जातीय हिंसाग्रस्त मणिपुर में कुकी इनपी मणिपुर और यूनाइटेड नगा काउंसिल ने कांगपोकपी और नोनी ज़िलों में 13 मई को हुए एक हिंसक हमले के बाद ये बंद लागू किए हैं. नाकेबंदी के कारण आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है. सैकड़ों यात्री, ड्राइवर और परिवहन कर्मी पर्याप्त भोजन, पीने के पानी और स्वच्छता सुविधाओं के अभाव में रास्ते में फंसे हुए हैं.
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जातीय हिंसाग्रस्त मणिपुर में कुकी इनपी मणिपुर और यूनाइटेड नगा काउंसिल ने कांगपोकपी और नोनी ज़िलों में 13 मई को हुए एक हिंसक हमले के बाद ये बंद लागू किए हैं. नाकेबंदी के कारण आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है. सैकड़ों यात्री, ड्राइवर और परिवहन कर्मी पर्याप्त भोजन, पीने के पानी और स्वच्छता सुविधाओं के अभाव में रास्ते में फंसे हुए हैं.
उत्तराखंड में जारी चारधाम यात्रा के शुरुआती महीने में 50 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक़, ज़्यादातर मौतें दुर्घटनाओं के कारण नहीं, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं- जैसे दिल का दौरा, ऊंचाई पर होने वाली बीमारी, उच्च रक्तचाप और खराब मौसम के संपर्क में आने के कारण हुई हैं.
12 वर्षों से अधिक के अपने कार्यकाल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचते रहे हैं. इसमें विदेशी दौरों के दौरान होने वाली खुली और बिना पूर्व-निर्धारित सवालों वाली संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी शामिल हैं. इसके बजाय वे मेजबान देशों के नेताओं के साथ पहले से तैयार संयुक्त बयान देना पसंद करते रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल जनवरी में उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की ज़मानत अर्ज़ी ख़ारिज कर दी थी. ये दोनों दिल्ली दंगों से जुड़े केस में पिछले पांच साल से जेल में बंद हैं. सोमवार को जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने इस संबंध में अपनी आपत्तियां ज़ाहिर करते हुए कहा कि ज़मानत नियम है और जेल अपवाद. अदालत ने जोड़ा कि किसी भी सभ्य समाज की बुनियाद ‘निर्दोषता की धारणा’ पर टिकी होती है.
पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स ने एक बयान में कहा कि सांप्रदायिक उत्पीड़न और सामाजिक बहिष्कार के कारण उत्तम नगर में तरुण की हत्या मामले के आरोपियों के परिवारों के बहुत सारे लोग अपने घरों में दो महीने बाद भी वापस नहीं लौट पाए हैं. इन परिवारों की औरतों और बच्चों को सांप्रदायिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है.
युद्ध से पहले जिस क्रूड ऑयल के भारतीय बाजार तक पहुंचने में 55-56 रुपये का ख़र्च आता था, अब वही 120 से 125 रुपये में पहुंच रहा है. उस समय भी भारत सरकार 55 रुपये वाले तेल को 95 से 110 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेच रही थी, जिससे सरकार को 10 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ होता था. अब जब वही तेल 125 रुपये में पहुंच रहा है, तो 10 लाख करोड़ रुपये के घाटे की
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