घटना गोरखपुर की है, जहां 1 फरवरी को न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में आयोजित नेत्र शिविर के दौरान 30 मरीज़ों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था. सर्जरी के 24 घंटे के भीतर कई मरीज़ों ने ऑपरेशन वाली आंख में तेज़ दर्द और पस निकलने की शिकायत की. अब बताया गया है कि यह संक्रमण था, जिसके फैलने के डर से नौ लोगों की आंखें निकालनी पड़ी और कइयों की प्रभावित आंख की रोशनी चली गई.
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घटना गोरखपुर की है, जहां 1 फरवरी को न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में आयोजित नेत्र शिविर के दौरान 30 मरीज़ों का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था. सर्जरी के 24 घंटे के भीतर कई मरीज़ों ने ऑपरेशन वाली आंख में तेज़ दर्द और पस निकलने की शिकायत की. अब बताया गया है कि यह संक्रमण था, जिसके फैलने के डर से नौ लोगों की आंखें निकालनी पड़ी और कइयों की प्रभावित आंख की रोशनी चली गई.
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में जेएनयू की कुलपति यह कहती हुईं नज़र आ रही हैं कि आप स्थायी रूप से पीड़ित बनकर या विक्टिमहुड के साथ तरक्की नहीं कर सकते. ऐसा ही अश्वेतों के साथ हुआ, यही दलितों के साथ हो रहा है. इस बयान की व्यापक आलोचना के बाद उन्होंने कहा कि वह ख़ुद बहुजन समाज से आती हैं, इसलिए किसी भी समुदाय के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करने का सवाल ही नहीं उठता.
गौहाटी हाईकोर्ट ने पिछले साल जून में गोआलपाड़ा ज़िला के हाशिला बील क्षेत्र में बेदखली अभियान से प्रभावित लोगों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पिछले आठ महीनों से अस्थायी शिविरों में रह रहे लोगों को चिकित्सा सुविधा और शिक्षा सहित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं.
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी ने गुजरात विवाह पंजीकरण अधिनियम में संशोधन कर माता-पिता को शादी की जानकारी अनिवार्य करने का प्रस्ताव पेश करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा नियमों में ख़ामियों के चलते मासूम लड़कियां फंस रही हैं और ऐसी प्रथाएं समाज में 'दीमक' की तरह फैल रही हैं.
सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में आरोपित चार भारतीय नागरिकों के मुकदमे की सुनवाई शुरू होने वाली है. इस बीच, कनाडा सरकार के न्याय विभाग ने संघीय अदालत में आवेदन दाखिल कर ‘संवेदनशील’ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने से रोकने की मांग की है.
शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु की द्रमुक सरकार को मुफ्त बिजली वितरण नीति के लिए फटकारते हुए कहा कि यदि राज्य ज़रूरतमंद ग़रीबों की मदद करते हैं तो यह पूरी तरह से समझ में आता है. लेकिन जो वहन कर सकते हैं उन्हें भी मुफ्त वितरण की सुविधा क्या तुष्टीकरण की नीति नहीं हैं.
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