Anjali Bhardwaj

प्रशांत भूषण. (फोटो: ट्विटर)

सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार करते हुए मैं एक रुपये का जुर्माना भर दूंगा: प्रशांत भूषण

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की पीठ ने ट्विटर पर की गई दो टिप्पणियों के लिए अवमानना के दोषी ठहराए गए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को 15 सितंबर तक एक रुपये का जुर्माना भरने की सज़ा सुनाई है. जुर्माना न देने पर उन्हें तीन महीने जेल होगी और तीन साल तक वकालत करने से रोक दिया जाएगा.

New Delhi: People consume meals distributed by volunteers during a nationwide lockdown in the wake of coronavirus outbreak, at Shakur Basti in North West Delhi, Friday, April 3, 2020. (PTI Photo/Vijay Verma)(PTI03-04-2020_000166B)

प्रवासी मजदूरों की हालत पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार के फैसलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते

एक जनहित याचिका में शहरों से पलायन न करने वाले कामगारों को पारिश्रमिक दिए जाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे बताया गया है कि ऐसे कामगारों को आश्रय गृहों में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और ऐसी स्थिति में उन्हें पैसे की क्या जरूरत है.

Thousands of migrant workers from Delhi, Haryana and even Punjab reached Anand Vihar Bus Terminus in national capital during CoronaVirus Lockdown on March 28, 2020. (Photo: PTI)

लॉकडाउन : कामगारों के पारिश्रमिक के भुगतान से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल एक जनहित याचिका में कहा गया है कि देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से रोज़गार गंवाने वाले लाखों कामगारों के लिए जीने के अधिकार लागू कराने की आवश्यकता है. सरकार के 25 मार्च से 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा के बाद ये कामगार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.

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‘युद्ध में भी चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं लेकिन दिल्ली दंगे में ऐसा नहीं हुआ’

वीडियो: दिल्ली दंगों पर जन स्वास्थ्य अभियान नाम की संस्था की ओर से एक फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें इस दौरान उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाया गया है. सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर भी रिपोर्ट बनाने वाली टीम का हिस्सा थे और उनका कहना है कि जिस समय दिल्ली दंगों में जल रही थी, सरकारें जनता के बीच न होकर सोशल मीडिया पर सक्रिय थीं. उनसे रीतू तोमर की बातचीत.

**FILE** New Delhi: File photo dated Nov 10, 2018, Interim director of the CBI M Nageshwara Rao speaks during the 'Synergy' programme in New Delhi. The Supreme Court on Tuesday, Feb. 12, 2019, held then acting CBI director Rao and the Director of Prosecution (DoP) of the agency S Bhasu Ram guilty of its contempt and asked them to remain seated in the courtroom till it rises as punishment. (PTI Photo/Manvender Vashist)(PTI2_12_2019_000010B)

नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाने के मामले में दखल देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ ने कहा कि नए सीबीआई निदेशक की नियुक्त हो जाने के कारण वे इस मामले में कोई दखल नहीं देंगे. इसके अलावा पीठ ने नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने के लिए दिशानिर्देश जारी करने से भी इनकार कर दिया.

(फोटो: रॉयटर्स)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, अब तक सीबीआई का स्थायी निदेशक नियुक्त क्यों नहीं किया गया

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि जांच ब्यूरो के निदेशक की नियुक्ति की प्रक्रिया अब तक पूरी हो जानी चाहिए थी क्योंकि यह पहले से ही मालूम था कि एजेंसी प्रमुख जनवरी में सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

एम. नागेश्वर राव. (फोटो साभार: फेसबुक)

चीफ जस्टिस, जस्टिस सीकरी के बाद जस्टिस रमना ने नागेश्वर राव मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया

जस्टिस एनवी रमना ने ये कहते हुए सुनवाई करने से मना कर दिया कि वे नागेश्वर राव के बेटी की शादी में गए थे. राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है.

जस्टिस एके सीकरी. (फोटो: पीटीआई)

चीफ जस्टिस के बाद अब जस्टिस सीकरी ने भी नागेश्वर राव मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया

एम. नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील दुष्यंत दवे से जस्टिस एके सीकरी ने कहा, ‘कृपया मेरी स्थिति को समझें. मैं ये मामला नहीं सुन सकता हूं.’

पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई. (फोटो: पीटीआई)

सीबीआई के अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव पर सुनवाई से अलग हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि वह नए सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए 24 जनवरी 2019 को उच्च स्तरीय समिति की बैठक में भाग ले रहे हैं, इसलिए वे इस मामले में सुनवाई के लिए पीठ का हिस्सा नहीं हो सकते हैं.

एम नागेश्वर राव. (फोटो साभार: फ़ेसबुक)

नागेश्वर राव को सीबीआई की कमान सौंपने के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

याचिका में कहा गया है कि नागेश्वर राव की नियुक्ति उच्च स्तरीय चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर नहीं की गई थी, जैसा कि दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम के तहत अनिवार्य है.

Home Ministry Twitter

गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर 13 दंगों की जांच रिपोर्ट मौजूद नहीं, सीआईसी ने जानकारी देने को कहा

आरटीआई के तहत देश में 1961 से 2003 के बीच हुए विभिन्न दंगों के संबंध में 13 जांच या न्यायिक आयोग की रिपोर्ट के बारे में जानकारी मांगी गई थी. गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने दावा किया कि उनके पास दंगों से जुड़ी रिपोर्ट नहीं है.

(फोटो: रॉयटर्स)

केंद्रीय और राज्य सूचना आयोग के खाली पद कब भरे जाएंगे: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, गुजरात, केरल और कर्नाटक की सरकारों को चार हफ़्ते में जवाब देने का निर्देश दिया.

(फोटो: पीटीआई/विकिपीडिया)

आरटीआई एक्ट में संशोधन आम जनता के अधिकार और सूचना आयोग की स्वतंत्रता पर हमला है

वीडियो: केंद्र की मोदी सरकार द्वारा सूचना का अधिकार क़ानून में संशोधन को लेकर सूचना के जन अधिकार आंदोलन (एनसीपीआरआई) की सदस्य अंजलि भारद्वाज और आरटीआई कार्यकर्ताओं से धीरज मिश्रा की बातचीत.