रचनाकार का समय: ‘आज बौद्धिक और रचनात्मक आंदोलन की ज़रूरत है’ हिंदी भाषी समाज देश का सबसे बड़ा भाषाई समाज है. लेकिन उसका साहित्य से जीवंत संबंध कभी न बन सका. वह रामचरितमानस और हनुमान चालीसा से आगे न जा सका. फिल्में ही उसके मनोरंजन का जरिया बनी रहीं. रचनाकार का समय में पढ़िए आलोचक जवरीमल्ल पारख को. 29/03/2025