पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो किसान नेताओं - दिग्विजय सिंह भाटी और मोहित जाटव ने आरोप लगाया है कि मेरठ के ज़िला पुलिस प्रमुख और अन्य पुलिस अधिकारियों ने उन्हें अपने कार्यालय और एक दूसरी जगह पर बेरहमी से पीटा, अपमानित और प्रताड़ित किया. शुरू में पुलिस ने आरोपों से इनकार करते हुए इन्हें ‘झूठा और निराधार’ बताया था. अब मामले की जांच का आदेश दिया गया है.
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो किसान नेताओं - दिग्विजय सिंह भाटी और मोहित जाटव ने आरोप लगाया है कि मेरठ के ज़िला पुलिस प्रमुख और अन्य पुलिस अधिकारियों ने उन्हें अपने कार्यालय और एक दूसरी जगह पर बेरहमी से पीटा, अपमानित और प्रताड़ित किया. शुरू में पुलिस ने आरोपों से इनकार करते हुए इन्हें ‘झूठा और निराधार’ बताया था. अब मामले की जांच का आदेश दिया गया है.
पुस्तक समीक्षा: एक कलाकार की हैसियत से गंगूबाई हंगल के संगीत को सब सुनते हैं, सराहते हैं, मगर उनके निजी जीवन के संघर्षों को नहीं जानते हैं. 'जीवन संगीत' नाम से हिंदी में अनूदित उनकी आत्मकथा उसी अनकहे जीवन को कहती है.
दिसंबर 2023 में जम्मू-कश्मीर के पुंछ ज़िले में आतंकवादियों के घात लगाकर किए गए हमले के बाद सुरक्षा बलों की पूछताछ के दौरान कथित तौर पर तीन नागरिकों की मौत हो गई थी. इस मामले में ब्रिगेडियर पी. आचार्य को दो साल की सज़ा दी गई थी, जिसे उन्होंने आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल में चुनौती दी थी. ट्रिब्यूनल ने सेना के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है.
चंपत राय द्वारा लिखे पत्र में संकेत दिया गया है कि मंदिर निर्माण से जुड़े फैसलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व सलाहकार और ट्रस्ट की निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे नृपेंद्र मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका थी. उन्होंने मिश्रा द्वारा लिए गए कुछ फैसलों, ख़ासकर कर्मचारियों के चयन को लेकर भी असंतोष ज़ाहिर किया है. पत्र में लगाए गए आरोपों से संकेत मिलता है कि 2020 से मंदिर निर्माण से जुड़े फैसले लेने में मिश्रा की प्रमुख भूमिका रही थी.
पिछले एक महीने के दौरान तीन केंद्रीय मंत्रियों- रविशंकर प्रसाद, मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने संसद के भीतर और बाहर दिए बयानों में छात्र आंदोलन दौरान प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने की बात से इनकार किया था. वहीं, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस पर अब तक ख़ामोश रहे हैं. सरकार ने इस बात का स्पष्ट खंडन नहीं किया है बल्कि सुप्रीम कोर्ट की उच्चाधिकार प्राप्त समिति का हवाला दिया, जो पुलिस कार्रवाई की जांच करेगी.
'आज़ादी के मायने' श्रृंखला की आठवीं क़िस्त: एक तरफ पिछले बारह सालों में पच्चीस करोड़ लोगों को गरीबी की रेखा से ऊपर किए जाने का दावा है, दूसरी तरफ अस्सी करोड़ से ज़्यादा लोगों को सरकारी राशन पर गुजर-बसर करनी पड़ रही है. इन हालात के मद्देनज़र सोचिए जरा, जिस तरह देश के नागरिक बिकने को मजबूर और निवेशक उनको खड़े-खड़े खरीदने में समर्थ हो गए हैं, वे वैसे ही बने रहे तो आगे क्या होगा?
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