भाजपा की कर्नाटक इकाई के एक्स पोस्ट में ‘गोभी’ के क्या मायने हैं?

कर्नाटक भाजपा की एक एक्स पोस्ट में नक्सलवाद की क़ब्र के पास केंद्रीय गृह मंत्री के कैरिकेचर को गोभी पकड़े दिखाया गया है. गोभी के प्रतीक को 1989 के भागलपुर मुस्लिम विरोधी दंगों से जोड़ा जाता है. हाल के वर्षों में इस संदर्भ को कट्टर दक्षिणपंथी समूहों द्वारा दोबारा ज़ोर-शोर से उठाया गया है.

X/@BJP4Karnataka द्वारा पोस्ट की गई तस्वीर, जिसमें अमित शाह गोभी पकड़े हुए नजर आ रहे हैं.

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी की कर्नाटक इकाई के आधिकारिक एक्स एकाउंट से 23 मई (शुक्रवार) को एक तस्वीर पोस्ट की गई, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक कब्र के पास गोभी उठाए हुए दिखाया गया, उस कब्र पर लिखा है- ‘आरआईपी नक्सलवाद.’ 

इस पोस्ट के साथ कैप्शन था, ‘ लोल (LOL) सलाम, कॉमरेड.’ यह वामपंथियों द्वारा बोले जाने वाले ‘लाल सलाम’ पर तंज के रूप में देखा जा रहा है. यह पोस्ट भाकपा (माले) द्वारा ‘ऑपरेशन कगार’ के अंतर्गत अबूझमाड़ के जंगलों में हाल में हुई ‘मुठभेड़’ की निंदा करते हुए जारी बयान के जवाब में की गई है.

ज्ञात हो कि इस ऑपरेशन को अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर तेलंगाना और छत्तीसगढ़ के घने और पहाड़ी जंगलों में अंजाम दिया था, जिसमें अधिकारियों के मुताबिक 27 कथित माओवादियों को मार गिराया गया.

भाकपा (माले) ने नारायणपुर-बिजापुर में माओवादियों और आदिवासियों की ‘बेरहमी से की गई गैर-न्यायिक हत्याओं’ की निंदा की है.  

पार्टी के बयान में यह भी कहा गया था कि अमित शाह की जश्न मनाती पोस्ट इस बात को दर्शाती है कि ‘राज्य ऑपरेशन कगार को एक गैर-न्यायिक जनसंहार अभियान की तरह चला रहा है और नागरिकों की हत्या तथा कॉरपोरेट लूट और सैन्यीकरण के खिलाफ आदिवासी विरोध को कुचलने को अपनी उपलब्धि बता रहा है.’ 

गोभी का सांकेतिक अर्थ

इस पोस्ट में गोभी के उपयोग ने सोशल मीडिया पर कई लोगों को चौंका दिया.

गोभी का उपयोग अब मुस्लिम नरसंहार की एक सांकेतिक अभिव्यक्ति के प्रतीक के रूप में स्थापित हो चुका है.

ऑनलाइन हेट स्पीच से जुड़े कानूनों को चकमा देने में सक्षम यह प्रतीक (गोभी) हाल ही में नागपुर में हुए सांप्रदायिक तनाव के बाद भाजपा समर्थक राजनीतिक टिप्पणीकारों द्वारा बड़े पैमाने पर साझा किया गया.

इस प्रतीक का संदर्भ साल 1989 के बिहार के भागलपुर दंगों से जोड़ा जाता है, जिसमें 900 से अधिक मुस्लिम मारे गए थे. भागलपुर के लोगांइन गांव में 110 मुसलमानों की हत्या कर उन्हें खेत में दफना दिया गया था. कहा जाता है कि उनकी लाशों पर गोभी के पौधे लगाए गए थे.

हाल के वर्षों में यह संदर्भ अल्ट्रा-राइट और हिंदुत्व समूहों खास करके ट्रैड्स द्वारा फिर से उठाया गया है. इन समूहों द्वारा बनाई गई कुछ ग्राफिक्स में बुर्का पहनी मुस्लिम महिलाओं को भी गोभी के रूप में दर्शाया गया है.

कई हिंदुत्व ट्रैड्स अपने सोशल मीडिया बायो में खुद को ‘गोभी किसान’ बताते हैं.

हिंदुत्व ट्रैड्स कौन हैं?

‘ट्रैड्स’ हिंदुत्व की सबसे उग्र धारा माने जाते हैं- ऐसे युवा जो खुद को सभ्यता के योद्धा मानते हैं और ऑनलाइन ‘युद्ध’ लड़ते हैं. वे अन्य दक्षिणपंथियों को ‘बहुत उदार’ मानते हैं और उन्हें ‘रैता’ कहकर उनका मज़ाक उड़ाते हैं.

यही नहीं, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी कमजोर मानते हैं क्योंकि उनके अनुसार मोदी दलितों को लेकर ‘तुष्टीकरण’ करते हैं और मुसलमानों पर ‘कड़ा’ रुख नहीं अपनाते.

मुख्यधारा की ओर बढ़ते ट्रैड प्रतीक

अब तक भाजपा ऐसे चरमपंथी विमर्श और हिंसक ट्रैड प्रतीकों से दूरी बनाए रखती थी, लेकिन हालिया पोस्ट इस बात का संकेत है कि पार्टी अब इसे स्वीकार कर रही है.

पिछले एक साल में ट्रैड प्रतीकों को मुख्यधारा हिंदुत्व की भाषा में अधिक सहजता से शामिल किया गया है, खासकर मुसलमानों के संदर्भ में. जनवरी 2024 से अब तक भाजपा द्वारा पोस्ट किए गए कई कार्टूनों में यह साफ देखा जा सकता है, जैसे भगवा वस्त्रों में पीएम मोदी को मुसलमानों से टकराते दिखाना, या मुसलमानों को दलितों की संपत्ति छीनते दिखाना. 

साल 2022 में गुजरात भाजपा के आधिकारिक एक्स हैंडल से एक पोस्ट साझा की गई थी, जिसमें ‘सत्यमेव जयते’ कैप्शन के साथ दर्जन भर टोपी पहने दाढ़ी वाले लोगों को फांसी पर लटकता दिखाया गया था. सोशल मीडिया पर इसकी तुलना नाज़ी कार्टूनों से की गई और बाद में वह ट्वीट हटा लिया गया.

हालांकि भाजपा का कहना था कि वह किसी धर्म को निशाना नहीं बना रही थी और यह पोस्ट साल 2006 के अहमदाबाद ब्लास्ट में दोषी ठहराए गए आतंकवादियों के संदर्भ में थी.

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