पूर्वी उत्तर प्रदेश

पीस पार्टी के प्रमुख डॉ. अयूब. (फोटो साभार: फेसबुक)

उत्तर प्रदेश: पीस पार्टी क्यों अलग-थलग पड़ गई है

गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा-बसपा को साथ लाने का दावा करने वाली पीस पार्टी शिवपाल यादव की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. पार्टी ने 17 लोकसभा सीटों अपने प्रत्याशी उतारे हैं, लेकिन किसी भी सीट पर सफलता तो दूर वह ठीक-ठाक प्रदर्शन करने के प्रति भी आश्वस्त नहीं है.

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उत्तर प्रदेश में बसपा द्वारा बांटे गए टिकट जातीय समीकरण साधने की ओर इशारा करते हैं

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों व क्षत्रियों को टिकट देने से पहरेज करने वाली बसपा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिल खोलकर ब्राह्मणों को टिकट दिया है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि जातीय समीकरणों को देखते हुए पार्टी प्रमुख मायावती ने ख़ुद ऐसा करने का निर्देश दिया था.

Gandhinagar: Congress General Secretary Priyanka Gandhi Vadra addresses a public meeting ahead of Lok Sabha elections, in Gandhinagar, Tuesday, March 12, 2019. (PTI Photo) (PTI3_12_2019_000096B)

पूर्वी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए क्या संभावनाएं हैं?

पूर्वी उत्तर प्रदेश में अस्मिता की राजनीति सबसे अधिक तीखी है. पटेल, कुर्मी, राजभर, चौहान, निषाद, कुर्मी-कुशवाहा आदि जातियों की अपनी पार्टियां बन चुकी हैं और उनकी अपनी जातियों पर पकड़ बेहद मज़बूत है. कांग्रेस को इन सबके बीच अपने लिए कम से कम 20 फीसदी से अधिक वोटों को जुगाड़ करना होगा तभी वह यूपी में सम्मानजनक स्थान पा सकती है.

(फाइल फोटो: रॉयटर्स)

यूपी: महराजगंज में बंद पड़ी चीनी मिल से प्रभावित 48,000 किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं

भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में वादा किया था कि फसल बेचने के 14 दिन के भीतर गन्ना किसानों का भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा और सरकार बनने के 120 दिनों के भीतर गन्ना किसानों का बकाया भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन उत्तर प्रदेश में पार्टी की सरकार बनने के बाद भी ये वादे काग़ज़ों से बाहर नहीं निकल सके हैं.

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प्रियंका गांधी का करिश्मा भी यूपी में कांग्रेस को हार से नहीं बचा सकता

भारतीय राजनीति में करिश्माई नेतृत्व ने कई करिश्मे दिखाए हैं, लेकिन किसी भी दौर में करिश्मे के मुकाबले ज़मीनी समीकरण और समुदायों की गोलबंदियां ज्यादा प्रभावी रही हैं. फिलहाल कांग्रेस कम से कम यूपी में तो इन दोनों मोर्चों पर पिछड़ती नज़र आ रही है.

प्रियंका गांधी. (फोटो: पीटीआई)

प्रियंका गांधी के लिए यह आर या पार की लड़ाई है

अगर प्रियंका का प्रदर्शन अच्छा रहा, तो वे लंबी पारी खेलने के लिए राजनीति में रह सकती हैं. अगर नतीजे इसके उलट रहें, तो उनकी नियति ‘बड़े बेआबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले’ वाली हो सकती है.

विनोद नारायण झा (फोटो: फेसबुक प्रोफाइल)

प्रियंका गांधी पर भाजपा नेता ने कहा, ख़ूबसूरत चेहरों के दम पर वोट नहीं मिलता

बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा नेता विनोद नारायण झा ने कहा कि प्रियंका गांधी बेहद खूबसूरत हैं, लेकिन उसके अलावा उनकी कोई राजनीतिक उपलब्धि नहीं.

New Delhi: Congress President Rahul Gandhi gestures as he addresses the media at party office, in New Delhi, on Saturday. (PTI Photo/ Manvender Vashist)(PTI5_19_2018_000134B)

प्रियंका कर्मठ हैं, ज्योतिरादित्य डायनामिक हैं और भाजपा वाले घबराए हुए हैं: राहुल गांधी

प्रियंका गांधी को कांग्रेस महासचिव बनाए जाने पर भाजपा ने कहा कि कांग्रेस ने स्वीकार कर लिया कि राहुल गांधी पार्टी को नेतृत्व देने में असफल रहे.

प्रियंका गांधी. (फोटो: पीटीआई)

लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का दांव, प्रियंका गांधी को बनाया महासचिव

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र प्रियंका गांधी को पूर्वी उत्तर प्रदेश, ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और गुलाम नबी आज़ाद को हरियाणा का प्रभार सौंपा है.

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गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इंसेफलाइटिस से मौतों में ‘चमत्कारिक’ कमी का सच क्या है?

उत्तर प्रदेश सरकार यदि इंसेफलाइटिस से मौतों में कमी आने का दावा कर रही है तो उसे पिछले पांच वर्षों का अगस्त महीने तक गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या और मौतों की रिपोर्ट जारी करनी चाहिए.

Moradabad: Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath attends a function at Dr BR Ambedkar Police Academy, in Moradabad on Monday, July 9, 2018. (PTI Photo) (PTI7_9_2018_000114B)

बीआरडी अस्पताल में बच्चों की मौत आंतरिक राजनीति के कारण हुई थी: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का कहना है कि बीआरडी अस्पताल में बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई थी.

फोटो साभार: एएनआई

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में छह महीनों में 1049 बच्चों की मौत

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में साल 2017 में छह महीनों में 1,201 बच्चों की मौत हुई थी. दोनों वर्ष के आंकड़ों से पता चलता है कि नियोनेटल डेथ में कमी आई है जबकि इंसेफलाइटिस से बच्चों की मौत बढ़ गई है.

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रविशंकर जी! और भी ग़म हैं अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के सिवा…

माहौल का असर है या कुछ और कि श्री श्री रविशंकर को अयोध्या में कोई भी गंभीरता से नहीें ले रहा. लेकिन श्री श्री का सौभाग्य कि वे मीडिया की भरपूर सुर्ख़ियां बटोर रहे हैं.

(मनीष भंडारी, पुष्पा सेल्स के मालिक, फोटो: एएनआई/ ट्विटर)

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का ​मालिक गिरफ़्तार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत के मामले में अब सभी नौ अभियुक्त गिरफ़्तार किए जा चुके हैं.

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बाल मृत्युदर के मामले में भारत पहले, नाइजीरिया दूसरे और कांगो तीसरे नंबर पर

मेडिकल जर्नल ‘लैंसेट’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में पांच वर्ष से कम आयु के 9 लाख बच्चों की मृत्यु भारत में हुई जो दुनिया में सबसे ज़्यादा है.

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गोरखपुर अस्पताल में पिछले 72 घंटे में 61 बच्चों की मौत, इस महीने 290 जानें गईं

योगी आदित्यनाथ बोले, ‘कहीं ऐसा ना हो कि लोग अपने बच्चों के दो साल के होते ही सरकार के भरोसे छोड़ दें कि सरकार उनका पालन पोषण करे.’

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गोरखपुर: बच्चों की मौत पर आई रिपोर्ट में ऑक्सीजन संकट का ज़िक्र तक नहीं

जब मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी की ख़बरें छप रही थीं, उसी दौरान मुख्यमंत्री, कमिश्नर, डीएम, चिकित्सा सचिव, स्वास्थ्य सचिव सबका दौरा हुआ. क्या बड़े लोगों को बचाया जा रहा है?

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हाईकोर्ट ने योगी सरकार से पूछा, बच्चों की मौत की असली वजह बताओ

कोर्ट ने कहा, ‘ये घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, सही तथ्य सामने आने चाहिए, जिससे इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों. कोर्ट के आदेश से पहले मौत के कारणों पर सरकार का जवाब आना ज़रूरी है.’

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गोरखपुर में पिछले तीन दिन में इंसेफलाइटिस से 39 और बच्चों की मौत

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 67 बच्चों की मौत पर एक तरफ हंगामा जारी है, दूसरी ओर पिछले तीन दिनों में 39 और बच्चों की मौत हो चुकी है.

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‘पूर्वांचल के ज़िलों में इंसेफलाइटिस से कम से कम एक लाख मौतें हो चुकी हैं’

ग्राउंड रिपोर्ट: इंसेफलाइटिस पूर्वांचल का शोक बन चुका है लेकिन सरकारें व राजनीतिक पार्टियां इस पर मौन हैं.

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यूपी चुनाव: चार साल बाद भी निर्भया के गांव को वादों के सिवा कुछ न मिल सका

निर्भया बलात्कार कांड के चार साल बाद भी उनके गांव मेदौरा कलां की हालत जस की तस है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और दूसरे नेताओं की ओर से किए गए वादे अभी भी ज़मीन पर नहीं उतरे हैं.

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गोंडा से ग्राउंड रिपोर्ट: जाति, धर्म, धन और धुरंधर लोकतंत्र की शान

यूपी के गोंडा का जायज़ा लेने से पता चला कि पार्टियां भले ही कालाधन लाने, परिवारवाद मिटाने की बातें करें लेकिन चुनाव में जीत धन बल और बाहुबल से ही मिलती है.

अयोध्या. (फोटो साभार: विकिमीडिया)

अयोध्या से ‘राम’ और ‘बाबरी’ को हटा दें तो उसके पास क्या बचता है?

अयोध्या से बाहर इसकी पहचान राम जन्मभूमि और बाबरी मस्ज़िद विवाद से ही होती है. लेकिन अयोध्या के पास इन दोनों के इतर और भी बहुत कुछ है कहने को.