भाजपा के हिंदी प्रेम से हिंदी का काफी नुकसान हुआ है. विभिन्न राज्यों में हिंदी को थोपने के ख़िलाफ़ चलने वाले आंदोलन दरअसल हिंदी भाषा के ख़िलाफ़ नहीं हैं. ये विरोध उस प्रवृत्ति की मुख़ालफ़त करते हैं जो संघवाद की धारणा की अवहेलना करके देश पर एक भाषा थोपना चाहती है.