विपक्षी दलों द्वारा संसद की कार्रवाई रोकना संसद की कार्रवाई का हिस्सा ही है और यह सुनिश्चित करना सत्ता पक्ष का काम है कि संसद में हंगामे की नौबत न आए और वह सुचारु रूप से चलती रहे. विपक्ष का काम ही सरकार से सवाल पूछना है, अपने सवालों के जवाब न पाकर विरोध प्रदर्शन के अलावा वह और क्या करता? हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से सवाल पूछने और जवाब पाने की संसद के अलावा कोई और जगह है कहां?
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विपक्षी दलों द्वारा संसद की कार्रवाई रोकना संसद की कार्रवाई का हिस्सा ही है और यह सुनिश्चित करना सत्ता पक्ष का काम है कि संसद में हंगामे की नौबत न आए और वह सुचारु रूप से चलती रहे. विपक्ष का काम ही सरकार से सवाल पूछना है, अपने सवालों के जवाब न पाकर विरोध प्रदर्शन के अलावा वह और क्या करता? हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार से सवाल पूछने और जवाब पाने की संसद के अलावा कोई और जगह है
द हिंदू द्वारा देखी गई जनगणना 2027 की प्रश्नावली में जोड़े गए कुछ नए सवालों में कोविड-19 टीकाकरण, बैंक खातों, स्थायी पते, पति/पत्नी की जानकारी, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड और माता-पिता के धर्म व जन्मस्थान से जुड़ी जानकारी मांगी गई है. इसे लेकर चिंता पैदा हुई है कि इस डेटा का इस्तेमाल अल्पसंख्यक धार्मिक समूहों और प्रवासियों की पहचान करने के लिए किया जा सकता है.
बिहार के सीवान में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एके-47 के इस्तेमाल के विरोध में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने पटना में लोक भवन तक मार्च निकाला. मार्च का नेतृत्व तेजस्वी यादव ने किया, जिन्हें हिरासत में लिया गया. राजद ने घटना में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और जवाबदेही तय करने की मांग की है.
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दिल्ली में युवा आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया है. वहीं, आरटीआई के जवाब से पता चला था कि पैलेट गन से 10 लोग घायल हुए थे. दिल्ली पुलिस ने भी सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि 200 प्रदर्शनकारी घायल हुए, जबकि बिहार सरकार ने एक हलफनामे में सीवान में एके-47 राइफल के इस्तेमाल की बात स्वीकार की है.
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा है कि अगर प्रशासन दो दिनों के भीतर प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाती है, तो सीजेपी देशव्यापी आंदोलन पर विचार करेगी.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के दोषी सचिन अंदुरे की उम्रक़ैद पर रोक लगाने के लिए ‘बेहद कमज़ोर सबूतों’ का हवाला दिया. इस मामले में किसी दोषी को ज़मानत दिए जाने का यह दूसरा मौका है. इससे पहले अप्रैल में अदालत ने अंदुरे के सह-दोषी शरद कलास्कर को भी ज़मानत दी थी.
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