कविता में जनतंत्र: ‘क्या लोकतांत्रिक संवेदनशीलता सुधारवादी है या क्रांतिकारी?’ प्रोफेसर अपूर्वानंद की किताब 'कविता में जनतंत्र' की प्रस्तावना में प्रताप भानु मेहता लिखते हैं कि हमें ऐसे कवि की आवश्यकता है जो लोकतंत्र की चमक को पकड़ सके, जो केवल अंधकार का आह्वान न करे, बल्कि नया प्रकाश भी फैलाए. 06/04/2025