Dalit Violence

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चुप रहोगे तो ज़माना इससे बदतर आएगा

भारत बंद पर सोशल मीडिया के हाई वोल्टेज ड्रामा को देखते हुए ये महसूस हुआ कि पुलिस और सरकार की विफलता पर बात नहीं करने की होशियारी और हिंसा के नाम पर असल मुद्दे से ध्यान भटकाने की चालाकी ज़्यादा ख़तरनाक हिंसा है.

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ज़ुबां पर आंबेडकर, दिल में मनु

लोग अब समझने लगे हैं कि अपने संकीर्ण एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए सत्ताधारी जमातें भले डॉ आंबेडकर की मूर्तियां लगवा दें, मगर तहेदिल से वह मनु की ही अनुयायी हैं.

Ghaziabad: A bike set on fire by a group of protesters during 'Bharat Bandh' call given by Dalit organisations against the alleged dilution of Scheduled Castes / Scheduled Tribes Act, in Ghaziabad on Monday. PTI Photo (PTI4_2_2018_000026B)

सरकार! दलितों में अंदेशे तो आपने ही पैदा किए

दलितों का ग़ुस्सा इस बिना पर है कि वे समझते हैं कि लंबे संघर्ष के बाद उन्हें जो संवैधानिक व क़ानूनी अधिकार मिले हैं, सत्तारूढ़ भाजपा व उसका मातृसंगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उन्हें छीनना चाहते हैं.

Muzzaffarnagar: Smoke billows out of burning cars during 'Bharat Bandh' against the alleged 'dilution' of Scheduled Castes/Scheduled Tribes act, in Muzzaffarnagar on Monday. PTI Photo (PTI4_2_2018_000236B)

हिंसा शासकों का औज़ार रहा है, शासित और शोषित भला कहां से हिंसा करेगा

अख़बार और चैनल लीड-हेडिंग और ब्रेकिंग न्यूज़ में क्यों चला रहे हैं, ‘दलित आंदोलन हिंसक हुआ!’ अगर मारे गए लोगों में ज़्यादातर दलित/उत्पीड़ित समाज से हैं तो फिर दलित हिंसक कैसे हो गया?

(कई दलितों ने इस तस्वीर को अपनी वॉट्सऐप प्रोफाइल पिक्चर बनाई थी)

गुजरात: मीडिया कवरेज के लिए दलित युवक ने ख़ुद को ब्लेड से किया था घायल

मूंछ रखने को लेकर दलित युवक ने ​की थी हमले की बात. पुलिस और परिवार वालों सहित युवक ने ख़ुद माना है कि उसने मीडिया कवरेज के लिए यह हरकत की.