कॉकरोच जनता पार्टी के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सीजेपी कार्यकर्ता हाफिज़ करिशुंडा पश्चिमपाड़ा प्राथमिक विद्यालय गए थे और स्कूल की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कुछ सवाल किए थे, जिसकी जानकारी स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं को मिल गई. आरोप है कि इसके बाद भाजपा समर्थकों के एक समूह ने उन पर हमला करने किया, जहां उन्हें बचाने की कोशिश में उनके पिता बुरी तरह घायल हो गए, जिसके बाद उनकी मौत हो गई.
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कॉकरोच जनता पार्टी के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सीजेपी कार्यकर्ता हाफिज़ करिशुंडा पश्चिमपाड़ा प्राथमिक विद्यालय गए थे और स्कूल की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कुछ सवाल किए थे, जिसकी जानकारी स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं को मिल गई. आरोप है कि इसके बाद भाजपा समर्थकों के एक समूह ने उन पर हमला करने किया, जहां उन्हें बचाने की कोशिश में उनके पिता बुरी तरह घायल हो गए, जिसके बाद उनकी मौत हो गई.
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने कई तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद संबंधी ग़लतियां सामने आने का हवाला देते हुए यूजीसी-नेट की तीन विषयों - अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र - के लिए परीक्षा दोबारा आयोजित करने की घोषणा की है. कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि सरकार और एनटीए निष्पक्ष और भरोसेमंद परीक्षा प्रक्रिया सुनिश्चित करने में विफल रहे हैं.
‘हमें सिलाई सिखाने के नाम पर ले गए थे’: पूर्व माओवादी स्त्रियों ने कहा, ‘धोखे से कराया गया रैंप वॉक’
छत्तीसगढ़ के रायपुर में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर हुए एक फैशन शो की रैंप वॉक में पूर्व माओवादी महिलाओं ने हिस्सा लिया था. सरकार इसे अपनी सफलता की तरह पेश कर रही है, लेकिन पूर्व माओवादी महिलाओं का कहना है कि उन्हें सिलाई प्रशिक्षण के नाम पर धोखे से सुकमा से रायपुर ले जाया गया और वहां रैंप वॉक की ट्रेनिंग देकर इस कार्यक्रम में शामिल करवाया गया.
देश के नक़्शे से धीरे-धीरे आदिवासी गांव ही पूरे के पूरे विस्थापित हो रहे हैं. आज़ादी की 79वें वर्षगांठ के अवसर पर एक अहम प्रश्न यह है कि आदिवासी-किसान तबक़ों की स्वाधीनता के क्या मायने हैं? क्या बाहरी उपनिवेशवादी ताक़तों का मात्र स्थानांतरण हुआ है और अब आंतरिक उपनिवेशवादी ताक़तें इन तबक़ों का शोषण कर रही हैं?
‘मुझे खेद है, माफी मांगता हूं’: बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा ने छात्रों से मांगी माफी
बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने नालसार के छात्रों और शिक्षकों से अपने बयानों और पत्रों के लिए माफी मांगी है. उन्होंने कहा कि अगर उनके किसी शब्द या पत्र से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका खेद है. छात्रों ने उनके बयानों को लेकर माफी की मांग की थी.
हमारे छह मौलिक अधिकारों में से स्वतंत्रता का अधिकार आज सबसे ज़्यादा मायने रखने लगा है, क्योंकि आज उसकी हर धारा का उल्लंघन हो रहा है. सत्ता के ख़िलाफ़ मत या विचार को अभिव्यक्ति देने पर आजकल प्रोफेसर, छात्र, पत्रकार, रंगकर्मी तक गिरफ़्तार कर लिए जाते हैं. राज्य की आलोचना करने को देशद्रोह क़रार दिया जाता है.
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