप्रीम कोर्ट के गत 17 फरवरी के निर्देश पर मुकदमा दर्ज किया गया था.

प्रजापति ने इस बार भी अमेठी विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

प्रजापति के विदेश भागने की आशंका के मद्देनजर उनके पासपोर्ट को चार हफ्तों के लिए निलंबित कर दिया गया था और उनके ख़िलाफ़ लुक आउट नोटिस जारी किया गया था.

विधानसभा चुनाव के दौरान यह मामला उठने पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इशारों इशारों में प्रजापति को आत्मसमर्पण करने को कहा था.

राज्यपाल राम नाईक ने बलात्कार जैसे गंभीर आरोप में वांछित होने के बावजूद प्रजापति को मंत्रिमंडल से बर्खास्त ना किए जाने पर आपत्ति दर्ज करते हुए इस सिलसिले में मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखी थी.