बिहार नल-जल योजना: ग्रामीण क्षेत्र में पूरे हुए महज़ 14 फ़ीसदी काम, आधे से भी कम बजट इस्तेमाल

विशेष रिपोर्ट: नीतीश कुमार ने चुनाव से पहले उनकी सरकार के 'सात निश्चय' की सफलता का दावा करते हुए इसके 'पार्ट-2' की घोषणा की है. हालांकि आंकड़े बताते हैं कि पार्ट-1 में शामिल कुछ योजनाएं कुछ ज़िलों में ज़मीन पर ही नहीं उतरी हैं और जहां शुरू हुईं, वहां महज़ कुछ फ़ीसदी काम पूरा हुआ है.

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बिहार में एक चुनावी सभा के दौरान नीतीश कुमार. (फोटो साभार: ट्विटर)

विशेष रिपोर्ट: नीतीश कुमार ने चुनाव से पहले उनकी सरकार के ‘सात निश्चय’ की सफलता का दावा करते हुए इसके ‘पार्ट-2’ की घोषणा की है. हालांकि आंकड़े बताते हैं कि पार्ट-1 में शामिल कुछ योजनाएं कुछ ज़िलों में ज़मीन पर ही नहीं उतरी हैं और जहां शुरू हुईं, वहां महज़ कुछ फ़ीसदी काम पूरा हुआ है.

बिहार में एक चुनावी सभा के दौरान नीतीश कुमार. (फोटो साभार: ट्विटर)
बिहार में एक चुनावी सभा के दौरान नीतीश कुमार. (फोटो साभार: ट्विटर)

नई दिल्ली: पिछले कई सालों से पलायन, बेरोजगारी, बाढ़, और गरीबी का दंश झेल रहे बिहार की जनता के सामने एक बार फिर से चुनाव आया है.

उनकी तकलीफ उस समय और बढ़ गई थी जब कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के दौरान लोगों को भयानक त्रासदी का सामना करना पड़ा, सरकारों द्वारा आवागमन का उचित प्रबंधन नहीं करने पर उन्हें अपने घर जाने के लिए हजारों किलोमीटर का लंबा सफर पैदल तय करना पड़ा, नौकरी से हाथ धोना पड़ा और कई लोग भुखमरी के शिकार हुए.

ऐसे माहौल में सभी पार्टियां बिहार के लोगों को तरह-तरह के सपने दिखा रही हैं, जिसमें रोटी, कपड़ा, मकान से लेकर कोरोना वैक्सीन देने तक के वादे शामिल हैं.

अव्वल तो ये बेहद हास्यास्पद है कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत जरूरतों को भी पार्टियां ‘चुनावी वादे’ के रूप में प्रचारित कर रह रही हैं, जो दर्शाता है कि आजादी के 73 सालों बाद भी समाज कितना पीछे है.

सत्तारुढ़ पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने साल 2015 में ‘सात निश्चय’ की घोषणा की थी, जिसके तहत पेयजल, शौचालय, महिला रोजगार समेत कुल सात क्षेत्रों में विकास कार्य किए जाने थे. ये घोषणा नीतीश सरकार के कार्यकाल में बनी योजनाओं के केंद्र में थी.

जदयू ने इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बताते हुए इसी की तर्ज पर इस बार के लिए ‘सात निश्चय पार्ट-2’ की घोषणा की है, जिसके तहत सिंचाई, गांव को स्वच्छ एवं समृद्ध बनाने, सबके लिए स्वास्थ्य सुविधान देने जैसे सात वादे किए गए हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 19 अक्टूबर को एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘हर घर नल का जल, हर घर शौचालय, हर गांव तक सड़क और पक्की नालियां-गलियां, ये सब काम तो करीब करीब हो चुका है, बचा हुआ जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हमने तय कर लिया है, अबकी बार मौका दीजियेगा तो हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचा देंगे. कहीं भी सूखा नहीं रहने देंगे. हर घर बिजली तो पहुंच गया, अब हर गांव में सोलर लाइट लगाएंगे. घर में लाइट बुझा दीजियेगा उसके बावजूद पूरा गांव रोशन रहेगा.’

बिहार सात निश्चय

हालांकि विपक्ष ने इन दावों को खारिज किया है और इन योजनाओं को जमीन पर न पहुंचने तथा इसमें उच्च स्तर तक भ्रष्टाचार व्याप्त होने का आरोप लगाया है.

अब बड़ा सवाल ये है कि क्या इन योजनाओं से वाकई बिहार की स्थिति बदली है या फिर विपक्ष के आरोप सही हैं.

द वायर  यहां नीतीश कुमार के ‘सात निश्चय’ की दो योजनाओं- पेयजल योजना और नाली-गली योजना- के क्रियान्वयन का विश्लेषण कर रहा है.

हर घर नल का जल

इस निश्चय का उद्देश्य बिहार के लगभग दो करोड़ परिवारों को पाइप के माध्यम से नल द्वारा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था.

इसे पूरा करने के लिए बिहार सरकार ने कुल चार योजनाएं शुरू की थीं, जिसमें शहरी क्षेत्र, ग्रामीण एवं पानी की खराब गुणवत्ता वाले क्षेत्रों के लिए अलग-अलग योजनाएं थीं.

1. मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना

2. मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल (गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्र) निश्चय योजना

3. मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल (गैर-गुणवत्ता प्रभावित क्षेत्र) निश्चय योजना

4. मुख्यमंत्री शहरी पेयजल निश्चय योजना

शहरी को छोड़कर बाकी क्षेत्रों के लिए इसका कार्यान्वयन पंचायती राज विभाग द्वारा कराया जा रहा है और योजना की शुरूआत 27 सितंबर 2016 में हुई थी.

मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चल योजना के तहत राज्य के गैर-गुणवत्ता प्रभावित 5013 ग्राम पंचायतों के सभी वॉर्डों के सभी परिवारों को पाइप के माध्यम से नल द्वारा स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति की जानी थी.

इसे ग्राम पंचायत के सभी वॉर्डों में लागू किया जाना था. हालांकि पंचायती राज विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक राज्य के 38 जिलों के कुल 1,14,737 वॉर्डों में से 59,730 वॉर्डों में ही ये योजना शुरू की गई थी.

इसके तहत इन वॉर्डों में कुल 63,728 तरह के कार्य (सह-योजनाएं) किए जाने थे, लेकिन इसमें से सिर्फ 8,899 कार्य ही पूरे हो पाए हैं.

इस तरह बिहार सरकार की पेयजल योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आवंटित कुल कार्य में से करीब 14 फीसदी ही कार्य पूरे हुए हैं.

विभाग के आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 26,028 कार्यों का ही निरीक्षण किया गया है, जो कुल आवंटित कार्यों की तुलना में करीब 41 फीसदी है. फिलहाल इस योजना के तहत 14,352 कार्य चल रहे हैं.

यदि जिलावार आंकड़े देखें, तो अररिया, कटिहार, किशनगंज, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा, सुपौल और सहरसा में ‘हर घर नल का जल’ निश्चय के तहत पिछले चार सालों में कोई भी कार्य शुरू नहीं किया गया.

अन्य जिलों को देखें, तो अरवल में कुल 867 वॉर्ड हैं, लेकिन इसमें से सिर्फ 646 वॉर्ड में कुल 675 कार्य आवंटित किए गए थे. इसमें से भी सिर्फ 54 कार्य पूरे हो पाए हैं. यह आवंटित कार्य की तुलना में सिर्फ आठ फीसदी है.

इसी तरह औरंगाबाद जिले में 2,851 वॉर्ड हैं और इसमें से 1941 वॉर्ड में कुल 1,988 कार्य किए जाने थे. हालांकि इसमें से सिर्फ 505 कार्य पूरे हो पाए हैं.

कैमूर जिले के 1,850 वॉर्ड में से सिर्फ 956 वॉर्ड में 1,001 कार्यों का आवंटन किया गया था, लेकिन इसमें से सिर्फ 139 कार्य पूरे हो पाए हैं.

पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, गया जिले में कुल 4,573 वॉर्ड हैं,लेकिन इसमें से 2,787 वॉर्ड में ही पेयजल योजना के तहत 2,964 कार्य आवंटित किए गए थे.

हालांकि आलम ये है कि सिर्फ 146 कार्य ही पूरे हो पाए और 447 कार्यों का निरीक्षण किया गया था.

गोपालगंज जिले के 3,177 वॉर्ड में से 2,180 वॉर्डों में कुल 2,229 कार्य शुरू किए गए थे, जिसमें से 1,071 कार्य ही पूरे हो पाए हैं. इसमें से सिर्फ 30 कार्यों का ही निरीक्षण किया गया था.

इसी तरह नालंदा जिले 3,391 वॉर्डों में से 2,126 वॉर्ड में 2,699 कार्य शुरू किए गए थे. लेकिन इसमें से सिर्फ 1,130 कार्य ही पूरे हुए हैं.

हाई-प्रोफाइल पटना जिले में 4,355 वॉर्ड हैं. लेकिन इसमें से 2,560 वॉर्ड में ही 2,699 कार्य शुरू किए गए थे, जिसमें से 189 कार्य पूरे किए गए हैं. बाकी जिलों की भी करीब-करीब ऐसी ही स्थिति है.


बिहार पेयजल एवं नाली-गली योजना by The Wire

राज्य सरकार के मुताबिक इस योजना के तहत चार वर्षों में कुल 8,373 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे, जिसमें से राज्य योजना मद से 3,068 करोड़ रुपये का व्यय होने का प्रस्ताव था.

हालांकि पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पेयजल योजना के तहत वॉर्डों को कुल 5512.60 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे. लेकिन इसमें से सिर्फ 2,525.15 करोड़ रुपये खर्च हो पाए हैं, जो आवंटित राशि के मुकाबले 50 फीसदी से कम है.

अब भी वॉर्डों के पास योजना के तहत 2987.44 करोड़ रुपये बचे हैं.

नाली-गली योजना

‘हर घर नल का जल’ की तरह नीतीश कुमार अपने एक अन्य निश्चय में ‘घर तक, पक्की गली-नालियां’ बनाने की घोषणा की थी.

इसके तहत राज्य के सभी संपर्क-विहीन बसावटों को पक्की सड़क से जोड़ा जाना था और सभी गांव एवं शहरों में गली-नाली का निर्माण कराया जाना था.

इस निश्चय को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने तीन योजनाएं शुरू की थीं.

1. ग्रामीण टोला संपर्क निश्चय योजना

2. मुख्यमंत्री ग्रामीण गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना

3. मुख्यमंत्री शहरी नाली-गली पक्कीकरण निश्चय योजना

ग्रामीण क्षेत्रों में गांव एवं बसावटों के अंतर्गत पक्की गली एवं नाली का निर्माण कराने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना की शुरूआत की गई थी.

इसके तहत चार वर्षों में 8391 ग्राम पंचायत के 1,14,733 वॉर्डों को चिह्नित किया गया था और इस कार्य के लिए कुल 14,249 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था.

हालांकि पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 74,986 वॉर्डों में ही इस योजना के तहत कार्य शुरू किए गए. इसके तहत कुल 212,551 कार्य (सह-योजना) किए जाने थे, लेकिन इसमें से सिर्फ 89,201 कार्य ही पूरे हो पाए हैं.

यह कुल आवंटित कार्य की तुलना में करीब 42 फीसदी ही है. निरीक्षण के मामले में भी यह योजना काफी पीछे है.

विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कुल 27,815 कार्यों का ही निरीक्षण किया गया है, जो कुल कार्य की तुलना में महज 13 फीसदी ही है.

पिछले चार सालों में योजना के तहत 6,425.13 करोड़ रुपये वॉर्डों को दिए गए थे, जिसमें से 4,093.64 करोड़ रुपये खर्च हो पाए है. नाली-गली योजना के तहत अभी भी वॉर्डों के पास 2,331.14 करोड़ रुपये बचे हुए हैं.

पेयजल के विपरीत यह योजना सभी जिलों में शुरू की गई थी, लेकिन इसके पूरी होने की रफ्तार काफी धीमी है.

उदाहरण के तौर पर, अररिया जिले के 2,780 वॉर्डों में इसके तहत कुल 7,939 कार्य शुरू किए गए थे. हालांकि इसमें से सिर्फ 2,576 कार्य हो पूरे हो पाए हैं, जो आवंटित कार्यों की तुलना में 30 फीसदी से भी कम है.

इतना ही नहीं, इसमें से सिर्फ 12 कार्यों का ही निरीक्षण कराया जा सकता है.

इसी तरह पटना जिले के 2,107 वॉर्डों में कुल 5,272 कार्य शुरू किए गए थे और इसमें से सिर्फ 1,156 कार्य पूरे हो पाए हैं. इसमें से महज 20 कार्यों का निरीक्षण कराया जा सका है.

पूर्वी चंपारण जिले के 2,841 वॉर्डों में कुल 5,296 कार्यों की स्वीकृति दी गई है, जिसमें से महज 418 कार्य पूरे हो पाए हैं. यहां पर सिर्फ 234 कार्यों का निरीक्षण कराया गया था.

अन्य जिलों को देखें, तो उनकी भी स्थिति लगभग ऐसी ही है. बेगूसराय जिले में नाली-गली योजना के तहत 11,329 कार्यों की स्वीकृति दी गई थी. हालांकि इसमें से सिर्फ 7,115 कार्य ही पूरे हो पाए और केवल 1,671 कार्यों का ही निरीक्षण किया गया.

भागलपुर, भोजपुर, मुंगेर, मुजफ्फरपुर और मधेपुरा में नाली-गली योजना के तहत क्रमश: 8,804, 5,450, 3,230, 4,406 और 6,070 में कार्य शुरू किए गए थे.

लेकिन इसमें से क्रमश: 4,653, 1,103, 1,622, 1,072 और 1,834 कार्य ही पूरे हो पाए हैं. ये आवंटित कार्यों की तुलना में 50 फीसदी से भी काफी कम है.

क्या है सात निश्चय पार्ट-2

नीतीश कुमार ने सात निश्चय पार्ट-1 की ‘सफलता’ का दावा करते हुए सात निश्चय पार्ट-2 की घोषणा की है.

इसके तहत ‘युवा शक्ति, बिहार की प्रगति’, ‘सशक्त महिला, सक्षम महिला’, हर खेत को सिंचाई के लिए पानी, ‘स्वच्छ गांव, समृद्ध गांव’, ‘स्वच्छ शहर, विकसित शहर’, सुलभ संपर्कता और सबके लिए स्वास्थ्य सुविधा जैसे वादे शामिल हैं.

कुमार को लॉकडाउन के दौरान श्रमिकों के आवागमन की उचित व्यवस्था न करने, राज्य में बेरोजगारी बढ़ने, स्वास्थ्य व्यवस्था की बदतर स्थिति, बाढ़ का समाधान न करने जैसे कई तरह के आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.

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