पूर्व-राग: लेखक के निर्माण की यात्रा के बहाने जीवन की कुछ सीख

पुस्तक समीक्षा: जयशंकर जी की डायरी ‘पूर्व-राग’ एक लेखक के बनने की अंतर्कथा के रूप में ही नहीं एक लेखक की पढ़ने-लिखने के प्रति अपार आस्था और समर्पण के लिए भी पढ़ी जानी चाहिए. एक लेखक को वह दृष्टि प्राप्त करने के लिए पर्याप्त रियाज़ करना पड़ता है, ठीक किसी संगीतकार या अन्य किसी भी कला साधक की तरह. ये नोट्स उसी सतत अभ्यास के बीच लिखे गए आत्म-साक्षात्कार के क्षण हैं.