बीते शनिवार (28 फरवरी) को मथुरा और वृंदावन शहरों में होली के दौरान उमड़ी भीड़ और अव्यवस्था को दिखाता एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में एक पत्रकार और आठ अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस का कहना है कि इस पुराने वीडियो के चलते लोगों में 'डर का माहौल' बन गया है.
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बीते शनिवार (28 फरवरी) को मथुरा और वृंदावन शहरों में होली के दौरान उमड़ी भीड़ और अव्यवस्था को दिखाता एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप में एक पत्रकार और आठ अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस का कहना है कि इस पुराने वीडियो के चलते लोगों में 'डर का माहौल' बन गया है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की हत्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि मोदी को इस पर 'खुलकर बोलना चाहिए' कि क्या वे विश्व व्यवस्था को परिभाषित करने के तरीके के रूप में किसी राष्ट्राध्यक्ष की हत्या का समर्थन करते हैं. साथ ही कहा कि इस मुद्दे पर चुप्पी दुनिया में भारत की साख को कम करती है.
मामला इंदौर के चोइथराम अस्पताल के पास का है, जहां सीवर की सफाई करते समय ज़हरीली गैस की चपेट में आने से नगर निगम के दो कर्मचारियों की दम घुटने से मौत हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि दोनों सफाईकर्मी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवर चैंबर में उतरे थे, और प्रशासन की ओर से भी सहायता काफी देर में पहुंची.
महाराष्ट्र के पालघर ज़िले में बोइसर एमआईडीसी क्षेत्र में स्थित भगेरिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड की एक इकाई में 2,500 लीटर क्षमता वाले ओलियम टैंक से गैस रिसाव होने के बाद सफेद धुएं का घना गुबार बन गया, जो तेज़ हवा के कारण तेज़ी से फैल गया. एहतियातन 1,600 स्कूली छात्रों सहित 2,600 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया.
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सोनिया गांधी ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की लक्षित हत्या पर मोदी सरकार की चुप्पी की आलोचना करते हुए कहा कि जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर भारत संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय क़ानून की स्पष्ट रक्षा नहीं करता, तो यह विदेश नीति की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाता है. उन्होंने जोड़ा कि इस मामले में चुप्पी तटस्थता नहीं है.
संभल के एक वकील द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने बताया कि उसके पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि संभल की जामा मस्जिद किसी पूर्व संरचना को तोड़कर या ख़ाली जमीन पर बनाई गई थी. एएसआई ने यह भी कहा कि उसके पास मस्जिद निर्माण के समय ज़मीन के मालिक या मालिकाना हक़ से जुड़े दस्तावेज़ भी उपलब्ध नहीं हैं.
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