भारत

बिहार: मस्तिष्क ज्वर सहित अज्ञात बीमारी से अब तक 26 बच्चों की मौत

बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने बताया कि मस्तिष्क ज्वर के प्रदेश में कुल 48 मामले प्रकाश में आए हैं. इसमें कुल 11 बच्चों की मौत होने की बात प्रकाश में आई है जिनमें से 10 हाइपोग्लाइसिमिया (रक्त में शर्करा की कमी) के मामले शामिल हैं.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर सहित कुल पांच जिलों में मस्तिष्क ज्वर सहित अन्य अज्ञात बीमारी से अबतक 26 बच्चों की मौत हो गई है जबकि 103 बच्चों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है.

पटना में सोमवार को आयोजित ‘लोक-संवाद’ के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुजफ्फरपुर जिले में बढ़ी संख्या में बच्चों की मौत के बारे में पूछे जाने पर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि यह गोरखपुर से बरसात के पहले शुरू होता है. इस बीमारी को मस्तिष्क ज्वर के रूप में चिन्हित किया गया था. इसके लिए पहले भी समिति बनी थी और उसके बारे में कई सुझाव आये थे.

मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि इस संबंध में बड़े तौर पर जागरूकता लाने में स्थानीय स्तर पर जरूर कोई कमी रह गई है. उन्होंने कहा कि इसे मुख्य सचिव अपने स्तर पर देखेंगे ताकि लोग बच्चों की इस बीमारी से बचाव के लिए उचित देखभाल कर सकें.

उन्होंने बताया कि इससे बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई कर रहा है.

मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने बताया कि मस्तिष्क ज्वर के प्रदेश में कुल 48 मामले प्रकाश में आए हैं. इसमें कुल 11 बच्चों की मौत होने की बात प्रकाश में आयी है जिनमें से 10 हाइपोग्लाइसिमिया (रक्त में शर्करा की कमी) के मामले शामिल हैं.

मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डा. शैलेश प्रसाद ने सोमवार शाम को बताया कि प्रदेश के पांच जिलों मुजफ्फरपुर, सीतामढी, शिवहर, वैशाली एवं पूर्वी चंपारण जिलों में हाइपोग्लाइसिमिया और अन्य अज्ञात बीमारी से मरने वाले बच्चों की संख्या बढकर अब 26 हो गयी जिनमें से 21 मुजफ्फरपुर के बच्चे शामिल हैं.

उन्होंने बताया कि पांच अन्य अज्ञात बीमारी से मरने वाले बच्चों के जांच नमूने परीक्षण के लिए पटना स्थित आरएमआरआई भेजा गया है.

शैलेश ने बताया कि मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कालेज सहित अन्य अस्पतालों में हाइपोग्लाइसिमिया सहित अन्य अज्ञात बीमारी से प्रभावित 103 बच्चों का उपचार जारी है. उन्होंने बताया कि हाइपोग्लाइसिमिया और अन्य अज्ञात बीमारी से प्रभावित बच्ची की आयु सात साल तक है.