नई दिल्ली: पिछले लगभग दो दशकों से, 5, कृष्णा मेनन नई दिल्ली के लुटियंस बंगला जोन में स्थित बंगला, मुख्य न्यायाधीश आधिकारिक निवास रहा है. यह बंगला जल्द ही मुख्य न्यायाधीश के आधिकारिक निवास होने की प्रतिष्ठा खो देगा.
सरकारी सूत्रों ने इस संवाददाता को बताया कि उन्हें संकेत दिया गया है कि अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत अपने वर्तमान आवास में ही बने रहेंगे तथा बंगले में जाने के इच्छुक नहीं हैं. दरअसल, सूत्रों का कहना है कि यह बंगला पहले ही उस न्यायाधीश को आवंटित किया जा चुका है जो मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस सूर्यकांत का स्थान लेंगे- जस्टिस विक्रम नाथ.
जस्टिस विक्रम की सेवानिवृत्ति पर जस्टिस बीवी नागरत्ना पहली महिला मुख्य न्यायाधीश होंगी, हालांकि जस्टिस बीवी नागरत्ना का मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यकाल बहुत छोटा होगा- सिर्फ एक महीने से अधिक- ऐसे में यह मुमकिन है कि वे भी 5, कृष्णा मेनन मार्ग में शिफ्ट नहीं हो पाएंगी.
दरअसल, सिर्फ़ जस्टिस सूर्यकांत अकेले ऐसे सीजेआई नहीं हैं जो मुख्य न्यायाधीश के निर्धारित आवास में नहीं रहेंगे. हाल के दिनों में जस्टिस संजीव खन्ना भी इस आवास में नहीं रहे, न ही उनके उत्तराधिकारी व वर्तमान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई आधिकारिक आवास में शिफ्ट हुए.
सरकारी सूत्रों ने इस संवाददाता को यह भी बताया कि अगले मुख्य न्यायाधीश ने भी संकेत दिया है कि वह 7, कृष्णा मेनन को अपने कार्यालय के तौर पर इस्तेमाल करने के भी इच्छुक नहीं हैं.
जस्टिस एसए बोबडे, जिनका कार्यकाल कोविड महामारी के दौरान बीता, के समय से घर से काम करना नियम बन गया था और अदालतें ज्यादातर ऑनलाइन मोड से काम कर रही थीं, तबसे लुटियन दिल्ली के इस बंगले को मुख्य न्यायाधीश के सचिवालय-कम कार्यालय के रूप में इस्तेमाल कर रहे थे.
सर्वोच्च न्यायालय की गोपनीय शाखा, जो नियुक्तियों और शिकायतों से संबंधित है, का एक हिस्सा भी इसी बंगले से काम करता है. सरकार सुप्रीम कोर्ट पर इस शाखा को भी सुप्रीम कोर्ट एनेक्सी भवन में शिफ्ट करने का दबाव डाल रही है, जहां बताया जा रहा है कि पर्याप्त जगह है.
सूत्रों का कहना है कि मुख्य न्यायाधीश का पदभार ग्रहण करने के बाद जस्टिस सूर्यकांत इस आवास को आधिकारिक उपयोग के लिए अपने पास नहीं रखेंगे और इसे उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उनके आवासीय उपयोग के लिए आवंटित किया जा सकता है.
ऐसा बताया गया है कि लुटियन जोन में टाइप VIII बंगलों की कमी है, जो आमतौर पर शीर्ष अदालत के कार्यरत न्यायाधीशों को आवासीय उद्देश्य के लिए आवंटित किए जाते हैं और हाल के दिनों में ऐसे कई उदाहरण हैं, जब सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत में पदोन्नति के बाद सुप्रीम कोर्ट के गेस्टहाउस या विभिन्न राज्य सरकारों के गेस्टहाउस में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
कुछ मामलों में तो न्यायाधीशों को अपनी स्थिति के अनुरूप आवासीय परिसर के आवंटन की प्रतीक्षा में लंबे समय तक छोटे टाइप VII बंगलों में रहना पड़ा है.
टाइप VIII बंगलों की पर्याप्त संख्या की कमी के कारण सरकार सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या 2019 में 31 से बढ़ाकर 34 कर दिए जाने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट के लिए अधिक बंगले नहीं दे पाई है.
