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द कश्मीर फाइल्स ने हिंदुत्ववादियों को मुस्लिमों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने का बहाना दे दिया है

सिनेमाघरों में द कश्मीर फाइल्स देखने वालों के नारेबाज़ी और सांप्रदायिक जोश से भरे वीडियो तात्कालिक भावनाओं की अभिव्यक्ति लगते हैं, लेकिन ऐसे कई वीडियो की पड़ताल में कट्टर हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं और संगठनों की भूमिका स्पष्ट तौर पर सामने आती है.

(साभार: फेसबुक स्क्रीनग्रैब/@PallaviJoshiOfficial)

नई दिल्ली: करीब दो सप्ताह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भारतीय जनता पार्टी के उन नेताओं की सूची में शामिल हो गए, जिन्होंने निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री की विवादास्पद नई फिल्म द कश्मीर फाइल्स  का समर्थन और प्रचार किया है.

मोदी ने दावा किया कि फिल्म ने कश्मीरी पंडित समुदाय के खिलाफ हिंसा के बारे में सच्चाई को दिखाया है, साथ ही उन्होंने गुमनाम लोगों पर इसके कंटेंट को बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया.

जहां आलोचकों ने वास्तव में कश्मीर मुद्दे पर फिल्म के दृष्टिकोण पर सवाल उठाया है, वहीं अधिक चिंता की बात वो रवैया है, जो संघ परिवार और भाजपा कार्यकर्ताओं-नेताओं द्वारा बड़े पैमाने पर मुस्लिम विरोधी नफरत को भड़काने के लिए फिल्म को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने के लिए अख्तियार किया जा रहा है.

फिल्म के सिनेमाघरों में आने के शुरुआती हफ़्तों में वहां से आक्रामक युवकों के हिंसा भड़काने और मुसलमानों के बहिष्कार का आह्वान करने वाले कई वीडियो सामने आए हैं. इनमें से कुछ वीडियो को भाजपा नेताओं द्वारा लोकप्रिय बनाया गया है, संभवत: यह इशारा करने के लिए कि फिल्म ने आम हिंदुओं को छुआ है.

लेकिन सिनेमाघरों के अंदर ये नफरत भरे भाषण देने वाले लोग कौन हैं? इंटरनेट पर आए वीडियो फिल्म देखने वालों में फिल्म देखने वालों के भीतर उपजी सांप्रदायिक भावनाओं की एक सहज और तात्कालिक अभिव्यक्ति लग सकते हैं, लेकिन द वायर  द्वारा की गई इन वीडियो क्लिप की समीक्षा बताती है कि इन नफरती वीडियो में देखे गए कई पुरुषों का मुस्लिम विरोधी अभियानों, मुसलमानों के खिलाफ हिंसक विरोध और कई अन्य हिंदुत्व गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होने का इतिहास रहा है.

मिसाल के लिए, सिनेमाघरों में हेट स्पीच देते दिखाई देने वाले दो लोग- दीपक सिंह और विनोद शर्मा- लंबे समय से सांप्रदायिक अभियानों का हिस्सा रहे हैं. ये दोनों कार्यकर्ता 30 जनवरी, 2020 को किसान आंदोलन के खिलाफ हिंदुत्व प्रायोजित भीड़, जिसे मीडिया द्वारा ‘प्रदर्शन  चलते होने वाली असुविधा से नाराज स्थानीय प्रदर्शनकारियों‘ के रूप में पेश किया था, का भी हिस्सा थे.

इनमें से कई अन्य लोग हेट स्पीच देने और ‘लव जिहाद’ जैसे मुद्दों पर नफरत फैलाने या मुसलमानों के सामाजिक-आर्थिक बहिष्कार का आह्वान करने में सक्रिय रहे हैं. इन कार्यकर्ताओं द्वारा बनाए और पोस्ट किए गए वीडियो यह स्पष्ट करते हैं कि फिल्म हिंदुत्व इकोसिस्टम के लिए नफरत के अंगारों को भड़काने का एक जरिया बन गई है.

‘लव जिहाद’, ‘जनसंख्या जिहाद’ का फ़र्ज़ी हौव्वा और मुस्लिम महिलाओं से बदला लेने का आह्वान

हिंदुत्व नेता पिंकी चौधरी के करीबी सहयोगी राकेश सिसोदिया, जिन्हें पिछले साल जंतर-मंतर हेट स्पीच मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था, ने ग्रामीणों के एक समूह को प्रोजेक्टर पर द कश्मीर फाइल्स दिखाई. अपने फेसबुक पेज पर उन्होंने मुसलमानों से बदला लेने की अपील करते हुए भड़काऊ पोस्ट डाली, ‘क्या कश्मीरी हिंदुओं का बदला लेना चाहिए? कश्मीर जैसे मुस्लिम आपके पड़ोसी भी हैं लेकिन अभी जनसंख्या में कम हैं, जिस दिन बराबर हो गए ये हाल हर जगह होगा. एक रहें और सतर्क रहें.’

पश्चिम दिल्ली से भाजपा सांसद प्रवेश साहिब सिंह वर्मा द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में एक अज्ञात व्यक्ति को एक थिएटर में अपने भाषण में यह कहते हुए सुना जा सकता है कि ‘अगर हम धर्मनिरपेक्षता नहीं छोड़ते हैं, तो कश्मीर के बाद यह केरल और पश्चिम बंगाल में दोहराया जाएगा. हमने दिल्ली में दंगे देखे हैं जिसमें ताहिर हुसैन ने नेगी को मार डाला था.’

उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के प्रचार के दौरान प्रवेश वर्मा ने कहा था कि अगर शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहा तो दिल्ली में कश्मीर जैसे हालात बन जाएंगे और प्रदर्शनकारी आपके घरों में घुस सकते हैं और ‘आपकी बहन-बेटियों का बलात्कार कर सकते’ हैं.

दिल्ली में फिल्म को टैक्स फ्री करने के लिए हुए एक प्रदर्शन में भाजपा समर्थक. (फोटो: पीटीआई)

दक्षिणपंथी हिंदू सेना के नेता सुशील तिवारी, जिन्हें भी जंतर मंतर हेट स्पीच मामले में गिरफ्तार किया गया था, को लखनऊ में फिल्म देखने के बाद हिंदुओं को चेतावनी देने वाले एक वीडियो में देखा जा सकता है. वे कहते हैं, ‘अगर भारत का हिंदू अब भी नहीं जागा तो 30 साल पहले कश्मीर में जो  घटना हुई, वह मात्र 15 साल बाद पूरे देश में दोहराई जा सकती है.’

तिवारी कहते हैं कि मुस्लिम अपनी ‘खतरनाक जनसंख्या वृद्धि से देश पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम जनसंख्या वृद्धि को कानूनों के माध्यम से नियंत्रित नहीं किया गया तो वे हिंदुओं का नरसंहार करेंगे. उन्होंने आगे मुस्लिम बच्चों को ‘संपोले’ बताते हुए कहा कि ‘जो आज 14-15 बरस के हैं, वे 18 के हो जाएंगे, और आज जो 50 विधर्मी उत्तर प्रदेश विधानसभा में पहुंचे हैं, ये… पंद्रह साल बाद दो सौ हो जाएंगे. ये बहुमत में होंगे और फिर देश के हिंदू का वही हश्र होगा जो कश्मीर के हिंदुओं का हुआ.’

तिवारी की ही तरह कट्टर दक्षिणपंथी नेता दीपक सिंह हिंदू भी 12 मार्च 2022 को अपने समूह के अन्य लोगों के साथ फिल्म देखने पहुंचे. सिनेमाघर में जब पुलिस ने उन्हें वहां नारेबाजी से मना किया तो इस समूह की पुलिस से झड़प हुई. पुलिस ने उनसे ‘कानून और व्यवस्था बनाए रखने’ को कहा था.

दीपक सिंह हिंदू वहीं व्यक्ति हैं, जिन्होंने दो साल पहले 23 फरवरी, 2020 की सुबह हिंदुओं से उत्तर-पूर्वी दिल्ली में मुस्लिम विरोधी हिंसा का केंद्र रहे मौजपुर में ‘धार्मिक युद्ध’ के लिए इकट्ठा होने का आह्वान किया था और जिन्हें हाल ही में जंतर मंतर हेट स्पीच और जनसंहार का आह्वान करने के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था.

दीपक सिंह ने भी फिल्म के सहारे मुस्लिमों की बढ़ती आबादी को लेकर फैलाए हौव्वे को हवा देने का प्रयास किया है. 19 मार्च 2022 को एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता पर कार्य न हुआ तो द कश्मीर फाइल्स देखने के लिए सिनेमाघरों में नहीं जाना पड़ेगा, सब लाइव देखने को मिलेगा.’

एक अन्य वायरल वीडियो में एक अनाम व्यक्ति सिनेमा हॉल में बेहद उत्तेजना के साथ दर्शकों को संबोधित करते हुए हिंदुओं को मुस्लिमों द्वारा आबादी बढ़ाने से रोकने के लिए कह रहा है. इस व्यक्ति को कहते सुन सकते हैं, ‘जो 20-25 साल से कम है, अगर हर वो लड़का मुसलमान लड़की से शादी करना शुरू कर दे तो तीन पीढ़ी के अंदर इनकी जनसंख्या आधी से कम हो जाएगी. इनकी लड़कियों से शादियां करो, इनके बच्चे पैदा करने कम करो. हम यहां फिल्म देख रहे हैं, वो वहां अपने घरों अपनी आबादी बढ़ा रहे हैं.’

‘गद्दारों’ और मुस्लिमों को मारने का आह्वान

देश के कई सिनेमाघरों से लोगों द्वारा ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो **** को’ का नारा लगाते हुए वीडियो भी वायरल हुए हैं. यह नारा सीएए समर्थक प्रदर्शनों में भाजपा नेता कपिल मिश्रा द्वारा दिए जाने के बाद चर्चा में आया था.

पिछले साल जब एक साक्षात्कार के दौरान द वायर  ने मिश्रा से उनके द्वारा जामिया मिलिया इस्लामिया और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के छात्रों को गोली मारने के नारे के बारे में सवाल किया तब उन्होंने पहले तो ऐसा कुछ कहने से ही इनकार कर दिया. जब उन्हें उन्हीं का वीडियो दिखाया गया, तब उन्होंने कहा कि ‘गोली मारो **** को नारा लगाने में कोई हर्ज नहीं है और दो शब्दों की राइम (तुकबंदी) हो रही है, इसलिए लोग बोलते हैं.’

गौरतलब यह भी है कि उनके यह नारा देने के ग्यारह दिन के भीतर ही दो नौजवानों ने जामिया और शाहीन बाग में उस समय चल रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में गोली चलाई.

इस बार बिजनौर के एसआरएस सिनेमा से द कश्मीर फाइल्स देखकर बाहर निकल रहे आरएसएस से संबद्ध हिंदू जागरण मंच के सदस्यों द्वारा यह नारा लगाया गया. नारे लगाने में अगुआ थे मंच के जिला महामंत्री क्षत्रिय अंशुल आर्य. उन्होंने और मंच के कई सदस्यों ने वीडियो अपने फेसबुक एकाउंट से पोस्ट किए.

बिजनौर के ही एक अन्य थिएटर के वीडियो में एक अनाम शख्स मुस्लिमों के नरसंहार का आह्वान कर रहा है. भाजपा जिंदाबाद के नारे के साथ वह ‘जब मुल्ले काटे जाएंगे, राम राम चिल्लाएंगे’ कहता है.

जुलाई 2021 में यह नारा हरियाणा में हुई महापंचायतों में जामिया में गोली चलाने वाले लड़के द्वारा भी दिया गया था. इसके एक महीने बाद सात अगस्त 2021 को यह नारा जंतर-मंतर पर गूंजा, जहां भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय और कई हिंदुत्व संगठनों ने ‘औपनिवशिक कानूनों’ के खिलाफ रैली बुलाई थी.

ट्विटर पर बिजनौर पुलिस ने जवाब दिया है कि वह दोनों वीडियो की जांच कर रहे हैं.

इसी कड़ी में जंतर-मंतर हेट स्पीच मामले के एक अन्य आरोपी और सुदर्शन वाहिनी के प्रमुख विनोद शर्मा उर्फ़ आज़ाद विनोद ने अपने समूह के लोगों के साथ फिल्म देखने के बाद कहा, ‘अहिंसा परमो धर्मः जीवन की कस्तूरी है. यदि दुष्ट नहीं मानें तो हिंसा बहुत ज़रूरी है.’

वायरल हो रहे इन संदेशोंऔर वीडियो में जो बात मुख्य है वो है मुस्लिमों को लेकर भय उपजाना और हिंदुओं में यह नफरत भरना कि अगर हिंदू नहीं जागे तो जो कश्मीर में हुआ वही पूरे देश में दोहराया जाएगा. जंतर-मंतर पर हुई नारेबाजी के मामले में गिरफ्तार हुए कई लोग, जो फ़िलहाल जमानत पर हैं, इसी तरह के संदेशों का प्रचार कर रहे हैं और फिल्म के सहारे मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा भड़का रहे हैं.

‘लव जिहाद’

कुछ लोगों ने फिल्म के प्रचार को लेकर एक अलग ही तरह का बीड़ा उठा लिया है. आज़ाद विनोद द कश्मीर फाइल्स के टिकट स्पॉन्सर कर रहे हैं. एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि वे 18-30 साल की कम से कम 200 हिंदू महिलाओं को फिल्म दिखाना चाहते हैं, जिससे वे ‘लव जिहाद’ के बारे में जागरूक हो सकें.

14 मार्च को उन्होंने दावा किया कि उन्होंने दिल्ली के रोहिणी के जी3एस सिनेमा में 150 हिंदू औरतों को यह फिल्म दिखाई. फिल्म के बाद दर्शकों को संबोधित करते हुए उन्होंने मुस्लिमों का डर दिखाया. फिल्म के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, ‘यह हमारा भूतकाल था, लेकिन अगर आप लोगों ने इन्हें नहीं समझा तो यह हमारा भविष्य होगा.’

दीपक सिंह और विनोद शर्मा. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

सिनेमा हॉल के बाहर उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि ‘वे अपने आसपास की कम से कम एक हिंदू महिला को फिल्म का टिकट गिफ्ट में दें ताकि वे इन सुअरों के लव जिहाद के चक्कर में न फंसें.’

18 मार्च को सुदर्शन वाहिनी ने मध्य प्रदेश के बड़वानी में कथित तौर पर सौ से अधिक हिंदू महिलाओं के लिए टिकट खरीदे. विनोद शर्मा ने इस बारे में अपने फेसबुक एकाउंट पर लिखा, ‘… आने वाले समय मे यदि हिंदू समाज सेकुलरिज्म नही छोड़ता है तो कश्मीर जैसी घटनाएं हमारे आसपास भी घट सकती हैं…’

इसी तरह साल 2021 में दिल्ली के उत्तम नगर में मुस्लिम वेंडरों के खिलाफ हुई हिंसा से पहले नफरत भरे भाषण देने वाले हिंदुत्व नेता स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने भी फिल्म देखने के बाद दर्शकों को संबोधित करते हुए ‘लव जिहाद’ का राग अलापा.

जितेंद्रानंद ने कहा, ‘… जैसे कोरोना के वायरस से दूर रहना है, वैसे ही इनसे दूर रहना. ये नाम बदलकर भी आ जाते हैं. कोई सलमान सुरेश बन जाएगा, रहमान रमेश बन जाएगा, फिर हमारी बहन-बेटियों से लव जिहाद करते हैं.’ उन्होंने यह भी कहा कि ‘अपनी रक्षा के लिए भोलेनाथ का त्रिशूल भी उठा लो.’

विनोद द्वारा साझा किए गए एक अन्य वीडियो में थिएटर के अंदर जितेंद्रानंद की मौजूदगी में उनका एक सहयोगी कहता नज़र आता है, ‘अगर हम नहीं जागे तो मध्य प्रदेश क्या, बड़वानी में भी यही स्थिति होगी… हमें क्या करना है, हमें हथियार नहीं उठाना है, बस दो काम करना है… हम तय कर लें कि न तो हम हमारा कबाड़ किसी जिहादी को देंगे, न ही किसी जिहाद वाले से खरीदी करेंगे. इनकी आर्थिक रीढ़ की हड्डी हम तोड़ देते हैं. नहीं तो आने वाली परिस्थिति में जैसे हम ये फिल्म देखने आए हैं, वैसे पूरा विश्व भारत की फिल्म देखने आएगा.’

सुरेश राजपूत उर्फ़ ‘हिंदू शेर बॉय’ एक और हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर हैं. यति नरसिंहानंद के इस शिष्य द्वारा अपने चैनल पर नियमित तौर पर हिंसा, बलात्कार और हत्या के आह्वान प्रसारित किए जाते हैं और कट्टरपंथी भाषणों के चलते उनका फेसबुक एकाउंट और यूट्यूब चैनल सस्पेंड भी किया जा चुका है.

सुरेश ने भी फिल्म के रिलीज़ होने के बाद नफरत भरे वीडियो अपलोड किए. एक वीडियो में वो कॉमेडियन कपिल शर्मा द्वारा फिल्म को कथित तौर पर प्रमोट न करने को लेकर उन पर निशाना साधते हुए कहते हैं, ‘मुझे इस पर और इसकी मां पर शर्म आती है कि कैसे बेटे को जन्म दिया है, मुझे शर्म आती है कहते हुए कि यह किसी ब्राह्मण का बीज हो सकता है…’

एक अन्य वीडियो में वह एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी के संसद में दिए गए भाषण कि कुछ सेकेंड की क्लिप दिखाते हुए बेहद अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते नजर आते हैं. वे आगे कहते हैं, ‘इस फिल्म में भाजपा और नरेंद्र मोदी जी का पूरा-पूरा हाथ है, और कुछ बड़ा जरूर होवेगा. कुछ बड़ा होगा मोदी जी तरफ से, इसीलिए पहले सबकी आंखें खोलनी जरूरी थीं, जो उन्होंने खोल दीं.

उनके फेसबुक एकाउंट पर पोस्ट किए गए एक और वीडियो में वे नफरत की राजनीति और बहुसंख्यकवाद की आलोचना करने वाले वायरल गीत गाने के लिए गायिका नेहा सिंह राठौर को लेकर सांप्रदायिक और भद्दी टिप्पणियां करते दिख रहे हैं. वे ‘सेकुलरिज्म के कीड़े और सेकुलर हिंदुओं’ को कश्मीरी पंडितों के पलायन का जिम्मेदार बताते हैं.

बीते साल त्रिपुरा में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद राजपूत ने हिंदुओं को त्रिपुरा में ‘सही से दीवाली’ मनाने के लिए खासा सराहा था. अपने कुछ वीडियो में सुरेश महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा की धमकी देते हुए भी दिखे हैं और एक बार उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री को जान से मारने की धमकी भी दी थी.

कश्मीरी पंडितों के पलायन के बदले इस्लाम को प्रतिबंधित करने की अपील

एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल द्वारा द कश्मीर फाइल्स पर रोक लगाने  पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदुत्व नेता आनंद स्वरूप ने सरकार से तत्काल ‘इस्लाम और क़ुरान पर प्रतिबंध लगाने’ की मांग की. एक वीडियो में वे कहते हैं, ‘जब तक भारत की भूमि पर इस्लाम रहेगा, क़ुरान रहेगी, ये कश्मीर जैसी घटनाएं करते रहेंगे.’

दिसंबर 2021 में हरिद्वार में हुई ‘धर्म संसद’ में आनंद स्वरूप प्रमुख वक्ताओं में से एक थे, जहां उन्होंने उनकी मांगें पूरी न होने पर ‘भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने’ की बात कही थी.

अपने हालिया वीडियो में उन्होंने बदरुद्दीन अजमल को चेताते हुए कहा कि उन्हें इस्लाम छोड़कर ‘घर वापस’ हो जाना चाहिए, इसी में उनकी भलाई है. उन्होंने कहा, ‘नहीं तो भारत के हिंदू राष्ट्र होने के बाद जिस प्रकार तुमको मुसलमान बनाया गया, वैसे ही जनता तुम्हें हिंदू बनाने का कार्य करेगी.’

मुंबई के एक सिनेमाघर में लगा फिल्म का पोस्टर. (फोटो: रॉयटर्स)

सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ा

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने सभी जिलों के डीसीपी को द कश्मीर फाइल्स फिल्म के मद्देनजर शहर के मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम करने के लिए कहा था.

उनके पत्र में कहा गया, ‘2020 के पूर्वोत्तर दिल्ली दंगों के बाद से दिल्ली में सांप्रदायिक स्थिति अभी भी नाजुक है. हाल ही में हिजाब/बुर्का विवाद और हरिद्वार धर्म संसद के मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत भरी भाषा का इस्तेमाल हुआ, ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि एक छोटी-सी घटना भी दोनों समुदायों के बीच सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकती है और कानून व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सकती है.’

17 मार्च को देहरादून के जोगीवाला इलाके में एक मुस्लिम धर्मस्थल को कथित तौर पर अपवित्र करने के आरोप में हरेंद्र कंडारी नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया था. कंडारी पर आईपीसी की धारा 153 ए, 295 और 427 के तहत ‘धर्मों के बीच बैर को बढ़ावा देने, धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को अपवित्र करने और नुकसान पहुंचाने वाली हरकत’ करने के लिए मामला दर्ज किया गया है.

जब द वायर  ने नेहरू कॉलोनी थाने से संपर्क किया, तो ड्यूटी पर मौजूद एक अधिकारी ने कहा कि जांच अधिकारी छुट्टी पर है और कंडारी को जेल भेज दिया गया है. उनके पास इस बारे में और जानकारी नहीं है.

इससे पहले, सब-इंस्पेक्टर दीपक गैरोला ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया था कि पूछताछ के दौरान कंडारी ने कहा कि द कश्मीर फाइल्स में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हिंसा के दृश्य देखकर वह ‘गुस्से’ में थे.

फिल्म की रिलीज के लगभग चार हफ्ते बाद एक स्पष्ट पैटर्न दिखता है कि इसका इस्तेमाल नफरत को बढ़ावा देने और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा भड़काने के लिए किया जा रहा है. और इस अभियान का नेतृत्व उन हिंदुत्व कार्यकर्ताओं और संगठनों द्वारा किया जा रहा है जिनका इस तरह के उकसावे देने का एक लंबा इतिहास रहा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)