प्रशांत किशोर ने ऐसे हाई-रिस्क मॉडल का प्रयोग किया, जिसमें पूरा अभियान एक लोकप्रिय चेहरे और केंद्रीय नैरेटिव पर टिका था. यह मॉडल विज्ञापन और राजनीतिक ब्रांडिंग की दुनिया में चलता है, लेकिन ज़मीनी राजनीति में यह तभी सफल होगा जब उसके साथ मजबूत स्थानीय नेतृत्व हो.