नई दिल्ली: बिहार के चुनावी घमासान के बीच एनडीए में मुख्यमंत्री पद को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर विराम लगाते हुए सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के मुख्य प्रवक्ता व नीतीश कुमार के बेहद करीबी नीरज कुमार ने दो टूक लहजे में कहा है कि यदि जीत नीतीश के नेतृत्व में मिलती है तो मुख्यमंत्री कोई दूसरा नहीं हो सकता है.
द वायर से खास बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, ‘चुनाव में सफलता नीतीश के नेतृत्व में मिलेगी तो भोजनवा कोई और कर लेगा…?’
उन्होंने कहा, ‘अगले मुख्यमंत्री पद के लिए भी नीतीश का नाम फिक्स है. कोई लव करे या हेट उन्हें इग्नोर नहीं कर सकता है.’
दरअसल महागठबंधन के नेता इस मुद्दे को लेकर लगातार कटाक्ष कर रहे हैं. इसे हवा तब मिली जब बीते सप्ताह 30 अक्तूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंगेर की एक रैली में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बना देंगे. इसके बाद जब एनडीए का संकल्प पत्र जारी हुआ तो सम्राट चौधरी की अकेले मंच पर नजर आए, जबकि एनडीए के बाकी नेता नीचे बैठे थे.
नीतीश भी इस कार्यक्रम में पहुंचे जरूर थे, लेकिन महज कुछ मिनट के लिए.
‘सीएम को लेकर भ्रम नहीं’
नीरज कुमार ने कहा कि उनकी पार्टी में मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई भ्रम नहीं है, क्योंकि वर्ष 2020 में भी जब जदयू को 43 सीटें मिली थीं, तो भी यह पद उसी के पास रहा. उन्होंने दावा किया कि बिहार की अवाम चाहती है कि नीतीश ही मुख्यमंत्री बने.
इसी तरह सीवान की रैली में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के बुलडोजर वाले बयान के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि यह उनके राज्य का प्रयोग हो सकता है, लेकिन बिहार में ऐसा कुछ भी नहीं है. यहां तो कानून का बुलडोजर चलता है. बिहार में कोई अपराध करता है तो कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए कार्रवाई होती है.
वक्फ कानून को लेकर मुस्लिम वोटरों की नाराजगी पर उन्होंने कहा कि जब पटना में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक हुई थी तो उसमें जदयू ने पांच संशोधन सुझाए थे, जिसे स्वीकार कर लिया गया. वहीं राजद ने अपनी ओर से कोई सुझाव नहीं दिया था.
उन्होंने यह भी दावा किया कि नीतीश सरकार ने वक्फ संपत्तियों के विकास के लिए काफी काम किया है. दूसरे नीतीश कुमार अपने भाषण की शुरुआत ही इसी बात से करते हैं कि वर्ष 2005 से पहले हिंदू- मुस्लिम दंगे होते थे. लालू यादव के शासन काल में 12 दंगे हुए. सीतामढ़ी के दंगे में 48 लोग मारे गए और इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई. नीतीश सरकार आने के बाद से इस पर नकेल कसी गई है. अब ऐसा कोई मामला आता है तो उस पर कार्रवाई होती है.
नीरज को पूरा यकीन है कि इस बार भी मुस्लिम वोट जदयू को मिलेगा.
वोट चोरी और एसआईआर
नीरज कुमार विपक्ष के वोट चोरी वाले आरोप को भी सही नहीं मानते हैं. उनका कहना है कि बिहार में जो 25 लाख नए वोटर जुड़े हैं, उनमें ज्यादा संख्या दलित, ओबीसी और मुस्लिमों आदि की है. इसकी वजह यह है कि इन वर्गों की आबादी सवर्णों से अधिक है. पिछले चुनाव में जदयू ने सबसे ज्यादा सीमांचल में 21 सीटें जीती थी, लेकिन दक्षिण बिहार में पार्टी को हार हुई थी. हकीकत यह है कि प्रतिशत लिहाज से मुस्लिमों की आबादी मधेपुरा और खगड़िया में बढी है. एसआईआर को लेकर गलत धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने आगे कहा, ‘जहां तक घुसपैठिया का सवाल है तो देश का कोई भी नागरिक इसका समर्थन नहीं करेगा. बिहार में इस तरह का मुद्दा नहीं चलने वाला है. वर्ष 2011 में जब नॉर्थ ईस्टर्न जोन के मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन हुआ था तो खुद लालू प्रसाद यादव ने कहा था राशन कार्ड बनाते समय घुसपैठियों पर सतर्कता रखनी चाहिए. कोई भी कर्मचारी घुसपैठियों का कागज बनाकर खुद को फंसाने का काम क्यों करेगा? बिहार का बॉर्डर काफी लंबा है. जब बॉर्डर सील हो जाएगा तो समस्या खत्म हो जाएगी.’
बातचीत के दौरान नीरज कुमार ने दावा किया कि एनडीए के घटक दलों के कार्यकर्ताओं में बेहतर समन्वय है. इसकी वजह यह है कि सभी चाहते हैं कि नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बने. वहीं दूसरी तरफ महागठबंधन के दल कई सीटों पर आपस में ही भिड़ गए हैं.
राज्य के पिछड़ेपन, बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जो लोग यह आरोप लगा रहे हैं, वे ही इसके लिए जिम्मेदार हैं. 45 वर्षों तक कांग्रेस और उसके बाद 15 वर्षों तक राजद ने शासन किया, लेकिन वे एक भी ऐसी योजना नहीं बता सकते हैं, जो दूसरे राज्य में या देश में लागू हुई हो. इसके विपरीत जदयू ने जो संकल्प लिया, उसे पूरा किया. वर्तमान में राज्य में इंजीनियरिंग की पढ़ाई 10 रुपये और पॉलिटेक्निक की मात्र पांच रुपये में हो रही है. राज्य में सड़कों का विकास किया गया है. नीतीश सरकार ने विपक्षी नेताओं के क्षेत्रों में भी विकास कार्य किए हैं.
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)
