मनरेगा का नाम ही नही बदला गया है, बल्कि बहुत सारे ऐसे परिवर्तन किए गए हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है. नए क़ानून में कई विरोधाभास साफ़ देखे जा सकते हैं. जिन कमियों में सुधार किया जाना था, उन्हें ज्यों का त्यों छोड़ दिया गया हैं और जिन नियमों को और मज़बूत करना था, उन्हें कमज़ोर बना दिया गया.
करीब सौ बरस पहले, बीस मार्च 1927 को आंबेडकर ने अपने सार्वजनिक जीवन का पहला आंदोलन छेड़ा था, जो पानी के अधिकारों पर केंद्रित था. क्या यह तत्कालीन परिस्थितियों का परिणाम था या इसके पीछे आंबेडकर का ऐतिहासिक चिंतन था? महाड़ सत्याग्रह के ये सवाल जल के ऐतिहासिक, सामाजिक एवं आर्थिक मूल्य से जुड़े हैं.