प्रेमचंद आज की तारीख़ में प्रासंगिक हैं क्योंकि वह मान्यताओं पर सवाल उठाने से या फिर संस्था बन गए व्यक्ति की प्रविधियों पर भी आलोचकीय निगाह डालने से परहेज़ नहीं करते. पर इसका अर्थ यह नहीं था कि गांधी के व्यक्तित्व में, देश को लेकर उनकी चिंता में प्रेमचंद को कोई शक था. देखा जाए तो प्रेमचंद पर सबसे अधिक प्रभाव भी उन्हीं का ही पड़ा था.