महिला सुरक्षा और सम्मान, एक ऐसा मुद्दा है जो हर चुनाव में हर उम्मीदवार के भाषण में अवश्य होता है. चुनाव गुज़रने के साथ साथ इस मुद्दे को दी जाने वाली तवज्जो भी गुज़र जाती है.
हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने अपने चुनावी वादों में बेहद ही अच्छी बात कही थी. उन्होंने एक सभ्य, सुशिक्षित और संस्कारिक समाज का संदर्भ देकर महिलाओं के सम्मान प्रति अपनी चिंता व्यक्त की थी.
हाल की ही एक चिंताजनक ख़बर ये है कि भाजपा के राज्यसभा सांसद सुभाष बराला के बेटे विकास बराला, जिन पर आठ साल पहले एक आईएएस अधिकारी की बेटी का कथित तौर पर पीछा करने और अपहरण का प्रयास करने के यौन उत्पीड़न का आरोप है. उन्हें 18 जुलाई की एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार हरियाणा में सहायक महाधिवक्ता नियुक्त किया गया है.
यहां ये भी बताना आवश्यक है कि विकास बराला पर लगे उत्पीड़न के मामले की सुनवाई अभी भी चंडीगढ़ की एक अदालत में चल रही है और विकास फिलहाल जमानत पर हैं.
हालांकि, इसी बीच द ट्रिब्यून ने खबर दी है कि चौतरफा विरोध के बाद उनका नाम विधि अधिकारियों की सूची से हटा दिया गया है.
इसी वर्ष जून में पुणे सिटी पुलिस ने भाजपा की पुणे शहर इकाई के महासचिव प्रमोद कोंधरे के खिलाफ सोमवार को एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी का कथित तौर पर यौन उत्पीड़न करने के आरोप में मामला दर्ज किया है.
करीब एक वर्ष पहले हमारे प्रधानमंत्री जी ने अपने एक भाषण में अपनी ये पीड़ा ज़ाहिर की भी थी कि उन्हें देश की बेटियों की हालत देखकर अत्यंत पीड़ा होती है.
अफ़सोसजनक है कि माननीय प्रधानमंत्री जी के महिलाओं के सम्मान के प्रति इतना प्रतिबद्ध होते हुए भी कानूनन उत्पीड़न के आरोपी को कानून का ही अधिकारी नियुक्त किया गया. जिनको क़ानून बरी नहीं किया उनसे क़ानून को बनाये रखने की उम्मीद हम महिलाओं से शासन हो कैसे हो सकती है. न्याय प्रक्रिया में न्याय सही के हक़ में होगा इसका भरोसा करना महिलाओं के लिए मुश्किल होगा.
हालांकि हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने अपने एक भाषण में महिलाओं को त्वरित न्याय मिलने की संस्तुति भी की थी. हमारे प्रधानमंत्री जी के इस भाषण के कुछ दिनों के पश्चात ही आईआईटी-बीएचयू बनारस की एक छात्रा साथ हुए भयावह सामूहिक बलात्कार मामले में तीन में से दो आरोपी जो भारतीय जनता पार्टी की आईटी सेल से जुड़े हुए थे, उन्हें जमानत मिल गई थी.
न्याय की उम्मीद हम सबकी स्मृति में धुंधले हो चुके लोक सभा संसद रह चुके प्रज्वल रेवन्ना मामले में भी है.
द प्रिंट की एक रिपोर्ट में उन महिलाओं ने जिन्होंने प्रज्वल रेवन्ना के ख़िलाफ़ खड़े होने का साहस दिखाया, अपनी आप बीती सुनायी.
किसी को अपने बच्चों को छुट्टी पर ले जाने के लिए कई जगह प्रार्थना पत्र देना पड़ा और मंज़ूरी लेनी पड़ी और किसी को एक कमरे तक सिमट का रह जाना पड़ा.
खुद पर हुए अत्याचार में न्याय मिलने की आस लगाए एक कड़े फैसले का इंतज़ार ये महिलाएं आज भी कर रही हैं.
वर्ष 2023 में भी भारतीय जनता पार्टी के नेता अरुण कुमार पुथिला को यौन उत्पीड़न मामले में मामला दर्ज होने के अगले दिन ही ज़मानत मिल गई थी.
साक्षी मलिक जिन्होंने कुश्ती में देश का नाम ओलंपिक में रोशन किया था, उन्होंने भी जब अपने साथियों के साथ बृजभूषण सिंह के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था और सिंह उन पर लगे आरोपों के लिए जांच का सामना कर रहे थे, उस समय भी भारतीय जनता पार्टी ने उनके बेटे करन भूषण सिंह को चुनाव में उतारने का स्तब्ध कर देने वाला फ़ैसला किया था.
इनके अलावा भी कई मामले हैं जिनमें शासन में बैठे सांसदों या सत्तारूढ़ पार्टी के सदस्यों द्वारा महिलाओं पर हुए अत्याचारों या उनकी शिकायतों के बावजूद आरोपियों के हौसले बुलंद रहे. द वायर पर प्रकाशित श्रावस्ती दासगुप्ता की एक रिपोर्ट में ऐसे मामलों से विस्तृत रूप से जनता को अवगत कराया गया है.
इसी रिपोर्ट में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों का ज़िक्र भी है जो बताते हैं कि महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध के आरोप झेल रहे 134 सांसदों में से सबसे अधिक यानी 44 सांसद, भारतीय जनता पार्टी में ही हैं.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान शासन के अंतर्गत 2014 से 2022 तक महिलाओं के खिलाफ अपराध 31% बढ़े हैं.
आपको बताते चलें कि वर्ष 2022 के बाद से सरकार द्वारा आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं.
बीते दिनों ओडिशा में एक छात्रा यौन उत्पीड़न से तंग आकर अपने आप को आग लगाए जाने की हृदय विदारक घटना से आधी आबादी आहत हुई. छात्रा के संग हो रहे अत्याचार का ये मामला ओडिशा के भारतीय जनता पार्टी द्वारा नव चयनित मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी के कार्यालय तक पहुंचा पर अंत में उसकी बात उसके इस दुनिया से जाने के बाद ही सुनी गई.
हाल ही में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से प्रशिक्षु महिला सिपाहियों ने अधिकारियों पर अव्यवस्था और अभद्रता का आरोप लगाया. उन्होंने ये भी कहा कि उनके नहाने की भी व्यवस्था खुले में है. उनके इस प्रदर्शन के बाद दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया.
ये मामले बानगी भर हैं. आम महिलाओं के लिए हर दिन युद्ध जीतकर सही सलामत घर वापस आने का संघर्ष है.
महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रहे उत्पीड़न, अत्याचार, अपराध को लेकर हर सरकार अपने चुनावों के दौरान मुद्दा बनाती है.
बदलाव की बयार के भरोसे पर महिलाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण के निर्माण को लेकर हमने वर्तमान शासन से ढेर उम्मीदें लगायी थीं और इसीलिए हमने वर्तमान सरकार को चुनकर उसमें अपना भरोसा भी जताया था. हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी भी अपने भाषणों में महिला सुरक्षा और सम्मान के लिए प्रतिबद्धता ज़ाहिर करते रहे हैं.
दुर्भाग्यपूर्ण है कि सत्तारूढ़ पार्टी के ही सांसदों, मंत्रियों, कार्यकर्ताओं ने हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी के संकल्प को अपने मन में दृढ़ता के साथ स्थापित नहीं किया.
(रेखा पचौरी बैनेट यूनिवर्सिटी, नोएडा में पढ़ाती हैं.)
