रचनाकार का समय: ‘केवल लिखना ही मुक्ति नहीं है’

पिछले तीन-चार दशकों से हिंदी समाज में साहित्य के प्रति लगाव में भयंकर कमी आई है. मध्यवर्ग के भीतर सांस्कृतिक और सामाजिक जागरूकता का घोर अभाव है. समाज का जागरूक तबका भी हिंदी संस्कृति की दुनिया से बाहर होता जा रहा है. रचनाकार का समय में पढ़िए कवि बसंत त्रिपाठी को.