श्रीलंकाई सरकार 20वां संविधान संशोधन लाकर 19वें संविधान संशोधन द्वारा राष्ट्रपति की शक्तियों पर नियंत्रण लगाने वाले प्रावधानों को ख़त्म करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है. भारत की चिंता नया संशोधन नहीं बल्कि 1987 का द्विपक्षीय समझौता है, जो बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों में ख़तरे में पड़ सकता है.
श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में गोटबाया राजपक्षे ने सत्ताधारी पार्टी के उम्मीदवार सजित प्रेमदास को हराया था. इसके बाद निवर्तमान प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे के भाई और गृहयुद्ध के दौरान विवादित रक्षा सचिव रहे गोटबाया राजपक्षे ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत दर्ज की. उन्होंने सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार सजीत प्रेमदास को 13 लाख से अधिक मतों से पराजित किया.
इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी फ़ैसला दिया था कि पुलिस के पास जांच के दौरान अचल संपत्ति को जब्त करने की कोई शक्ति नहीं है. इस आदेश को महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
बीते अप्रैल माह में श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में तीन गिरजाघरों और तीन होटलों का निशाना बनाते हुए किए गए धमाकों के 258 लोगों की मौत हो गई थी. इस सिलसिले में 10 महिलाओं सहित 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है.
अदालत ने कहा कि दाभोलकर और पानसरे के बाद अन्य लोगों को निशाना बनाने के लिए उनके नामों की सूची मीडिया में फैलाई जा रही है. उदारवादियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को डर है कि अगर वे अपने विचार सार्वजनिक रूप से व्यक्त करते हैं तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण से अपराधिक जांच के लिए पुलिस को आधार डेटा की सीमित उपलब्धता दिए जाने का प्रस्ताव रखा था. गृह राज्य मंत्री ने कहा कि इस बारे में मंत्रालय से चर्चा कर विचार किया जाएगा.
कोई मंत्री या सरकारी कर्मचारी आपराधिक जांच के मुद्दों पर विचार व्यक्त करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दावा कर सकता है या नहीं, इस पर होगा विचार.