पुस्तक समीक्षा: फ़रीद ख़ां के कविता संग्रह 'गीली मिट्टी पर पंजों के निशान' की कविताएं किसी भावावेश में लिखी गई हैं या किसी योजनाबद्ध तरीके से, मगर ये कविताएं हमारे समय का इतिहास रचती हैं.
पुस्तक समीक्षा: पवन करण की किताब मुग़ल साम्राज्य की उन तुर्क, तैमूरी, अफ़गानी, इस्फहानी और राजपूतानी महिलाओं की आपबीती बयान करती है, जिन्होंने साम्राज्य को बनाने, बढ़ाने और उसके विस्तार में अहम भूमिका निभाई है.
पुस्तक समीक्षा: राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित अरुण देव की ‘मृत्यु कविताएं' न केवल मृत्यु की सार्थकता और हमारे जीवन में उसकी महत्ता का वर्णन करती है, ये कविताएं उन धार्मिक आंडबरों पर प्रहार भी करती चलती हैं, जिनके लिए मनुष्य बिना मौत के ही मरने की इच्छा पालने लगता है.