वोटर लिस्ट रिविज़न: बिहार सिर्फ़ पहली प्रयोगशाला है, आपका नंबर भी आने वाला है

जो बिहार में हो रहा है वो आज तक भारतीय लोकतंत्र में कभी नहीं हुआ. आपने भले ही पिछले बीस साल में दसियों चुनाव में वोट दिया हो, अब नए सिरे से साबित करना होगा कि आप भारत के नागरिक हैं. आपकी नागरिकता का फैसला कोई गुमनाम सरकारी कर्मचारी करेगा, एक ऐसी जांच प्रक्रिया से जिसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं है.

बिहार वोटर लिस्ट संशोधन: जनता को बेवक़ूफ़ मानता है क्या चुनाव आयोग?

बिहार में वोटर लिस्ट के संशोधन के बारे में सुबह अख़बार में चुनाव आयोग का विज्ञापन छपता है, शाम को आयोग उसका खंडन कर देता है. वो संस्था जो बीस साल पहले तक देश की सबसे भरोसेमंद संस्था मानी जाती थी, वो आज चुटकुला बन गई है.

बिहार में मतदाता सूची विवाद: नौ भ्रांतियां और एक सच

बिहार की कुल आबादी लगभग 13 करोड़ है. इनमें से कोई 8 करोड़ वयस्क हैं जिनका नाम मतदाता सूची में होना चाहिए. इनमें से करीब 3 करोड़ लोगों का नाम 2003 की मतदाता सूची में था. बाक़ी 5 करोड़ को अपनी नागरिकता के प्रमाण जुटाने पड़ेंगे. उनमें से आधे यानी ढाई करोड़ लोगों के पास वे प्रमाणपत्र नहीं होंगे, जो चुनाव आयोग मांग रहा है.

न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर चारों तरफ़ झूठ पर झूठ फैलाया जा रहा है: योगेंद्र यादव

वीडियो: फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी समेत विभिन्न मांगों को लेकर किसानों ने केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ अपना प्रदर्शन दोबारा शुरू कर दिया है. इस वीडियो में राजनीतिक विश्लेषक और स्वराज इंडिया पार्टी के नेता योगेंद्र यादव एमएसपी को लेकर फैलाए गए 10 बड़े झूठ और उनका सच बता रहे हैं.

लोहिया की इतिहास दृष्टि के आलोक में 22 जनवरी का आयोजन उदार हिंदू पर कट्टरपंथ की विजय है

अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा करोड़ों साधारण आस्थावान हिंदुओं के लिए उनके आराध्य का भव्य मंदिर बनने का विशेष पर्व था. उनमें से अधिकांश के मन में कोई कट्टरता नहीं रही होगी. लेकिन इसके आयोजकों और प्रायोजकों ने इसके राजनीतिक निहितार्थ के बारे में शक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी है.

आंकड़ों की रोशनी में फीका है नरेंद्र मोदी का लोकसभा चुनाव में ‘हैट्रिक’ का दावा

विधानसभा चुनावों में तीन राज्यों की जीत के बाद नरेंद्र मोदी ने 'हैट्रिक' शब्द कहते हुए आगामी लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार की ज़मीन तैयार कर दी है. हालांकि, आंकड़ों के साथ इस दावे की पड़ताल भाजपा के लिए उतनी आश्वस्तकारी नहीं है, जितनी समझी जा रही है.

यह देश किसानों का क़र्ज़दार है

क़र्ज़माफी को किसानों को दिए गए खैरात के तौर पर न देख कर उस क़र्ज़ के एक छोटे से हिस्से की अदायगी के तौर पर देखा जाना चाहिए, जो हम पर बकाया है.