छत्तीसगढ़ पहुंचने वाले शुरुआती दाऊदी बोहराओं में से एक मुल्ला इब्राहिम अली अपने परिवार के साथ सारंगढ़ पहुंच कर यहीं रच बस गए. इनका यहां आना तब हुआ जब सारंगढ़ के साथ-साथ देश के सामाजिक और व्यापारिक इतिहास में मील के नए पत्थर गड़ रहे थे. फिर एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में इब्राहिम अली की कहानी भी इस इतिहास के साथ पानी में शक्कर की तरह घुल गई.
छत्तीसगढ़ का रायगढ़ देश का पहला और शायद अकेला ज़िला रहा है जहां एक पुलिस अधिकारी ने कलेक्टर के रूप में काम किया. यह आज़ादी के तत्काल बाद की बात है. लेकिन रायगढ़ के कलेक्टर कक्ष में कलेक्टरों के नामों की टंगी सूची में इतिहास बनाने वाले तीन सप्ताह के कलेक्टर रुस्तमजी का नाम नहीं है.
एक आदिवासी गोंड राजा के द्वारा बसाए गए सारंगढ़ को पान-पानी-पायलागी का नगर कहा जाता है. इसे यह नाम यूं ही नहीं मिला.
इंग्लैंड में पढ़ाई के दौरान अब्दुल हफ़ीज़ और रणजीत पंडित अपने सीनियर जवाहरलाल नेहरू से बेहद प्रभावित हो चुके थे. नेहरू इनके ‘हीरो’ और ‘रोल-मॉडल’ थे. भारत लौटने पर स्वतंत्रता संग्राम की गतिविधियों में शामिल होना अगला स्वाभाविक क़दम था. उनके साथ तीसरे मित्र जवाहिर सिंह भी शामिल हो गए थे. तीनों गांधी के संपर्क में आए और उनके संपर्क में आने वाले अन्य लोगों की तरह उनके रंग में रंग गए.
राजा जवाहिर सिंह से दोस्ती के बाद सारंगढ़ का महल एल्विन और उनकी गोंड पत्नी कोसी का दूसरा घर बन गया था. वेरियर एल्विन ने अपने प्रथम पुत्र का नाम रखा था जवाहर. अपनी आत्मकथा में उन्होंने लिखा कि यह उनके मित्र के नाम पर था, 'इसी नाम के अधिक मशहूर व्यक्ति पर नहीं '.
राजा नरेशचंद्र सिंह अकेले मुख्यमंत्री रहे जो पद की शपथ लेने के लिए काले पीले रंग की टैक्सी में बैठकर राजभवन पहुंचे थे. उन दिनों राज भवन के अंदर किसी टैक्सी का प्रवेश प्रतिबंधित था. राज्यपाल के सचिव ने आग्रह किया कि राजा साहब किसी अन्य वाहन में आ जाएं. लेकिन राजा साहब का तर्क था कि जब मेरे पास कोई वाहन नहीं था, यह टैक्सी सदैव मेरे साथ रही. आज मैं कैसे इसे छोड़ दूं.
आज़ादी के बाद के शुरुआती दशकों में मज़ाक़ में कहा जाता था कि कांग्रेस की टिकट पर पेड़ और खंभे भी चुनाव जीत जाते हैं. ऐसे में कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष चुनाव हार जाए तो ज़ाहिर है बहुत बड़ी घटना बनती थी. नया मध्य प्रदेश राज्य बनते ही ऐसा हुआ था. वह भी सारंगढ़ की सीमा पर.
जवाहर लाल नेहरू और डॉ. कैलाशनाथ काट्जू के बीच परस्पर सम्मान का रिश्ता था. मोतीलाल नेहरू की मृत्यु के बाद उनकी राजनैतिक विरासत जवाहर लाल को और वकालत की विरासत काट्जू को हस्तांतरित हुई थी. सारंगढ़ के गिरिविलास पैलेस में काट्जू के लिखे अनेक पत्र संरक्षित हैं.
मध्य प्रदेश के पूर्व में उड़ीसा से लगी सीमा से पश्चिम में गुजरात को छूती सीमा तक पहुंचने में सूर्य को चालीस मिनिट लगते थे. कुल तेरालीस ज़िलों में बंटे इस राज्य का एक अकेला बस्तर ज़िला करीब चालीस हज़ार वर्ग किलोमीटर में फैला था, केरल राज्य से बड़ा था. क़िस्सा सारंगढ़ में आज पढ़ें, मध्य प्रदेश के जन्म की कथा.
पहले विश्वयुद्ध के दौरान जब आर्थिक मंदी आयी, एक पुर्तगाली नागरिक, जिनका जन्म गोवा में हुआ था और जो बंबई के ताज होटल के प्रमुख खानसामा हुआ करते थे, के सामने आजीविका का संकट आ खड़ा हुआ. ऐसे में मध्य भारत के एक राजा ने उन्हें अपने साथ चलने का प्रस्ताव दिया, और फिर विविध संस्कृतियों के एक अनूठे संगम का जन्म हुआ. 'क़िस्सा सारंगढ़' में आज पढ़ें, इतिहास का यह अद्भुत पन्ना.
मध्य भारत में एक रियासत है, सारंगढ़. छत्तीसगढ़ का अंग बनने से पहले यह रियासत मध्य प्रदेश और उससे पहले सेंट्रल प्रोविंस का हिस्सा हुआ करती थी. डॉक्टर परिवेश मिश्रा सारंगढ़ के राजपरिवार से ताल्लुक रखते हैं, और इस भूगोल की संस्कृति और इतिहास के गहन अध्येता है. इस सप्ताह हम एक नया स्तंभ शुरू कर रहे हैं, जो मध्य भारत की विविध छवियों को समेटता है.
1775 की एक सुबह कलकत्ता में नंद कुमार को फांसी दे दी गयी थी. इतिहास के उस स्याह अध्याय में तीन बरस बाद एक पन्ना जुड़ गया जब छत्तीसगढ़ में उस मुक़दमे के एक प्रमुख किरदार की मृत्यु हो गयी.