ईवीएम की बिक्री रोकने के चुनाव आयोग के निर्देश से राज्य चुनाव आयोगों को ऐतराज़

राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के चुनाव आयुक्त ने कहा कि यह निर्देश ईवीएम के उपयोग और इसकी विश्वसनीयता के बारे में मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बीच भ्रम पैदा करेगा.

(फोटो: रॉयटर्स)

राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों के चुनाव आयुक्त ने कहा कि यह निर्देश ईवीएम के उपयोग और इसकी विश्वसनीयता के बारे में मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बीच भ्रम पैदा करेगा.

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(फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: राज्य चुनाव आयोगों ने सार्वजनिक क्षेत्र के दो उपक्रमों (पीएसयू) द्वारा ईवीएम की बिक्री को प्रतिबंधित करने संबंधी चुनाव आयोग के एक निर्देश पर ऐतराज़ जताया है. राज्य चुनाव आयोगों के एक हालिया सम्मेलन के आरटीआई के ज़रिये हासिल किए गए विवरण में यह कहा गया है.

इस सम्मेलन में लगभग सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चुनाव आयुक्त शरीक़ हुए थे. सम्मेलन में भाग लेने वालों ने इस सिलसिले में चुनाव आयोग के परिपत्र पर गंभीर चिंता जताई, जिसमें कहा गया है कि यह ईवीएम के उपयोग और इसकी विश्वसनीयता के बारे में मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बीच भ्रम पैदा करेगा.

परिपत्र 26 मई 2017 को जारी किया गया. इसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग की ईवीएम के डिजाइन का ईवीएम किसी अन्य को बेचे जाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाए. दरअसल, इस डिजाइन को तकनीकी विशेषज्ञ समिति/आयोग की मंज़ूरी प्राप्त है.

परिपत्र में यह भी कहा गया है कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि राज्य चुनाव आयोगों और विदेशी चुनाव प्रबंध संस्थाओं सहित अन्य को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) बेचने के लिए अलग डिजाइन तैयार किया जाए.

इस विषय पर राज्य चुनाव आयोगों के आठ-नौ नवंबर 2017 को मध्य प्रदेश के हनुवंतिया में हुए एक अखिल भारतीय सम्मेलन में चर्चा हुई थी. बैठक के विवरण की एक प्रति भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता अजय दुबे को सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत दायर की गई एक अर्ज़ी के जवाब में हाल ही में प्राप्त हुई है.

बैठक के विवरण में कहा गया है, ‘चूंकि निर्वाचन प्रक्रिया चुनाव अयोग (ईसीआई) और राज्य चुनाव आयोग (एसईसी), दोनों के लिए समान है. इसलिए यह समझ में नहीं आया कि चुनाव आयोग ने भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल) को अपनी निर्दिष्ट मशीनें उसकी इजाजत के बगैर किसी अन्य को नहीं बेचने का निर्देश क्यों दिया है?’

इसमें कहा गया है कि ईसीआई और एसईसी के इस्तेमाल के लिए अलग-अलग डिजाइन की ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल और इसकी विश्वसनीयता के बारे में मतदाताओं और राजनीतिक दलों के बीच और भी भ्रम पैदा करेगा.

यह भी कहा गया कि समान चुनाव प्रक्रिया में चुनाव के दौरान ईवीएम के इस्तेमाल में, चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली ईवीएम की पद्धति में एकरूपता होनी चाहिए. ईसीआई और एसईसी, दोनों ही अपनी ईवीएम सिर्फ बीईएल और ईसीआईएल से हासिल करते हैं.

बैठक के विवरण में कहा गया है, ‘इस तरह, एक ही विनिर्माता से अलग-अलग डिजाइन की ईवीएम का चुनाव आयोग और राज्य चुनाव आयोग द्वारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.’

बैठक के दौरान यह फैसला किया गया कि इस विषय को और भी स्पष्ट करने के लिए इसे चुनाव आयोग के समक्ष उठाया जाएगा.