हमारी सभ्यता आत्महत्या के कगार पर खड़ी है. बेहिसाब हिंसक संघर्षों से लेकर ग्लोबल वार्मिंग हमारे समय के भीषण सत्य हैं. ऐसे में क्या हम रचनाकर अपनी कविता, कहानियों से इंसान को बदल सकते हैं? रचनाकार का समय स्तंभ में आज पढ़ें प्रख्यात उपन्यासकार अलका सरावगी को.