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हाथरस: जिस वेबसाइट पर अंतरराष्ट्रीय साज़िश रचने का आरोप, उसमें कहा गया- न्यूयॉर्क पुलिस से बचें

हाथरस में दलित युवती के साथ गैंगरेप के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा है कि इससे यूपी सरकार की छवि ख़राब करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश रची गई. पुलिस ने अंग्रेजी की एक वेबसाइट को इस षड्यंत्र का केंद्र बताया है.

(स्क्रीनशॉटः हाथरस सपोर्ट वेबसाइट)

(स्क्रीनशॉटः हाथरस सपोर्ट वेबसाइट)

नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित युवती के साथ कथित तौर पर गैंगरेप और उसकी नृशंस हत्या मामले में आलोचना का सामना कर रही उत्तर प्रदेश पुलिस का आरोप है कि राज्य में जातीय और सांप्रदायिक दंगे कराने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बदनाम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साजिश रची गई थी.

इसके लिए एक वेबसाइट पर दंगों के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है, लेकिन यहां सिर्फ एक समस्या है. अज्ञात लोगों द्वारा बनाई गई जिस वेबसाइट को षड्यंत्र का केंद्र बताया जा रहा है, उसने अमेरिका के ब्लैक लाइव्स मैटर प्रदर्शन से संबंधित वेबसाइट की नकल की है. यहां तक कि वेबसाइट ने अपने पेज पर अमेरिकी उल्लेखों को हटाकर उसे उत्तर प्रदेश के संदर्भ में प्रासंगिक बनाने की भी जहमत नहीं उठाई है.

हाथरस के चंदपा पुलिस थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ राजद्रोह सहित आईपीसी की कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है. ठीक इसी समय राज्य के विभिन्न जिलों में दर्जन भर से अधिक एफआईआर दर्ज की गई है.

हालांकि, चंदपा पुलिस थाने में दर्ज एफआईआर में इसका उल्लेख नहीं है.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एक अंग्रेजी वेबसाइट जस्टिसफॉरहाथरसविक्टिम डॉट सीएआरआरडी डॉट को इस षड्यंत्र से जुड़ी हुई है. हालांकि, इस वेबसाइट को हटा लिया गया है लेकिन इसका कैशे वर्जन अभी भी मौजूद है.

‘सीएआरआरडी डॉट को’ एक पब्लिशिंग प्लेटफॉर्म है, जो ईमेल एड्रेस के साथ किसी को भी ब्लॉग साइट खोलने की मंजूरी देता है.

उत्तर प्रदेश पुलिस ने अभी तक इस बात का खुलासा नहीं किया है कि क्या वे इस वेबसाइट को बनाने वाले की पहचान से वाकिफ हैं या नहीं.

द वायर  ने ‘सीएआरआरडी डॉट को’ को इस संबंध में ईमेल किया है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है.

हालांकि पुलिस यह नहीं समझा पाई है कि आखिर किस तरह अंग्रेजी भाषा की एक वेबसाइट उस राज्य में दंगों के लिए लोगों को उकसा सकती है, जो राज्य व्यापक तौर पर हिंदीभाषी है.

यूपी पुलिस ने द वायर  के साथ वेबसाइट के इस कंटेट को साझा किया है, जिसे पुलिस ने सबूत के तौर पर प्रचारित करते हुए इसे दंगों की अंतरराष्ट्रीय साजिश बताया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस कंटेंट को अमेरिका में ब्लैक लाइव्ज मैटर विरोध प्रदर्शन से संबंधित वेबसाइट से हू-ब-हू उठाकर (कॉपी-पेस्ट) इस्तेमाल किया गया है.

हाथरस मामले से जुड़ी इस कथित वेबसाइट पर उस भाषा को शब्दश: दिया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश में संभावित आंदोलनकारियों और दंगाइयों के लिए अजीबोगरीब निर्देश दिए गए हैं. जैसे इसमें कहा गया है कि

  • विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने पर विचार कर रहे लोगों को सलाह दी जाती है कि वे पहले इस प्रदर्शन के बारे में थोड़ा रिसर्च कर लें ताकि यह सुनिश्चित कर सकें कि वे किसी सेट-अप (षड्यंत्र) का हिस्सा न हो, जहां श्वेत वर्चस्ववादी लोगों को लुभाने की कोशिश करें और उत्तर प्रदेश के लोगों को सैन डियागो और फीनिक्स (अमेरिकी शहर) के लोगों से ज्यादा स्मार्ट होने की सलाह दें.
  • पुलिस का जिस वेबसाइट के बारे में कहना है कि इसका उद्देश्य यूपी के ग्रामीणों और कस्बे वासियों को दंगे के लिए उकसाना है, उसने उन्हें यह सलाह भी दी थी कि अगर वे अश्वेत लोगों को भागते देखें तो उनके साथ भाग लें. यह अभी तक अस्पष्ट है कि क्या यूपी पुलिस को ऐसी उम्मीद थी कि अफ्रीकी अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय साजिश के तहत हाथरस में दंगे करा सकते हैं.
  • एक खंड में उत्तर प्रदेश के ग्रामीणों को यह भी बताया गया है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान क्या न पहने. इसके साथ ही उन्हें अपनी त्वचा पर वैसलिन, मिनरल ऑयल या तेलयुक्त सनस्क्रीन नहीं लगाने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही कॉन्टैक्ट लेंस न पहनने, टाई, आभूषण और ब्रांडेड कपड़े भी नहीं पहनने को कहा गया है.
  • वेबसाइट पर प्रदर्शनकारियों, जो अनुमानत: यूपी के गांवों और कस्बों के हैं, को ढीले कपड़े और स्विमिंग गॉगल्स (चश्मा) पहनने के निर्देश दिए गए हैं.
  • लोगों से स्नीकर्स (स्पोर्ट्स शू) पहनने को कहा गया है, जो भागने में आरामदायक हो. साथ ही हैट लगाने को कहा गया है, जिसके किनारे मुड़े हुए हों ताकि इसे झुकाकर रखा जा सके. कहा गया है कि यह हैट यूपी के ग्रामीणों को दंगे के दौरान उनकी पहचान उजागर होने के साथ धूप और रासायनिक पदार्थों की चपेट में आने से भी बचाएगा. इसके साथ ही साइकिल पर लगाए जाने वाले हैट और दस्तानों की भी सलाह दी गई है.
  • हाथरस में प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों से उबर (कैब सर्विस) का इंतजार न कर बाइक का इस्तेमाल करने को कहा गया है.
  • प्रदर्शनकारियों से एक बैकपैक (पिट्ठू बैग) लाने को कहा गया है, जिसमें स्नैक्स, पानी, एक पोर्टेबल चार्जर के साथ दूध या पानी से भीगे हुए कपड़े भी रखा गया हो, जिसे पुलिस द्वारा आंसू गैस छोड़े जाने से बचाव में इस्तेमाल में लाया जा सके.

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हैरानी की बात है कि उत्तर प्रदेश के संभावित दंगाइयों को यह भी चेतावनी दी गई कि न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (एनवाईपीडी) विरोध प्रदर्शनों की वीडियो रिकॉर्डिंग करेगा.

इस वेबसाइट पर लगे पोस्टर में कोलकाता में एक विरोध प्रदर्शन के आयोजकों को वामपंथी और कांग्रेस से संबद्ध छात्र और महिला अधिकार समूह बताया गया है. हालांकि वामपंथी समूह खुद के लिए कभी वामपंथी शब्द का इस्तेमाल नहीं करते.

वेबसाइट पर पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग वाली कई याचिकाओं के लिंक हैं, जिन पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं. इसके साथ ही तमाम सरकारी ईमेल एड्रेस हैं, जहां लोग ईमेल भेज सकते हैं लेकिन उन्हें सलाह दी गई है कि वे ईमेल को कॉपी-पेस्ट न करें, बल्कि वाक्य को बदल दें ताकि उन्हें स्पैम नहीं समझा जाए.

उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा है कि यह सब राज्य सरकार को बदनाम करने की साजिश है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)