कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: फ़िराक़ की कविता का वितान कॉस्मिक से लेकर निपट स्थानीय तक फैला हुआ है. उसमें प्रेम, विरह, लगाव-अलगाव, सौन्दर्य और संघर्ष, हिंदी और संस्कृत की अंतर्ध्वनियां, परंपरा की अनेक दुर्लभ स्मृतियां सब समायी हुई हैं. वे बरसों स्वतंत्रता-संग्राम और राजनीति में सक्रिय रहे. इस अनुभव ने उनकी कविता की अनुभव-संपदा में इज़ाफ़ा तो किया मगर उसके सौष्ठव और परिष्कार को रुखा-खुरदरा नहीं किया.
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कभी-कभार | अशोक वाजपेयी: फ़िराक़ की कविता का वितान कॉस्मिक से लेकर निपट स्थानीय तक फैला हुआ है. उसमें प्रेम, विरह, लगाव-अलगाव, सौन्दर्य और संघर्ष, हिंदी और संस्कृत की अंतर्ध्वनियां, परंपरा की अनेक दुर्लभ स्मृतियां सब समायी हुई हैं. वे बरसों स्वतंत्रता-संग्राम और राजनीति में सक्रिय रहे. इस अनुभव ने उनकी कविता की अनुभव-संपदा में इज़ाफ़ा तो किया मगर उसके सौष्ठव और परिष्कार को रुखा-खुरदरा नहीं किया.
शिक्षकों की भूमिका इस अंधेरे समय में यह नए सिरे से महत्वपूर्ण हो गई है. आज विद्यार्थियों के पास सूचनाएं बेहद आसानी से उपलब्ध है; इसलिए शिक्षक का महत्व इस बात में है कि वह बच्चों को सोचना, प्रश्न करना और ज़िम्मेदारी से निर्णय लेना सिखाए. साथ ही संवेदनशीलता, सह-अस्तित्व, लोकतांत्रिक सोच, समानता जैसे मूल्यों के बीज भी डालें. देश में कितने शिक्षक ऐसा करने के लिए तैयार हैं?
2018 में सुभाष चंद्रा ने एक ‘नेट वर्थ सर्टिफिकेट’ जमा किया था, जिसमें उनकी नेटवर्थ 59,113 करोड़ रुपये बताई गई थी. हालांकि, उनके दिवालियापन संबंधी मामले में उन्होंने दावा किया है कि उनकी नेट वर्थ ‘कभी 50,000 करोड़ रुपये नहीं थी.’ इसी दावे के बाद एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड ने सीबीआई के समक्ष धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज कराया.
उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने इसे ग़लत और असंवैधानिक बताते हुए इस अनुष्ठान को करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है. इससे पहले चिराग पासवान भी इस शुद्धीकरण को अनुष्ठान को 'चिंता का विषय' बता चुके हैं.
सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में मुरादाबाद के सर्किट हाउस परिसर में सपा के बुज़ुर्ग नेता हाजी मोहम्मद उस्मान एक कार के क़रीब नमाज़ पढ़ते नज़र आ रहे हैं, जिसके आधार पर एफआईआर बीएनएस की धारा 285 (सार्वजनिक मार्ग में ख़तरा या बाधा उत्पन्न करना) और धारा 292 (सार्वजनिक उपद्रव) के तहत दर्ज की गई है. हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इससे सार्वजनिक रास्ते में किस तरह बाधा उत्पन्न हुई या उपद्रव हुआ.
सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर स्थित मस्जिद को सिटी मजिस्ट्रेट ने जुलाई में 'अवैध' घोषित करते हुए ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था. बजरंग दल के नेता विकास त्यागी की शिकायत के बाद यह मामला शुरू हुआ था, वहीं मस्जिद समिति के मुतवल्ली का दावा है कि यह मस्जिद 150 साल पुरानी है. वहीं, सपा सांसद इक़रा हसन का कहना है कि उन्हें इस दौरान सहारनपुर जाने से रोकते हुए नज़रबंद कर दिया गया.
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