उत्तर प्रदेश में असंगठित श्रमिकों के लिए पिछले चार वर्षों में करीब सवा चार सौ करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं के लिए आवंटित किए गए. लेकिन, इस धनराशि को ख़र्च ही नहीं किया जा सका क्योंकि इन श्रमिकों के लिए कोई भी योजना संचालित नहीं हो रही थी.
महाराष्ट्र के कपास उत्पादक किसान तमाम किस्म की कठिनाइयों से जूझते हैं. कमजोर बीज, कमतर फसल, मौसम की मार, बीमा कंपनियों द्वारा दिया जा रहा कम मुआवज़ा, फसल का समुचित दाम न मिल पाना — सबसे बढ़कर सरकार की उपेक्षा.