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स्थिति नाज़ुक, गलवान की पुनरावृति को ख़ारिज नहीं किया जा सकता: रक्षा विशेषज्ञ सी. उदय भास्कर

रक्षा विशेषज्ञ सी. उदय भास्कर का कहना है कि पूर्वी लद्दाख में स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है. पीएलए भारत के दावे वाली सीमारेखा के भीतर बुनियादी ढांचा सुदृढ़ कर रहा है. इस लिहाज़ से गलवान घाटी की घटना के बाद भारत कम अनुकूल स्थिति में है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) द्वारा भारत के एक किशोर को अगवा करने की घटना के बाद देश में रोष है. अरुणाचल प्रदेश के 17 वर्षीय किशोर मिराम तरोन की वापसी का सभी इंतजार कर रहे हैं, वहीं चीन का कहना है कि उसे ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है और पीएलए सीमा की निगरानी करती है एवं किसी भी ‘अवैध प्रवेश एवं निकास’ के विरूद्ध कार्रवाई करती है.

सीमा विवाद को लेकर पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में 2020 के अप्रैल में शुरू गतिरोध के बाद चीन ने अरुणाचल प्रदेश के हिस्सों के नए नाम रख एक और विवाद खड़ा करने की कोशिश की और अब भारतीय को अगवा करने की घटना दोनों देशों के संबंधों में फिर से तनाव का कारण बनी है.

इन्हीं सब मुद्दों पर रक्षा विशेषज्ञ सी. उदय भास्कर से समाचार एजेंसी भाषा का सवाल और उनके जवाब.

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अरुणाचल प्रदेश के एक किशोर को अगवा कर लिया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब भारत के साथ पूर्वी लद्दाख में गतिरोध बना हुआ है?

अरुणाचल प्रदेश से किशोर को अगवा किए जाने की खबर एक अवांछनीय घटनाक्रम है. माना जा रहा है कि भारत ने उपलब्ध माध्यमों के जरिये चीन के समक्ष यह मुद्दा उठाया है. सच्चाई यह है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का सीमांकन स्पष्ट नहीं है और इसी वजह से इस प्रकार की घटनाएं होती हैं.

इसी प्रकार का एक मामला 2020 के सितंबर महीने में सामने आया था और अगवा किए गए लोगों को एक सप्ताह के बाद वापस भेज दिया गया था. उम्मीद है कि मिराम तरोन की भी जल्द ही घर वापसी होगा.

सैनिकों को पीछे हटाने और अन्य संबंधित मुद्दों पर भारत और चीन के बीच कमांडर स्तरीय वार्ता का दौर अब भी जारी है. दोनों देशों के सैनिक अब भी एलएसी पर डटे हुए हैं. 2020 के अप्रैल में शुरू हुए इस गतिरोध को आज कहां देखते हैं?

पूर्वी लद्दाख में स्थिति ज्यों की त्यों बनी हुई है. पीएलए भारत के दावे वाली सीमारेखा के भीतर बुनियादी ढांचा सुदृढ़ कर रहा है. इस लिहाज से गलवान घाटी की घटना के बाद भारत कम अनुकूल स्थिति में है.

पारस्परिक स्वीकार्य समाधान न होने तक भारत की क्या रणनीति होनी चाहिए?

पीएलए को भविष्य में इस प्रकार के उल्लंघन से रोकने के लिए भारत का अपनी सैन्य क्षमता में वृद्धि करना ही बेहतर होगा और भारत को अपने इस संकल्प के बारे में चीन को राजनयिक और सैन्य स्तर पर संदेश देना चाहिए. साथ ही साथ वर्तमान तनाव को कम करने के लिए भारत को विवाद का निपटारा होने तक परस्पर स्वीकार्य व्यवस्था तक पहुंचने के लिए बीजिंग को प्रोत्साहित करने की कोशिश करनी चाहिए.

इसके अलावा सीमा विवाद की इस कटुता को समाप्त करने के लिए एक राजनीतिक वातावरण निर्माण करना चाहिए. दोनों देशों के बीच अक्टूबर 1962 में युद्ध हुआ था और इसकी पुनरावृति अवांछनीय होगी और दोनों देशों के लिए महंगी पड़ेगी.

क्या आपको लगता है कि हम एक सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ रहे हैं या फिर दोनों देशों के बीच किसी प्रकार के युद्ध की ओर?

स्थिति अभी धुंधली है… गलवान की पुनरावृति को खारिज नहीं किया जा सकता.

ऐसी परिस्थिति में भारत-चीन संबंध को किस दिशा में बढ़ते देख रहे हैं आप?

अभी स्थिति नाजुक बनी हुई है और परस्पर विरोधी भी है. यह अजीब है कि जब एलएसी पर तनाव है, चीन और भारत का व्यापार गलवान और कोविड-19 के बावजूद दोनों तरफ से बढ़ रहा है. यहां अधिक पारदर्शिता की जरूरत है.