चुनौती भोजपुरी संगीत को 'साफ़-सुथरा' बनाने की नहीं है; ऐसा करने से वही 'नैतिक पहरेदारी' दोहराई जाएगी जो लंबे समय से क्षेत्रीय लोकप्रिय संस्कृतियों के साथ जुड़ी रही है. असली चुनौती यह समझने की है कि जब हिंदी सिनेमा को किसी हिट गाने की ज़रूरत होती है, तो उसे सबसे पहले भोजपुरी की ही याद क्यों आती है.