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वर्ष 2021-22 में प्राकृतिक आपदाओं और रखरखाव के कारण क़रीब 1,693 टन अनाज बर्बाद: आरटीआई

सूचना का अधिकार क़ानून से पता चला है कि भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में 2018-19 में 5,213 टन, 2019-20 में 1,930 टन और 2020-21 में 1,850 टन अनाज प्राकृतिक आपदाओं और रखरखाव के कारणों से नष्ट हुआ था.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

इंदौर: सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून से पता चला है कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के देश भर में फैले गोदामों में पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 के दौरान प्राकृतिक आपदाओं और रखरखाव के कारणों से करीब 1,693 टन अनाज बर्बाद हो गया.

नीमच के आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने रविवार को बताया कि सूचना का अधिकार कानून के तहत उनकी अर्जी पर एफसीआई ने उन्हें यह जानकारी दी है.

हालांकि, इस ब्योरे में चौंकाने वाला दावा किया गया है कि उक्त अवधि के दौरान इन गोदामों में जमा अनाज की कोई भी मात्रा चूहे सरीखे कुतरने वाले जानवरों और पंछियों की वजह से नष्ट नहीं हुई.

गौड़ ने कहा, ‘सरकारी गोदामों में अनाज की बर्बादी के लिए खासकर चूहों को भी लंबे समय से जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है. इसलिए एफसीआई को खुलासा करना चाहिए कि पिछले वित्तीय वर्ष में उसने आखिर कौन-से करामाती इंतजाम कर लिए कि गोदामों में रखे अनाज को चूहे जरा भी नुकसान नहीं पहुंचा सके.’

उन्होंने आरटीआई कानून से मिली जानकारी के हवाले से बताया, ‘2021-22 के दौरान बारिश से 48 टन, बाढ़ से 592 टन और चक्रवात से 28 टन अनाज एफसीआई के गोदामों में बर्बादी की भेंट चढ़ गया, जबकि रखरखाव के अलग-अलग कारणों से 1,025 टन अनाज नष्ट हुआ. अनाज के इस बर्बाद भंडार में 619.49 टन गेहूं और 1,073.93 टन चावल शामिल है.’

जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश और हरियाणा सरीखे प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों समेत 15 प्रदेशों में 2021-22 के दौरान एफसीआई के गोदामों में गेहूं का एक भी दाना बर्बाद नहीं हुआ.

इसी तरह, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ जैसे प्रमुख चावल उत्पादक प्रांतों समेत 14 राज्यों में एफसीआई के गोदामों में उक्त अवधि के दौरान भंडारित चावल के ‘शून्य नुकसान’ का ब्योरा दिया गया है.

आरटीआई कानून के तहत मिली जानकारी से यह भी पता चलता है कि एफसीआई के गोदामों में अनाज की बर्बादी साल-दर-साल घट रही है.

ब्योरे के मुताबिक, इन गोदामों में 2018-19 में 5,213 टन, 2019-20 में 1,930 टन और 2020-21 में 1,850 टन अनाज प्राकृतिक आपदाओं और रख-रखाव के कारणों से नष्ट हुआ था.