राशनकार्ड के ई-केवाईसी में हो रही देरी: झारखंड में लाखों पर मंडराता भुखमरी का ख़तरा

झारखंड में ई-केवाईसी की आड़ में राशनकार्ड धारकों के खाद्य सुरक्षा से वंचित होने का ख़तरा बढ़ रहा है. यह स्थिति राज्य में भूख और कुपोषण की समस्या को विकराल कर सकती है. केंद्र सरकार ने 41 लाख अयोग्य कार्डधारकों की सूची राज्य को भेजी है. राज्य में 4 अगस्त तक 2.5 लाख कार्ड रद्द भी हो चुके हैं, लेकिन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल बने हुए हैं.

/
(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

झारखंड में ई-केवाईसी के चक्कर में लाखों राशन कार्डधारक अटक गए हैं. तकनीकी व प्रशासनिक खामियों के चलते इन नागरिकों को राशन नहीं मिल रहा है. इस तरह गंभीर कुपोषण का सामना कर रहे इस राज्य में भूख का खतरा बढ़ सकता है. 

लातेहार जिले के मनिका प्रखंड के बिचलीदाग गांव के 55 वर्षीय सतेंद्र सिंह के 15 वर्षीय बेटे विनीत का राशनकार्ड में अब तक ई-केवाईसी नहीं हुआ है. प्रखंड कार्यालय ने बताया कि ई-केवाईसी से पहले आधार अपडेट कराना होगा, जिसके लिए जन्म प्रमाण पत्र बनवाना जरूरी है. कई बार दफ्तर का चक्कर लगाने के बाद भी न तो आधार अपडेट हुआ, न ई-केवाईसी.

सतेंद्र सिंह बताते हैं- ‘पता नहीं ‘आधार अपटूडेट’ का क्या मतलब होता है.’

ई-केवाईसी क्या है और क्यों जरूरी है?

जन वितरण प्रणाली में ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिकली नो योर कस्टमर) एक आधार आधारित सत्यापन प्रक्रिया है. यह ई-पॉस मशीन पर बायोमेट्रिक या ‘मेरा ई-केवाईसी’ ऐप से चेहरा प्रमाणीकरण के जरिए की जाती है, ताकि डुप्लीकेट और अयोग्य कार्ड हटाए जा सकें और जरूरतमंद नागरिक शामिल किये जा सकें.

केंद्र सरकार ने इसे सभी राशनकार्ड धारकों के लिए अनिवार्य कर 30 जून 2025 तक की समयसीमा तय की थी. समय सीमा के बाद सब्सिडी रोकने का निर्देश भी जारी किया गया था.

झारखंड की स्थिति

5 अगस्त 2025 तक झारखंड में 72.9 लाख राशनकार्ड धारकों के ई-केवाईसी नहीं हुए थे. इनमें 14.6 लाख के आधार नंबर राशनकार्ड से लिंक ही नहीं हैं, जो ई-केवाईसी प्रक्रिया से तुरंत बाहर हो जाते हैं. 

नवंबर 2024 से जून 2025 तक चली प्रक्रिया में कई अड़चनें रहीं- 2जी मशीनें, नेटवर्क की अनुपलब्धता, ठप सर्वर और धीमा इंटरनेट, बायोमेट्रिक फेल होना, आधार में मोबाइल नंबर न जुड़ना और राशनकार्ड में गलत आधार सीडिंग.

खाद्य आपूर्ति विभाग के प्रभारी सचिव उमाशंकर सिंह ने दिसंबर 2024 में पत्र जारी कर माना था कि सर्वर पर लोड बढ़ने से न राशन वितरण हो पा रहा था, न ई-केवाईसी.

इन कारणों से कार्डधारकों को अक्सर जन वितरण प्रणाली की दुकान, प्रखंड कार्यालय, आधार केंद्र और प्रज्ञा केंद्र के कई चक्कर लगाने पड़े. वहीं प्रवासी मज़दूरों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारी से ग्रसित कार्डधारकों के लिए ई-केवाईसी की प्रक्रिया उनकी पहुंच से बाहर रही.

मई 2025 तक मनिका प्रखंड के 1120 आदिम जनजाति कार्डधारियों में से 797 (71%) का ई-केवाईसी नहीं हो पाया था. कुल आदिम जनजाति कार्डधारकों में से 21 प्रतिशत के आधार नंबर राशनकार्ड से जुड़े ही नहीं थे.

मनिका के उचवाबाल गांव में अधिकांश आदिम जनजाति परिवारों के राशनकार्ड पर केवल एक ही सदस्य का ई-केवाईसी हुआ था. उन्हें यह बताया गया कि राशनकार्ड में सिर्फ एक सदस्य का ई-केवाईसी पर्याप्त है.

निर्देश और खामियां

केंद्र सरकार ने बायोमेट्रिक विफलता झेलने वालों को चिह्नित करने, अनुपस्थित लाभार्थियों को ट्रैक करने और ई-केवाईसी नहीं होने के कारण दर्ज करने के निर्देश दिए थे. झारखंड सरकार ने राशन डीलरों से कारण दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन एक समान फॉर्मेट उपलब्ध नहीं कराया गया, कारण अलग-अलग तरीके से लिखे गए और आंकड़ों की डिजिटल प्रविष्टि ही नहीं हुई.

अब तक राज्य सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ई-केवाईसी न होने पर कार्डधारकों का क्या होगा.

रद्दीकरण शुरू, प्रक्रिया सवालों में

पश्चिमी सिंहभूम में छह माह से राशन न उठाने के साथ ई-केवाईसी न कराने वालों के कार्ड रद्द करने की घोषणा की गई है. केंद्र सरकार ने 41 लाख अयोग्य कार्डधारकों (मृत, डुप्लीकेट, 2.4 एकड़ से ज्यादा भूमि वाले व्यक्ति आदि) की सूची राज्य को भेजी है. राज्य में 4 अगस्त तक 2.5 लाख कार्ड रद्द भी हो चुके हैं, लेकिन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल बने हुए हैं.

मनिका प्रखंड के कोपे गांव में जांच में पाया गया कि पंचायत प्रतिनिधियों को रद्दीकरण की जानकारी या नोटिस तक नहीं दी गई थी. जो ‘झारखंड जन वितरण प्रणाली (नियंत्रक), 2024’ के नियमों के खिलाफ है.

पुराना सबक, नया खतरा

2016–18 में आधार सीडिंग (अपने बैंक खाते या अन्य पहचान दस्तावेजों को अपने आधार नंबर से जोड़ना) न होने के कारण झारखंड में 11 लाख से अधिक राशनकार्ड रद्द हुए थे, जिसका परिणाम था की 17 लोगों की भूख से मौत हुई थी. यदि इस बार भी ई-केवाईसी के नाम पर योग्य कार्डधारकों के कार्ड रद्द हुए, तो लाखों लोग भूख और कुपोषण की ओर धकेले जा सकते हैं.

सरकार को क्या करना चाहिए

शत-प्रतिशत ई-केवाईसी न होने पर केंद्र सब्सिडी रोक सकता है. ऐसे में जरूरी है कि झारखंड सरकार-

  • कारणवार सत्यापन कर योग्य कार्डधारकों की सूची बनाए
  • आंकड़ों की प्रविष्टि और विश्लेषण सुनिश्चित करे
  • हकदारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाकर केंद्र को रिपोर्ट दे

वरना ई-केवाईसी की आड़ में राशनकार्ड धारकों का हक़ छिनने और खाद्य सुरक्षा से वंचित होने का खतरा बढ़ जाएगा और यह स्थिति राज्य में भूख और कुपोषण की गंभीर समस्या को और गहरा सकती है.

(विवेक गुप्ता लिबटेक इंडिया से जुड़े हैं, जो कोलाबोरेटिव रिसर्च एंड डिसेमिनेसन (CORD) का एक केंद्र है.)