तरुण की हत्या के बाद दिल्ली में और दिल्ली के बाहर मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं. सरकार और पुलिस ने कहीं चेतावनी नहीं दी है कि ऐसी हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी. झूठी खबर और दुष्प्रचार के लिए भी किसी पर कार्रवाई नहीं की गई है. मीडिया और सरकार चाहती है कि हिंदुओं के भीतर मुसलमानों के खिलाफ घृणा बढ़े, गहरी हो. उनकी साझेदारी की जगहें कम होती जाएं, ख़त्म हो जाएं. लेकिन हम, विशेषकर वे हिंदू, जो ख़ुद को सजग कहते हैं, क्या चाहते हैं?