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आज गणमान्यों के सामने घुटनों पर झुके बच्चे क्या कल एक नागरिक के तौर पर खड़े हो पाएंगे

मणिपुर के मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम में घुटनों पर झुके स्कूली बच्चों को देखकर विचार आता है कि आज वरिष्ठों के सामने सजदे में खड़े होने के लिए मजबूर करने वाला वातावरण उन्हें सवाल करने के लिए तैयार करेगा या सब चीज़ें चुपचाप स्वीकार करने के लिए?

जेल में क्षमता से अधिक क़ैदी, यूपी में स्थिति सबसे ख़राब: एनसीआरबी

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015-2017 के दौरान भी जेल में क्षमता से अधिक क़ैदी थे. इस अवधि में क़ैदियों की संख्या में 7.4 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ, जबकि समान अवधि में जेल की क्षमता में 6.8 प्रतिशत वृद्धि हुई.

भारत जैसे देश में सिर्फ़ संविधान की सीमाओं में रहकर ही हम आगे बढ़ सकते हैं

आज़ादी के इतिहास को देखने पर यह पता चलता है कि तत्कालीन नेताओं ने आज़ादी को प्राप्त करने हेतु अपने-अपने मार्गों पर चलने का कार्य किया परंतु एक मार्ग पर चलने वाले ने दूसरे मार्ग पर चलने वाले नेताओं को कभी भी राष्ट्रद्रोही नहीं कहा.

आपको अपना राष्ट्र मुबारक़, मुझे तो अपना देश चाहिए…

राष्ट्रवाद के शोर के बीच कवि भगवत रावत की एक कविता जिसे अभिनेत्री रत्ना पाठक शाह, निर्देशक तिग्मांशु धूलिया और अभिनेत्री रसिका दुग्गल ने स्वरबद्ध किया है.

देश में ऐसी स्थिति आ गई है कि लोग अपना विचार नहीं रख सकते: हाईकोर्ट

नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्या मामले में सुनवाई कर रही अदालत ने कहा, हम सबसे बड़े लोकतंत्र हैं. हम रोजाना ऐसी घटनाओं पर गर्व नहीं कर सकते हैं. यह हमारे के लिए शर्मनाक है.

New Delhi: A view of Parliament in New Delhi on Sunday, a day ahead of the monsoon session. PTI Photo by Kamal Singh (PTI7_16_2017_000260A)

आए दिन देशभक्ति को नए सिरे से परिभाषित क्यों किया जा रहा है?

सरकार के हर फ़ैसले और बयान को देशभक्ति का पैमाना मत बनाइए. सरकारें आएंगी, जाएंगी. देश का इक़बाल खिचड़ी जैसे फ़ैसलों का मोहताज नहीं.

सभी विपक्षी और उदारवादी मूल्यों का सफाया एक खतरनाक प्रवृत्ति है: बॉम्बे हाईकोर्ट

गोविंद पानसरे और नरेंद्र दाभोलकर की हत्या की जांच की निगरानी का अनुरोध करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की.

आप उग्रवादियों की बात करते हैं, लेकिन सेना में शामिल कश्मीरियों पर कुछ नहीं कहते: महबूबा

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री ने कहा, बहस में कश्मीरियों को गालियां दी जाती हैं. इससे कश्मीरी बाक़ी देश से कटने लगे हैं और देश के लोग कश्मीर के ख़िलाफ़ हो रहे हैं.

‘यह स्थापित करने का प्रयास हो रहा है कि श्रमिक एवं श्रम कानून विकास में बाधा हैं’

भारतीय मजदूर संघ ने नीति आयोग के उन निष्कर्षों को आधारहीन बताया है कि श्रम कानूनों में संशोधन के बिना विकास और रोज़गार संभव नहीं है.

हमारे समाज को आजकल इतना गुस्सा क्यों आ रहा है?

तकनीक के अधकचरे इस्तेमाल ने दरअसल एक अधकचरी पढ़ी-लिखी हिंसा को भी जन्म दिया है. इस हिंसा का शिकार हर वैसा वर्ग और व्यक्ति हो रहा है, जो एक मदमाती सत्ता से सवाल पूछता है.

फसल अच्छी होने के बावजदू हमारा किसान हताश क्यों है?

शायद ही ऐसा कोई दिन बीतता है, जब देश के किसी न किसी कोने से किसानों की आत्महत्या की खबरें न आती हों. हार किसानों की नहीं हुई है. ये हार अर्थशास्त्रियों और नीति-निर्माताओं की है, जिन्होंने किसानों को मझधार में छोड़ दिया है.

दस कहानियां: मैं देश से बहुत प्रेम करता हूं

देश के सबसे बड़े देशप्रेमी ने देशप्रेम नापने की एक मशीन बनवाई है . इस मशीन में आदमी बैठ जाता है और सुई घूमने लगती है. पता चल जाता है कि कौन देश से कितना प्रेम करता है.