अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट आई है, लेकिन सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा क़ीमत कम करने के पक्ष में नहीं है. सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं तक अभी वही ईंधन पहुंच रहा है, जिसके लिए पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान ऊंचे दाम पर कच्चा तेल आयात किया गया था.
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अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में गिरावट आई है, लेकिन सरकार फिलहाल पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा क़ीमत कम करने के पक्ष में नहीं है. सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं तक अभी वही ईंधन पहुंच रहा है, जिसके लिए पश्चिम एशिया में संघर्ष के दौरान ऊंचे दाम पर कच्चा तेल आयात किया गया था.
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों के बाद चुप्पी तोड़ते हुए पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने आधिकारिक बयान जारी किया है. संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा जारी एक बयान में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और धन की हेराफेरी के मामले में गहन जांच कराने और दोषियों को कड़ी सज़ा देने की मांग की गई है.
टीएमसी की संस्थापक ममता बनर्जी और पार्टी विधायक ऋतब्रत बनर्जी, दोनों के गुट पार्टी के चुनाव चिह्न और वित्तीय संसाधनों पर अपना-अपना दावा कर रहे हैं. इस बीच टीएमसी का बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया है. दोनों में से किसका गुट वास्तविक टीएमसी है, यह साबित करने के लिए चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक का समय दिया है.
मणिपुर के नोनी ज़िले में हथियारबंद लोगों ने कथित तौर कुकी गांव में हमला किया और कई घरों में आग लगा दी. कुकी इनपी का आरोप है कि यह हमला उग्रवादी संगठन एनएससीएन-आईएम ने किया. इस बीच, कांग्रेस सांसद और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि यह मोदी सरकार की उस विभाजनकारी विचारधारा का नतीजा है, जो लोगों को धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र और पहचान के नाम पर बांटती है.
बॉम्बे हाईकोर्ट के जज जस्टिस माधव जामदार ने महाराष्ट्र पुलिस द्वारा एक राजनीतिक कार्यकर्ता के ख़िलाफ़ जारी ज़िलाबदर किए जाने के आदेश रद्द करते हुए कहा कि नागरिकों को विरोध-प्रदर्शन करने का अधिकार है. उन्होंने सवाल किया, 'क्या सभी नागरिकों को भारत सरकार का ग़ुलाम बनाया जा रहा है? वे न विरोध कर सकते हैं, न आंदोलन कर सकते हैं. आखिर यह सब क्या है?'
भारत की जेलों में जान गंवाने वाले बंदियों की मौत की श्रेणी अक्सर 'स्वाभाविक मौत' के रूप में दर्ज होती है, जबकि मुमकिन है कि समय से और सही इलाज न मिलने से भी ऐसी मौतें हुई हों, जो स्वाभाविक नहीं हैं. जब तक हिरासत में होने वाली मौतों की रूटीन तरीके से जांच नहीं होगी और उन्हें कठोर एवं स्वतंत्र न्यायिक समीक्षा से नहीं गुज़रना पड़ेगा, तब तक लंबी बीमारी में समुचित इलाज का इंतज़ार करते क़ैदी जान गंवाते
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