पश्चिम बंगाल में छात्र आंदोलन की सशक्त परंपरा की जड़ें स्वाधीनता संग्राम तक जाती हैं, पर आज़ादी के बाद जब विदेशी औपनिवेशिक शासन का स्थान स्वदेशी लोकतांत्रिक सरकार ने ले लिया, छात्रों के समक्ष चुनौतियां बदल गईं. यहां छात्र राजनीति की एक विशेषता यह भी रही है कि वह केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रही; खाद्यान्न संकट, श्रम अधिकार, किसानों का शोषण, अंतरराष्ट्रीय राजनीति- ये सभी छात्र आंदोलनों का हिस्सा बने.