ज्ञानरंजन: ‘अराजकता मेरे व्यक्तित्व और सृजनात्मक क्रियाकलापों का नमक है’

स्मृति शेष: ज्ञानरंजन दो टूक थे. उन्हें जो काम करना है, उसके लिए फिर उसे पूरा करने के लिए हर जोखिम उठाने को तैयार रहते थे. एक स्थानीय पत्रिका को अपने सीमित संसाधनों से पांच दशक तक निकालते रह सकना, उसे देश के कोने-कोने के प्रबुद्ध और विचारवान पाठकों की अनिवार्य पत्रिका बना देना, ज्ञान जी की रचनात्मकता का बड़ा आयाम है.