नई दिल्ली: 25 वर्षीय सानिया मेहदी 14 जून की रात अपने अपार्टमेंट में थीं, जब उन्होंने दूर से तेज़ आवाजें सुनीं. उन्होंने कहा, ‘मैंने सोचा कि शायद पटाखे हैं.’ उन्हें ऐसा इसलिए लगा क्योंकि तेहरान में एक त्योहार की शुरुआत हुई थी.
उन्होंने याद करते हुए कहा, ‘लेकिन फिर आवाज़ें तेज़ होती गईं और आसमान में बिजली जैसी चमकदार रोशनी दिखने लगी.’
ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस में पढ़ रही भारतीय छात्रा सानिया के मुताबिक, ये आवाज़ें पिछले चार सालों में उन्होंने कभी नहीं सुनी थीं.
ईरान में 1,500 से अधिक भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं, क्योंकि यहां की शिक्षा अपेक्षाकृत सस्ती है और इसका पाठ्यक्रम भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है. इस कारण छात्र एफएमजीई परीक्षा पास करके भारत में अभ्यास कर सकते हैं. छात्रों के अनुसार, यह भारत या बांग्लादेश के निजी कॉलेजों की तुलना में काफी सस्ता है.
‘तेहरान पर हमला हुआ है’
जब आवाज़ें बढ़ती गईं, तो सानिया ने खिड़की से बाहर झांककर देखा कि आसमान में चमकने वाली चीज़ें पटाखे नहीं थे. सानिया ने बताया, ‘वे लगातार आ रही थीं और रुक नहीं रही थीं. हमने फौरन एक्स पर देखा, तब पता चला कि तेहरान पर इज़रायल की तरफ से हमला हो रहा है.’
सानिया के मुताबिक दूसरी रात और भी डरावनी थी. खबरें आ रही थीं कि इज़रायल के हवाई हमले तेज़ हो गए हैं और वे आम लोगों की बस्तियों, यूनिवर्सिटी और अस्पतालों को निशाना बना रहे हैं. उन्होंने सुना कि तेहरान यूनिवर्सिटी के दो छात्रों को मामूली चोटें आईं और उन्हें तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया.
‘पड़ोसी भाग गए’
तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस (आईयूएमएस) में अंतिम वर्ष की छात्रा शकीरा मंज़ूर ने बताया, ‘तेहरान में हालात बेहद खराब हैं. हम शहर के बीचों बीच रहते हैं. तीन दिन तक हम सो नहीं पाए, रात को हालात और भी बिगड़ जाते थे. हमें जोरदार धमाके सुनाई देते थे और ड्रोन अपार्टमेंट के ऊपर से उड़ते दिखाई देते थे.’
शकीरा ने बताया कि छात्रों को पहले दिन हमले की गंभीरता का अंदाज़ा नहीं था. वह कहती हैं, ‘दिन में हालात कुछ शांत रहते थे, लेकिन 16 जून को तो दिन में भी ज़ोरदार बमबारी हुई. आम लोगों की इमारतें और कई सरकारी इमारतें पूरी तरह तबाह हो गईं.’
तेहरान की आबादी एक करोड़ से ज्यादा है और यह भी दिल्ली की तरह प्रवासियों का शहर है. जैसे ही हमले बढ़े, इज़रायल की धमकियों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद लोग बड़ी संख्या में शहर छोड़ने लगे. शकीरा ने देखा कि उनके पड़ोस खाली होते जा रहे हैं. उन्होंने बताया, ‘हमारे सामने वाले ईरानी पड़ोसी हमें सांत्वना दे रहे थे कि सब ठीक होगा, लेकिन फिर बिना बताए वे अपना घर छोड़कर चले गए.’
उन्होंने सुना कि शहर से बाहर जाने वाली सड़कें गाड़ियों से भरी हुई थीं. जब उनसे उनके ईरानी दोस्तों के बारे में पूछा गया तब उन्होंने कहा, ‘वे बहुत गुस्से में हैं, लेकिन उससे ज़्यादा डरे हुए हैं क्योंकि तबाही बहुत बड़े स्तर पर हो रही है.’
‘भारतीय दूतावास ने बहुत मदद की’
हमलों के पहले ही दिन आईयूएमएस के छात्र भारतीय दूतावास पहुंचे. ‘पहले दो दिन दूतावास के अधिकारियों ने हमें शांत रहने को कहा. उन्हें उम्मीद थी कि हालात जल्द सामान्य हो जाएंगे.’ एक छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,
सानिया ने कहा, ‘लेकिन फिर हमें दूतावास से मैसेज आया कि हमें जल्द तेहरान छोड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए.’
शकीरा ने बताया, ‘भारतीय दूतावास ने बहुत मदद की. उन्होंने हमारे लिए बस, ठहरने और खाने की व्यवस्था की.’
सानिया ने बताया कि आईयूएमएस और आज़ाद यूनिवर्सिटी के सैकड़ों भारतीय छात्रों को एयर-कंडीशन्ड बसों में क़ुम शहर लाया गया, जहां उन्हें होटलों में ठहराया गया है. वह खुद 30 छात्रों के साथ एक होटल में रह रही हैं जिसे दूतावास ने किराए पर लिया है.
उन्होंने कहा कि छात्रों को मशहद ले जाने के लिए 20 बसों का इंतज़ाम किया गया है. सानिया ने बताया,
‘पहली खेप की 10 बसें रवाना हो चुकी हैं. हमने अब तक लगभग 200 किलोमीटर (पूरी यात्रा का लगभग पांचवा हिस्सा) का सफर तय कर लिया है.’
किरमान यूनिवर्सिटी के छात्र फैज़ान ने कहा, ‘हमें भारतीय दूतावास को श्रेय देना चाहिए, क्योंकि वह पहले दिन से ही बेहद सक्रिय रहा है. दूसरी तरफ पाकिस्तान और नाइजीरिया जैसे देशों के छात्रों को खुद ही लौटने के लिए कहा गया है, लेकिन भारतीय दूतावास ने सारी व्यवस्था की है.’
उन्होंने कहा कि छात्रों को एयरलिफ्ट करने का विकल्प नहीं है और ज़मीन के रास्ते सफर करना भी सुरक्षित नहीं है. वह कहते हैं, ‘तेहरान से सीधे बॉर्डर तक जाना मुमकिन नहीं है, लेकिन जहां भी संभव हुआ, वहां छात्रों की मदद की गई है.’
उन्होंने बताया कि उरमिया मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्रों को आर्मीनिया पहुंचाया गया और वहां से वे दोहा होते हुए भारत लौटेंगे.
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के संयोजक नासिर खुहामी ने कहा, ‘उरमिया मेडिकल यूनिवर्सिटी के 110 भारतीय छात्र (90 छात्र कश्मीर घाटी से हैं) मंगलवार को सुरक्षित आर्मीनिया पहुंच गए. हमने छात्रों से बात की है जो राजधानी येरेवान में अपने-अपने होटलों में ठहरे हुए हैं.’
उन्होंने यह भी बताया कि विदेश मंत्रालय ने छात्रों को सूचित किया है कि ‘सभी टिकट भारत सरकार द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराए गए हैं.’
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