नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश पुलिस ने गुरुवार (11 सितंबर) को सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर सामाजिक मुद्दों और राजनीति पर कंटेंट बनाने वाले इंफ्लुएंसर अर्पित शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.
एफआईआर में अर्पित पर आरोप लगाया गया है कि उनकी वीडियो ‘भड़काऊ’ है और यह भारत की संप्रभुता के लिए खतरा है.
इस मामले में बुलंदशहर पुलिस ने अर्पित शर्मा पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जिसमें धारा 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य) भी शामिल है, जो औपनिवेशिक राजद्रोह कानून का ही काम करता है.
अर्पित शर्मा को लेकर एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने नेपाल के ज़ेन-ज़ी विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में भारत में हिंसा भड़काने के उद्देश्य से यह वीडियो बनाया था. इसमें शर्मा पर भारत की अखंडता को कमजोर करने के लिए डिजिटल मीडिया का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया गया है.
इस मामले के बाद पिछले तीन दिनों से शर्मा ऑनलाइन ट्रोलिंग और जान से मारने की धमकियों का शिकार हो रहे हैं.
इंग्लैंड में चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर काम करने वाले अर्पित शर्मा ने द वायर को बताया कि उनके कार्यस्थल की जानकारी ऑनलाइन लीक हो गई है और उनके बयानों को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है, जिससे उनके परिवार के सदस्यों को जान से मारने और बलात्कार तक की धमकियां मिल रही हैं.
वीडियो में क्या था?
नेपाल में ज़ेन-ज़ी के विरोध प्रदर्शन शुरू होने के एक दिन बाद पिछले हफ़्ते एक रील में शर्मा ने नेपाल के युवाओं की प्रशंसा करते हुए, E20 ईंधन, भ्रष्टाचार और नफ़रत भरे भाषणों जैसे मुद्दों पर विरोध न करने के लिए भारतीय युवाओं पर सवाल उठाया था.
इस संबंध में अर्पित शर्मा ने द वायर को बताया, ‘जब मैंने वीडियो बनाया था, तब विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, लेकिन मैंने किसी भी समय लोगों को उकसाया नहीं था.’
शर्मा का मानना है कि यह सब उनके साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) विरोधी विचारों के कारण हो रहा है.
उन्होंने कहा, ‘मैं गोडसे और सावरकर से कभी सहमत नहीं होऊंगा. मेरे पिता को मेरे विचारों के लिए इसमें घसीटा जा रहा है. सच तो यह है कि मैंने आप (आम आदमी पार्टी) की भी आलोचना की है जब वे सत्ता में थे.’
शर्मा ने सोशल मीडिया पर अपने वीडियो का बचाव भी किया.
उन्होंने एक पोस्ट में लिखा, ‘मैं गांधी में विश्वास करता हूं, मैं नेहरू में विश्वास करता हूं, मैं इस देश का एक शांतिप्रिय नागरिक हूं. मैं कभी किसी हिंसा का समर्थन नहीं करता. मैं नफ़रत के ख़िलाफ़ हूं, मैं गोडसे के ख़िलाफ़ हूं, मैं नरसंहार के ख़िलाफ़ हूं.’
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा, ‘मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है, कुछ भी गलत नहीं कहा है. नफ़रत मुझे हिला नहीं सकती. वे मुझे बुरी तरह बदनाम कर रहे हैं, लेकिन मैं डटे रहने की कोशिश करूंगा.’
शर्मा ने आगे कहा, ‘गांधीजी के मूल्यों को अपनी ताकत, भगत सिंह के साहस और बाबा साहेब के संविधान के साथ, मैं शांति, सच्चाई और एकता के लिए खड़ा हूं.’
यूपी में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सामने आए अन्य मामले
गौरतलब है कि हाल ही में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर उत्तर प्रदेश से ऐसे ही कई मामले सामने आए हैं.
ऑपरेशन सिंदूर के ठीक बाद लोक गायिका नेहा सिंह राठौर और व्यंग्यकार माद्री काकोटी (उर्फ डॉ. मेडुसा) के खिलाफ भी देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने समेत कई धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी.
इन पर बीएनएस की धारा धारा 196 (धर्म, नस्ल, जन्म स्थान, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों में दुश्मनी को बढ़ावा देना), 197 (राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुंचाने वाले आरोप या दावे), 353 (लोक विघटन से संबंधित बयान) 302 (धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने वाले शब्द) 152 (भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य (बीएनएस में सीधे तौर पर राजद्रोह (जो पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 124A में था) का जिक्र नहीं है, लेकिन नई आपराधिक संहिता में धारा 152 लगभग वही काम करता है.)
इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A भी इन पर लागू की गई है, जो सरकार को इंटरनेट कंटेंट को ब्लॉक करने का अधिकार देती है.
इस सिलसिले में सबसे अशोका विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था. हरियाणा पुलिस ने 18 मई को महमूदाबाद को पाकिस्तान के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर पर उनकी टिप्पणी के लिए देशद्रोह और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया था.
उल्लेखनीय है कि 8 मई को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए अशोका विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख महमूदाबाद ने कर्नल सोफिया कुरैशी की प्रशंसा करने वाले हिंदुत्ववादियों के अंतर्विरोध को उजागर किया था. महमूदाबाद ने कहा था कि कर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह द्वारा की गई प्रेस ब्रीफिंग प्रतीक के रूप में तो महत्वपूर्ण थी, लेकिन इसे ज़मीनी हकीकत में बदलना होगा, अन्यथा यह केवल पाखंड है.
इससे पहले पिछले साल फैक्ट चेक वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर पर धारा 152 के तहत मामला दर्ज किया गया था, क्योंकि उन्होंने विवादास्पद हिंदुत्व नेता यति नरसिंहानंद का एक वीडियो साझा किया था, जो अपने हिंसक मुस्लिम-विरोधी बयानों के लिए जाने जाते हैं.
इन्हें कुछ वीडियो में नफरत भरे भाषण देने, मुसलमानों के खिलाफ हिंसा भड़काने या मुस्लिम महिलाओं के साथ बलात्कार करने की धमकी देते हुए देखा गया था.
(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
