Lack of Oxygen

क्या भारत एक ‘डेटा ब्लैकहोल’ बनने के रास्ते पर बढ़ रहा है

नीति संबंधी निर्णयों में आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका है. सरकार यदि लोगों के जीवन, ख़ासकर स्वास्थ्य-शिक्षा, रोज़गार में सुधार लाना चाहती है, तो ज़रूरी है कि उनके पास इनका सही आकलन करने की क्षमता, सही आंकड़े व जानकारी हों. वर्तमान सरकार जिस तरह विभिन्न डेटा और रिकॉर्ड न होने की बात कह रही है, वो देश को उस ‘डेटा ब्लैकहोल’ की ओर ले जा रहे हैं, जिसके अंधेरे में सुधार की राह खो गई है.

एलजी ने ऑक्सीजन की कमी से मौतों की जांच के लिए पैनल बनाने के प्रस्ताव को ठुकराया: मनीष सिसोदिया

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुईं मौतों की जांच के लिए कमेटी बनाने का प्रस्ताव फिर से नामंज़ूर कर दिया है. हालांकि, उपराज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने उपमुख्यमंत्री के बयान को भ्रामक बताते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन पहले ही किया जा चुका है. 

पहली बार केंद्र ने स्वीकार किया कि ऑक्सीजन की कमी से कोरोना मरीज़ों की मौत हुई थी

केंद्र सरकार ने कहा है कि आंध्र प्रदेश को छोड़कर किसी भी राज्य ने विशेष रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी के कारण कोविड-19 मरीज़ों की मौत की सूचना नहीं दी है. इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्यसभा में कहा था कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश से ऑक्सीजन के अभाव में किसी भी मरीज़ की मौत की ख़बर नहीं मिली है.

योगी सरकार ने हाईकोर्ट में बताया, क़फ़ील ख़ान के ख़िलाफ़ पुन: जांच के आदेश को वापस लिया गया

साल 2017 में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी से एक सप्ताह के भीतर 60 से ज़्यादा बच्चों की मौत मामले में डॉ. क़फ़ील ख़ान को निलंबित कर दिया गया था और वह लगभग नौ महीने तक जेल में भी रहे थे. ख़ान ने एक याचिका दायर कर बच्चों की मौत के संबंध में 22 अगस्त, 2017 को उनके निलंबन के आदेश को चुनौती दी है.

दिल्ली: पुलिस ने कोर्ट से कहा- जयपुर गोल्डन अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई

दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में 23-24 अप्रैल की दरमियानी रात कथित रूप से ऑक्सीजन की कमी के कारण 21 मरीज़ों की मौत हो गई थी. मरीजों के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करने की मांग करते हुए याचिका दायर कर कहा है कि पुलिस ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से न तो उन्हें गिरफ़्तार किया और न ही उनके ख़िलाफ़ जांच शुरू की.

Lucknow: Kafeel Khan, an accused in the BRD Medical Hospital case involving the death of children, speaks at a press conference in Lucknow on Sunday, June 17, 2018. (PTI Photo) (PTI6_17_2018_000100B)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा- कफ़ील ख़ान का चार वर्षों तक निलंबन क्यों

डॉ. कफ़ील ख़ान 2017 में उस समय सुर्खियों में आए थे, जब गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक सप्ताह के भीतर 60 से ज़्यादा बच्चों की मौत कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी से हो गई थी. इस घटना के बाद इंसेफेलाइटिस वार्ड में तैनात डॉ. ख़ान को निलंबित कर दिया गया था. वह लगभग नौ महीने तक जेल में भी रहे थे.

इस सरकार के झूठ की कोई इंतिहा ही नहीं

बीते 20 जुलाई को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से राज्यसभा में कहा गया कि कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की अप्रत्याशित मांग के बावजूद किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में इसके अभाव में किसी व्यक्ति के मरने की उसे जानकारी नहीं है. उसके पास इस बात की जानकारी भी नहीं है कि दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलित किसानों में से अब तक कितने अपनी जान गंवा चुके हैं.

New Delhi: Chhattisgarh Finance Minister T.S. Singh Deo during the 32nd Goods and Services Tax (GST) Council meet, in New Delhi, Thursday, Jan.10, 2019. (PTI Photo/Atul Yadav) (PTI1_10_2019_000045B)

केंद्र ने नहीं मांगी दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों की जानकारी: छत्तीसगढ़

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में कहा है कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों की मौत की कोई ख़बर नहीं है. छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि केंद्र ने इन मौतों की जानकारी कभी नहीं मांगी और ऐसे बयान से देश को गुमराह किया है.

कोविड-19 को लेकर सावधान रहें, अगले तीन महीने काफी महत्वपूर्ण हैं: वीके पॉल

दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बैठक में नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने दिल्ली सरकार से कहा है कि अनलॉक करने की गतिविधियों से कोविड मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि फिलहाल संक्रमण दर सबसे कम है. वहीं, आईसीएमआर के डॉ. समीरन पांडा ने कहा कि कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर के प्रभाव को कम करने के लिए टीकाकरण के प्रयास तेज़ किए जाने चाहिए.

यह कहना बिल्कुल ग़लत कि ऑक्सीजन की कमी के कारण कोई मौत नहीं हुईः दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री

राज्यसभा में केंद्र की मोदी सरकार की ओर से बताया गया है कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में क्सीजन की कमी के कारण लोगों की मौत की कोई ख़बर नहीं है. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि केंद्र सरकार ने इस तरह की मौतों को लेकर कोई आंकड़ा नहीं मांगा था. दिल्ली सरकार ने इस तरह की मौतों का पता लगाने के लिए एक समिति का गठन किया था, लेकिन केंद्र ने उपराज्यपाल के ज़रिये इस समिति को भंग कर दिया.

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी में किसी की मौत की ख़बर नहींः केंद्र सरकार

राज्यसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में स्वास्थ्य राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने बताया कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश नियमित तौर पर कोरोना के मामले और मौत की संख्या के बारे में केंद्र सरकार को सूचित करते हैं, लेकिन राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने ऐसी कोई सूचना नहीं दी.

कोविड-उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं किया गया तो 6-8 सप्ताह में आ सकती है तीसरी लहर: एम्स प्रमुख

दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जब तक बड़ी संख्या में आबादी का टीकाकरण नहीं हो जाता, तब तक कोविड-उपयुक्त व्यवहार का आक्रामक तरीके से पालन करने की आवश्यकता है. उन्होंने संक्रमण के मामलों में बड़ी वृद्धि होने पर कड़ी निगरानी और क्षेत्र-विशेष में लॉकडाउन की आवश्यकता पर ज़ोर दिया.

New Delhi: Delhi Deputy Chief Minister Manish Sisodia addresses a press conference, in New Delhi on Wednesday, July11, 2018. (PTI Photo/Atul Yadav) (PTI7_11_2018_000126B)

केंद्र ने ऑक्सीजन की कमी से मौत के संबंध में दिल्ली सरकार की समिति को मंज़ूरी नहीं दी: सिसोदिया

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है कि बेहद दुख की बात है कि केंद्र सरकार ने इस समिति को ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ़ दिल्ली की बात नहीं है, बल्कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और झारखंड सहित कई अन्य राज्यों की बात है, जहां केंद्र, राज्य सरकारों के काम में बाधा डाल रहा है.

देश के नामी वायरोलॉजिस्ट ने मोदी सरकार के कोरोना सलाहकार समूह से इस्तीफ़ा दिया

मोदी सरकार द्वारा कोरोना वायरस को लेकर बनाए गए वैज्ञानिक सलाहकार समूह के अध्यक्ष शाहिद जमील ने पिछले कुछ महीनों में कई बार इस बात को लेकर नाराज़गी ज़ाहिर की थी कि कोरोना संक्रमण को लेकर नीतियां बनाते वक़्त विज्ञान को तरजीह नहीं दी जा रही है, जो अत्यधिक चिंता का विषय है.

कोविड-19: हाशिये पर रहने वालों की लड़ाई सिर्फ बीमारी से नहीं है…

कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप के दौरान दवा, ऑक्सीजन आदि की कमी जानलेवा साबित हो रही है, लेकिन एक वर्ग ऐसा भी है, जिसे अस्पताल की चौखट और इलाज तक सहज पहुंच भी मयस्सर नहीं है.