राजनीति

क्यों राजस्थान के पोकरण का चुनावी माहौल सांप्रदायिक होता जा रहा है

ग्राउंड रिपोर्ट: भाजपा ने बाड़मेर ज़िले में पड़ने वाले नाथ संप्रदाय के तारतरा मठ के महंत प्रतापपुरी महाराज को पोकरण से टिकट दिया है तो कांग्रेस ने क्षेत्र के प्रसिद्ध सिंधी-मुस्लिम धर्मगुरु ग़ाज़ी फ़कीर के बेटे सालेह मोहम्मद को चुनाव मैदान में उतारा है.

(फोटो साभार: Flipkart Stories)

(फोटो साभार: Flipkart Stories)

पोखरण (राजस्थान): मौसम जयपुर और दिल्ली में भले ही सर्दी का हो, लेकिन राजस्थान के पोकरण में दिन में माथे पर पसीना आ जाता है. यहां थोड़ी गर्मी मौसम की है तो थोड़ी सियासी.

बाड़मेर के रास्ते पोकरण में घुसते ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ‘हिंदू सम्राट’ योगी आदित्यनाथ का भाजपा प्रत्याशी और तारतरा मठ के महंत प्रतापपुरी के समर्थन में बैनर लगा है. उसके ठीक बगल में कांग्रेस प्रत्याशी सालेह मोहम्मद का राहुल गांधी के साथ एक हाथ हवा में लहराता हुआ पोस्टर लगा है. ये दोनों पोस्टर पोकरण की फ़िज़ां बताने के लिए काफी हैं.

26 नवंबर को पोकरण में हुई सभा में योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘राहुल गांधी अजमेर शरीफ गए थे और वहां अपने गोत्र के बारे में बोले. अरे राहुल आपके परनाना कहते थे कि वे एक्सीडेंटल हिंदू हैं. हमें हिंदू होने पर गर्व की अनुभूति होनी चाहिए.’

इसी सभा में महंत प्रतापपुरी ने कहा, ‘जब-जब यहां परीक्षण हुए हैं, तब-तब पोकरण की धरती सफल हुई है. अब 7 दिसंबर को परीक्षण होने वाला है. यह राष्ट्रभक्ति का यज्ञ है, इसमें मैं नहीं आप सब जीतेंगे.’

महंत प्रतापपुरी के ‘परीक्षण’ शब्द का मतलब पोकरण में एक दिन घूमने पर ही समझ आ सकता है और इसका उदाहरण देखने को मिला एक चुनावी चौपाल में जब भाजपा के जैसलमेर ज़िला अध्यक्ष जुगल किशोर व्यास ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा, ‘वे अली-अली करते हैं, हम बजरंग बली करते हैं, गाय इनके लिए जानवर है, हमारे लिए माता है.’

इससे पहले 23 नवंबर को बीजेपी के प्रत्याशी महंत प्रतापपुरी ने पास ही के भणियाणा गांव में एक सत्संग कार्यक्रम में धर्म के नाम पर वोट मांगे. रिटर्निंग अधिकारी ने प्रतापपुरी को नोटिस थमा कर जवाब मांगा है.

पोकरण में योगी आदित्यनाथ की सभा से संबंधित भाजपा की ओर से लगाया गया पोस्टर. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

पोकरण में योगी आदित्यनाथ की सभा से संबंधित भाजपा की ओर से लगाया गया पोस्टर. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

26 नवंबर को ही कांग्रेस प्रत्याशी सालेह मोहम्मद के समर्थन में राहुल गांधी भी पोकरण में थे, उन्होंने कहा, ‘आप कांग्रेस कार्यकर्ता हैं इसलिए आप प्यार से सारी बातें रखिए, उत्तेजित होने की ज़रूरत नहीं है. आप आरएसएस या भाजपा के लोग नहीं हैं. आप उनके बारे में भी तमीज़ से बोलेंगे. पीएम हों या सीएम आप हमेशा उनके बारे में सही शब्दों का इस्तेमाल करेंगे.’

कौन हैं पोकरण के ये दो उम्मीदवार

भाजपा ने बाड़मेर ज़िले में पड़ने वाले नाथ संप्रदाय के तारतरा मठ के महंत प्रतापपुरी महाराज को पोकरण से टिकट दिया है तो कांग्रेस ने क्षेत्र के प्रसिद्ध सिंधी-मुस्लिम धर्मगुरु ग़ाज़ी फ़कीर के बेटे सालेह मोहम्मद को चुनाव मैदान में उतारा है.

मज़हबी लामबंदी पोकरण में साफ देखी जा सकती है. बीजेपी प्रत्याशी महंत प्रतापपुरी के लिए यह चुनाव एक परीक्षण है तो एक बार विधायक रह चुके सालेह मोहम्मद के लिए तीसरी बार विधायकी लड़ने का अनुभव.

सालेह मोहम्मद 2013 का चुनाव बीजेपी के शैतान सिंह से क़रीब 35,000 वोटों से हार गए थे, लेकिन इस बार बीजेपी ने शैतान सिंह का टिकट काट कर एक महंत पर दांव आजमाया है.

पोकरण में लगभग दो लाख वोटर हैं जिनमें से 55,000 मुस्लिम, 45,000 राजपूत और क़रीब इतने ही दलित वोट हैं. कांग्रेस को उम्मीद है कि मुस्लिम वोट के साथ-साथ दलित वोट भी उनके साथ जुड़ेगा, लेकिन बीजेपी कांग्रेस के इस प्लान को क़ामयाब नहीं होने देना चाहती. वर्चस्व की इस लड़ाई में पोकरण का माहौल चुनावी से धीरे-धीरे सांप्रदायिक होता जा रहा है.

मज़हबी लामबंदी में हार रही पोकरण की जनता

बहरहाल इस सियासी घमासान में यह भी जानना ज़रूरी है कि आख़िर पोकरण क्या चाहता है और आख़िर क्यों इस मज़हबी लामबंदी में पोकरण की जनता हार रही है?

पोकरण में कांग्रेस के चुनाव प्रचार से संबंधित पोस्टर. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

पोकरण में कांग्रेस के चुनाव प्रचार से संबंधित पोस्टर. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

रामदेवरा निवासी और दलितों की पूज्य देवी डालीबाई मंदिर के पुजारी लालाराम कहते हैं, ‘रामदेवरा के आस-पास के वीरमदेवरा, एकां, गोगलियों की ढाणी, दूधिया, राठौड़ा में खारा पानी आता है लेकिन यहां इंदिरा गांधी नहर का पानी नहीं मिल पा रहा है. रामदेवरा में श्रद्धालु के नहाने के लिए तो यहां के तालाब में मीठा पानी छोड़ दिया, लेकिन क़रीब 15,000 की आबादी का रामदेवरा क़स्बा खारा पानी पीने को मजबूर है.’

वे कहते हैं, ‘कस्बे से महज़ 500 मीटर दूर इंदिरा गांधी नहर के पानी की पाइप लाइन पोकरण के लिए आ रही है. चूंकि रेगिस्तानी इलाका है इसीलिए बसावट बहुत दूर-दूर हैं, इन बसावटों में ज़्यादातर दलित समुदाय के लोग ही रहते हैं. ये लोग 500 से 800 रुपये में मीठे पानी का टैंकर मंगवा कर उसका पानी पीते हैं.’

दलित अधिकार अभियान के अध्यक्ष लालाराम आगे बताते हैं, ‘सबसे पहले हिंदू-मुसलमान वाला माहौल 20 साल पहले बना जब सालेह मोहम्मद के चाचा फतेह मोहम्मद यहां से चुनाव लड़े थे. तब बीजेपी से गुलाब सिंह उम्मीदवार थे. तब से लेकर आज तक जब-जब यहां मुस्लिम और राजपूत उम्मीदवार खड़े होते हैं माहौल सांप्रदायिक हो जाता है. बाकी पूरे पोकरण में कभी हिंदू-मुसलमान के बीच कुछ नहीं होता. सभी एक-दूसरे के यहां शादियों, सुख-दुख में शरीक होते हैं.’

पोकरण विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार तुलछाराम मेघवाल कहते हैं, ‘न धर्म ख़तरे में है और न ही मुसलमान और न ही हिंदू. ख़तरे में तो हमारे बच्चे हैं. दलितों के साथ यहां भयंकर छुआछूत होता है. प्रसव के समय पुरुष डॉक्टर डिलीवरी कराता है क्योंकि पोकरण ज़िला अस्पताल में एक भी महिला डॉक्टर नहीं है, लेकिन कांग्रेस और बीजेपी इन मुद्दों को छोड़कर धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण कर वोट लेना चाहते हैं.’

तुलछाराम की दलितों के साथ भेदभाव की तस्दीक पोकरण शहर के बीचोबीच अंबेडकर चौराहे पर हो जाती है. पिछले 25 महीने से बाबा साहब आंबेडकर की मूर्ति इसी तरह कपड़े से ढंकी हुई है और भाजपा राज में पांच बार इस मूर्ति को खंडित किया जा चुका है.

पोकरण स्थित बाबा साहब आंबेडकर की क्षतिग्रस्त मूर्ति. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

पोकरण स्थित बाबा साहब आंबेडकर की क्षतिग्रस्त मूर्ति. (फोटो: माधव शर्मा/द वायर)

पुलिस आज तक किसी मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर पाई है. कस्बे के हरजेश यह बताते हुए थोड़े भावुक हो जाते हैं. हरजेश कहते हैं, ‘इस चौराहे से निकलते हुए भी शर्म आती है कि हम अपने नेता के लिए लड़ाई तो लड़ रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं दिलवा पा रहे.’

पोकरण शहर के निवासी शिव प्रकाश कहते हैं, ‘पोकरण में भाजपा राज में 150 प्राथमिक स्कूल बंद कर दिए गए. स्कूलों के क्रमोन्नत करने के नाम पर 6-7 किमी दूर शिफ्ट कर दिया गया. जिन गांव-ढाणियों में स्कूल बंद हुए वहां गरीब-दलित रहते हैं. अब वे बच्चे कैसे इतनी दूर पढ़ने जाएं ख़ासकर लड़कियां जिन्हें इस क्षेत्र में वैसे ही नहीं पढ़ाया जाता.’

पोकरण के सामाजिक कार्यकर्ता और ऊर्मूल मरुस्थलीय बुनकर समिति के रेवताराम कहते हैं, ‘यहां हर तीसरे साल अकाल पड़ता है. चारा 1200 रुपये क्विंटल मिल रहा है, आवारा जानवर किसानों की फसल ख़राब कर रहे हैं, जिन स्कूलों को सरकार ने क्रमोन्नत किया उनमें पर्याप्त अध्यापक नहीं हैं. ये सब मुद्दे चुनाव में सिरे से गायब हैं लेकिन बेकार के मुद्दों को हवा दी जा रही है.’

कांग्रेस की नेता और सांकड़ा पंचायत समिति की प्रधान अमतुल्लाह मेहर ने कहा, ‘पोकरण में धर्म के नाम पर लड़ाई की जा रही है, लेकिन हमारा उम्मीदवार तीसरी बार चुनाव में उतर रहा है. भाजपा ने तो 35,000 वोटों से जीते शैतान सिंह का टिकट काटकर एक महंत को उतारा है. हमने धर्म के नाम पर कहीं कोई मीटिंग नहीं की है. प्रतापपुरी ने राम ने नाम पर वोट मांगे हैं, इसीलिए चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस दिया है. हां, कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं. अगर धर्म का मुद्दा जीतता है तो ये पोकरण की जनता की हार होगी.’

वहीं, बीजेपी के जैसलमेर ज़िला अध्यक्ष जुगल किशोर व्यास कहते हैं, ‘धर्म का नाम ही फ़र्ज़ होता है. हमारे संत प्रतापपुरी महाराज इंसानियत का धर्म सिखाने आए हैं. ये लोग इंसानियत के धर्म को नहीं समझ रहे हैं. पोकरण में अब तक एक ही परिवार किसी और को मौका नहीं देना चाहता. जब से ये बंदा (सालेह मोहम्मद) हमारे पोकरण में आया है तब से गुटबाज़ी शुरू हो गई है.’

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)