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(फोटो: पीटीआई)

चुनावों में सांप्रदायिक बयानबाज़ी रोकने की शक्ति नहीं है हमारे पास: चुनाव आयोग

सुप्रीम कोर्ट में आयोग ने कहा कि हम सिर्फ नोटिस जारी करके जवाब मांग सकते हैं. हमें किसी पार्टी के पहचान को रद्द करने या उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने का अधिकार नहीं है.

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रिश्वत के मामलों से निपटने के लिए चुनाव आयोग में मांगी थी अधिक शक्तियां, केंद्र ने ठुकराया

चुनाव आयोग ने जनप्रतिनिधित्व क़ानून, 1951 में संशोधन करके धारा 58बी शामिल करने की मांग की थी, ताकि राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को रिश्वत देने पर चुनाव को स्थगित या रद्द किया जा सके. लेकिन केंद्र सरकार ने इस मांग को ख़ारिज कर दिया.

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जब चुनावी लोकतंत्र में ज़ब्त हो गई फ़िराक़ गोरखपुरी की ज़मानत

चुनाव में हार के बाद जब पीएम जवाहर लाल नेहरू से उनकी भेंट हुई तो नेहरू ने पूछा, सहाय साहब कैसे हैं? फ़िराक़ गोरखपुरी का जवाब था, ‘सहाय’ कहां, अब तो बस ‘हाय’ रह गया है.