श्रम और रोज़गार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने संसद में कहा था कि बिना दस्तावेज़ वाले संदिग्ध प्रवासियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की ज़िम्मेदारी राज्य पुलिस की है. लेकिन हालिया दस्तावेज़ इंगित करते हैं कि यह कार्रवाई दरअसल गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत हो रही है.
गुड़गांव में असम और पश्चिम बंगाल से आए सैकड़ों बांग्लाभाषी प्रवासी मज़दूरों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने लगभग सभी को रिहा कर दिया है. पुलिस का दावा है कि अब सिर्फ़ 10 लोग हिरासत में हैं, जिन्हें वह ‘बांग्लादेशी नागरिक’ बता रही है.
बांग्लादेश से आए कथित नागरिकों के ख़िलाफ़ चल रही कार्रवाई के बीच, सैकड़ों बंगाली और असमिया प्रवासी मज़दूरों को गुरुग्राम पुलिस ने हिरासत में लेकर ‘होल्डिंग सेंटर्स’ में रख दिया है. इनमें से अधिकांश पुरुष हैं. केवल 19 जुलाई को 74 मजदूरों को हिरासत में लिया गया.