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कर्नाटकः हिंदुत्ववादी समूह के सदस्यों द्वारा हमले के बाद मुस्लिम युवक की मौत, आठ गिरफ़्तार

कर्नाटक के मंगलरु में 19 जुलाई को कथित तौर पर विश्व हिंदू परिषद-बजरंग दल के कुछ सदस्यों ने एक मुस्लिम युवक पर हमला कर दिया था. हिंदुत्ववादी समूह के एक सदस्य को मुस्लिम युवक द्वारा गाय पालने से आपत्ति थी. हमले के बाद युवक को घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने दो दिन बाद दम तोड़ दिया.

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

मंगलरु: कर्नाटक के मंगलरु में दो दिन पहले एक 19 वर्षीय मुस्लिम युवक कथित तौर पर एक हिंदुत्ववादी समूह के सदस्यों द्वारा हमला किए जाने के चलते घायल हो गया था. गुरुवार (21 जुलाई) को उसने दम तोड़ दिया.

पेशे से चित्रकार मसूद मूल रूप से केरल के रहने वाले थे और पिछले एक महीने से कर्नाटक के केलांजे गांव में अपनी दादी के घर रह रहे थे. केरल में उनके चार भाई-बहन हैं. उनके पिता का निधन हो गया है.

पुलिस ने मामला दर्ज करके आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, सभी विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के सदस्य हैं. उनकी पहचान सुधीर, सुनील केलांजे, अभिलाष बेल्लारी, जिम रंजीत, शिवप्रसाद, भास्कर, रंजीत, सदाशिव के तौर पर हुई है.

सोशल मीडिया के पोस्टों से अभिलाष बेल्लारी की पहचान बेल्लारी में विश्व हिंदू परिषद (विहिप)-बजरंग दल की वाल्मीकि शाखा के अखंड प्रमुख, सुनील केलांजे की पहचान इसी संगठन के ‘गोरक्षा’ प्रमुख और रंजीत की पहचान इसके सुरक्षा प्रमुख के तौर पर हुई है.

द वायर इस बात की पुष्टि नहीं करता कि क्या तीनों वास्तव में इन पदों पर काबिज हैं, लेकिन इस बात की पुष्टि करता है कि सभी आठों दक्षिणपंथी संगठन के सदस्य हैं. ऐसा समझा जाता है कि विहिप और बजरंग दल नामक ये दोनों संगठन क्षेत्र में एक संयुक्त इकाई के रूप में काम करते हैं.

आठों आरोपियों में से बेल्लारी, रंजीत और केलांजे का आपराधिक इतिहास रहा है. इन आठ में से चार के खिलाफ 9-10 जुलाई को ईद के मौके पर भी एक मामला दर्ज किया गया था.

मृतक युवक मसूद के बचनपन के दोस्त शनीफ ने बताया कि ईद से हफ्तेभर पहले मसूद ने एक तीन महीने का बछड़ा खरीदा था. सूचना मिलने पर पुलिस उनके घर यह जानने के लिए गई कि क्या मसूद का उसे काटने का मकसद है.

शनीफ ने बताया कि मसूद वास्तव में गाय पालना चाहता था.

शनीफ बेंगलुरु में काम करते हैं और ईद पर केलांजे गए थे, उन्होंने बताया, ‘तब से ही मसूद कह रहा था कि उसका पड़ोसी सुधीर उसे शत्रुतापूर्ण नजर से देखता है और जब भी वह बछड़े को चराने के लिए ले जाता है, वो उस पर नजर रखकर उसे डराने की कोशिश करता है. उसने यह मुझे बताया था और मैंने उसे सुझाव दिया था कि वह इसे नजरअंदाज करे और उसके साथ संपर्क से बचने की कोशिश करे.’

19 जुलाई को सुधीर और मसूद के बीच तीखी बहस हुई, इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे को साथ मारपीट की. कुछ घंटों बाद मसूद को सुधीर एक सुनसान जगह पर ले गया और अपने सात साथियों के साथ मिलकर उसे बुरी तरह पीटा.

शनीफ बताते हैं कि जब वे कुछ देर बाद घटनास्थल पर पहुंचे तो हमलावरों ने उन पर भी पत्थरों और बोतलों से हमला कर दिया, जिससे उनको भी भी चोटें आईं.

वे बताते हैं कि अविनाश ने सोडा की बोतल से मसूद के सिर पर जोरदार प्रहार किया. मसूद वहां से भागने में सफल रहा. जल्द ही पुलिस पेट्रोलिंग पार्टी घटनास्थल पर पहुंची और हमलावरों को ले गई.

शनीफ और उसके दोस्त फिर मसूद को खोजने लगे. दो घंटों बाद वह बेहोशी की हालत में एक कुंए के पास पड़े मिले. यह रात करीब दो बजे की बात है.

मसूद को एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताकर उन्हें बेहतर इलाज के लिए 50 किलोमीटर दूर मंगलरु शिफ्ट कर दिया गया.

तीन आरोपी सुनील, शिवप्रसाद और सुधीर भी मसूद के साथ स्थानीय अस्पताल गए. उन्होंने कथित तौर पर अस्पताल के स्टाफ से झूठ बोला कि मसूद गिरने से घायल हो गए हैं.

मसूद के परिवार ने इसके तुरंत बाद पुलिस को सूचना दी और सुनील व अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया.

मंगलरु में मसूद की जांच करने के बाद डॉक्टरों ने उनके परिवार को बताया कि उनके दिमाग में खून का थक्का जम गया है, इसलिए उनकी सर्जरी नहीं की जा सकती है. हमले के दो दिन बाद मसूद की अस्पताल में मौत हो गई.

आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़े में शामिल होना), 147, 323 (जान-बूझकर चोट पहुंचाना), 506 (आपराधिक धमकी), 324 (खतरनाक हथियारों या साधनों से जान-बूझकर चोट पहुंचाना), 302 (हत्या) और 149 (विधि विरुद्ध जनसमूह के किसी सदस्य द्वारा किए गए अपराध में उस जनसमूह के हर सदस्य का दोषी होना) शामिल हैं.

बेल्लारी थाने के मुख्य आरक्षक बालाकृष्ण ने द वायर को बताया कि आठों आरोपियों को घटना के अगले ही दिन सुबह गिरफ्तार कर लिया गया था.

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