नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सलाहकार कंपनी आई-पैक और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी और इस दौरान मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदी इस वक्त सियासत के गलियारों से लेकर हाईकोर्ट तक विवाद का विषय बनी हुई है.
इस मामले में शुक्रवार (9 जनवरी) को हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी, लेकिन भारी भीड़ और हंगामे के चलते इसे 14 जनवरी तक के लिए टाल दिया गया.
एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कोलकाता में ईडी छापे के विरोध में मार्च निकाल रही हैं, तो वहीं राजधानी दिल्ली में भी तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने गृह मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन के दौरान तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ ब्रायन और महुआ मोइत्रा को पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में करीब दो घंटे बाद उन्हें छोड़ दिया गया.
इससे पहले गुरुवार (8 जनवरी) को तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक सलाहकार कंपनी आई-पैक के प्रमुख प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर पर ईडी ने छापे मारे थे. जिस समय एजेंसी की यह कार्रवाई चल रही थी, जब एक नाटकीय घटनाक्रम में ठीक उसी समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंच गईं और कुछ देर बाद एक हरी फाइल लेकर बाहर निकलीं.
उन्होंने दावा किया कि ईडी ने उनकी पार्टी संबंधी हार्ड डिस्क, आतंरिक दस्तावेज़ और संवेदनशील डेटा को ज़ब्त करने की कोशिश की है.
आरोप-प्रत्यारोप
ममता बनर्जी ने इस कार्रवाई को राजनीतिक उत्पीड़न बताते हुए मीडिया से कहा कि ईडी उनकी पार्टी से जुड़े दस्तावेज़ ज़ब्त कर रही थी, जिसे उन्होंने वापस ले लिया है.
बनर्जी ने आगे कहा, ‘क्या पार्टी की हार्ड डिस्क, उम्मीदवारों की सूची इकट्ठा करना ईडी और अमित शाह का काम है?’
उन्होंने अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, ‘ये गृहमंत्री देश की रक्षा नहीं कर सकते और वे मेरे सारे पार्टी दस्तावेज़ हथियाना चाह रहे हैं. अगर मैं भाजपा के पार्टी कार्यालय पर छापा मारूं तो क्या होगा? एक तरफ वे पश्चिम बंगाल में एसआईआर चलाकर सभी मतदाताओं के नाम मिटा रहे हैं… चुनाव के कारण वे मेरी पार्टी के बारे में सारी जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं…’
वहीं, ईडी ने सीएम के खिलाफ जांच में बाधा डालने और फाइलें छीनने का आरोप लगाते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है. केंद्रीय एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ एक नियमित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी. तलाशी अभियान पूरी तरह से स्थापित कानूनी सुरक्षा उपायों के अनुरूप चलाया जा रहा था लेकिन मुख्यमंत्री ने इसमें बाधा डालने के साथ ही कई भौतिक दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित महत्वपूर्ण सबूत अपने साथ ले गईं.
मालूम हो कि प्रतीक जैन को राज्य की राजनीति और प्रशासन में बेहद प्रभावशाली माना जाता है और वे राज्य सचिवालय नबन्ना में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कई बार मिल चुके हैं.
आई-पैक प्रमुख के आवास के अलावा सीएम बनर्जी सॉल्ट लेक सेक्टर वी स्थित आई-पैक के कार्यालय भी पहुंचीं. यहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और टीएमसी समर्थक बाहर जमा होकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे. पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार और वरिष्ठ मंत्री सुजीत बोस भी आई-पैक कार्यालय पहुंचे थे.
यहां पुलिसकर्मियों को आई-पैक कार्यालय से कई फाइलें ले जाते और उन्हें एक कार में रखते हुए देखा गया. आरटीओ रिकॉर्ड के अनुसार, यह वाहन अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के नाम पर पंजीकृत है.
ईडी ने यहां भी जांच में व्यवधान का आरोप लगाया और कहा कि ममता बनर्जी, उनके समर्थकों और राज्य पुलिस कर्मियों ने जबरन भौतिक दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत हटा दिए.
ममता बनर्जी पहले भी सीबीआई के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर चुकी हैं
ज्ञात हो कि यह पहली बार नहीं है जब बनर्जी ने केंद्र सरकार की कार्रवाई का विरोध किया है. 2019 में सारदा घोटाले के सिलसिले में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से पूछताछ करने के सीबीआई के प्रयास के विरोध में उन्होंने कोलकाता के निज़ाम पैलेस स्थित सीबीआई कार्यालय में धरना प्रदर्शन किया था.
उल्लेखनीय है कि ईडी की छापेमारी दिल्ली में दर्ज एक पुराने कोयला तस्करी मामले से संबंधित है, जिसमें जांच के तहत आई-पैक के सेक्टर वी कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर एक साथ छापेमारी शुरू की गई.
एजेंसी सूत्रों के अनुसार, ईडी की एक विशेष टीम 7 जनवरी की देर रात दिल्ली से पहुंची और केंद्रीय सशस्त्र बलों के साथ मिलकर इस अभियान को अंजाम दिया.
सेक्टर वी की एक ऊंची इमारत की 12वीं मंजिल पर स्थित आई-पैक कार्यालय को अभियान के दौरान सील कर दिया गया था, जिससे अस्थायी रूप से प्रवेश और निकास प्रतिबंधित हो गया था. तलाशी शुरू होने के समय, केवल कुछ रात्रि-शिफ्ट कर्मचारी ही मौजूद थे. कंसल्टेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बाद में अपने घरों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समन्वय किया.
इसी मामले के सिलसिले में ईडी की एक अन्य टीम ने बुर्राबाजार के पोस्टा इलाके में एक कारोबारी के आवास पर भी तलाशी ली.
ईडी का जवाब
इस ऑपरेशन के विवरण से संबंधित एक बयान में ईडी ने कहा है कि उसकी जांच में पाया गया है कि इस मामले में शामिल कोयले का एक बड़ा हिस्सा शाकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनीज को बेचा गया था, और कई व्यक्तियों के बयानों सहित अनेक सबूतों से हवाला गिरोह का भी खुलासा हुआ.
एजेंसी ने आगे आरोप लगाया कि कोयला तस्करी से प्राप्त अपराध की आय को कई स्तरों पर छिपाने में शामिल एक हवाला ऑपरेटर ने आई-पैक को ‘दसियों करोड़ रुपये’ के लेनदेन में मदद की.
ईडी ने कहा कि कोयला तस्करी से प्राप्त आय के सृजन से जुड़े व्यक्तियों, हवाला ऑपरेटरों और हैंडलरों को 8 जनवरी, 2026 को पीएमएलए के तहत तलाशी में शामिल किया गया था, और दावा किया कि आई-पैक हवाला के पैसे से जुड़ी संस्थाओं में से एक थी.
हालांकि, ईडी ने अभी तक बरामदगी या जब्ती के संबंध में कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है.
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
उधर, बंगाल में सत्तारूढ़ टीएमसी ने घोषणा की है कि वह राज्य भर में केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ प्रदर्शन करेगी.
वहीं, बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के इस तरह ईडी की छापेमारी के बीच पहुंचे की आलोचना करते हुए इसे अनैतिक और संवैधानिक अधिकार में हस्तक्षेप का प्रयास बताया.
अधिकारी ने कहा, ‘मुख्यमंत्री केवल एक राजनीतिक नेता नहीं बल्कि एक प्रशासनिक प्रमुख होते हैं. यह कार्य बाधा उत्पन्न करने के समान है.’
गौरतलब है कि आई-पैक 2019 से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है और चुनाव रणनीति, शासन संबंधी प्रतिक्रिया और संगठनात्मक पुनर्गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. यह कंपनी विशेष रूप से चुनावों से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व और राज्य प्रशासन के विभिन्न वर्गों के साथ समन्वय करने के लिए जानी जाती है.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यद्यपि ईडी की कार्रवाई आधिकारिक तौर पर भ्रष्टाचार जांच से जुड़ी है, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इसका समय इसके राजनीतिक महत्व को बढ़ा देता है.
मालूम हो कि ये छापे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोलकाता दौरे के कुछ दिनों बाद और उसी दिन हुए हैं जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा संगठनात्मक बैठकों के लिए शहर में पहुंचे थे.
विपक्षी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की ओर से भी इस मामले में तत्काल प्रतिक्रिया दिखाई दी.
पार्टी राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने सीएम के आचपण पर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री देश की भ्रष्टाचार-विरोधी एजेंसी द्वारा की जा रही जांच को रोकने के लिए इतनी जल्दी में क्यों हैं? भ्रष्टाचार-विरोधी जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए, लेकिन उनका इस्तेमाल राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है. इसमें कुछ गड़बड़ है.
उन्होंने आगे कहा, ‘प्रतीक जैन कौन हैं? जब टीएमसी के इतने सारे नेताओं और मंत्रियों को भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, तब मुख्यमंत्री एक बार भी नहीं गईं. असल में यह अभिषेक बनर्जी का बेनामी संगठन है. जो आईटी सेल की आड़ में गाय, कोयले की तस्करी और सरकारी नौकरियों, जिनमें शिक्षण पद भी शामिल हैं, के अवैध धन का रैकेट चल रहा है. टीएमसी की सत्ता बरकरार रखने के लिए आई-पैक का इस्तेमाल चुनावी मशीनरी को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है.’
फिलहाल, सत्ताधारी और विपक्षी दोनों खेमे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, जिससे राज्य में राजनीतिक माहौल और भी तनावपूर्ण हो गया है.
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