लोकतंत्र दुनिया भर में लुढ़क रहा है. तकनीक की नई शैलियां विकसित हो रही हैं. इससे पहले कि सर्वसत्तावाद हावी हो जाए, हमें बहुत तेज़ी से लोकतंत्र का नया संस्करण खोजना होगा जो मानव जीवन और मनुष्येत्तर जगत दोनों को समाहित कर सके. साहित्यिक सिद्धांतकार और भाषाविद गणेश देवी का लेख.
डराने की कोई साज़िश गौरी जैसी निडर आवाज़ों को नहीं दबा सकती.