दिल्ली: आरबीआई के बाहर चल रही है 2,000 रुपये के नोट बदलने की कालाबाज़ारी

वीडियो: इन दिनों भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) कार्यालयों के बाहर लोग अपने 2,000 रुपये के नोटों को बदलने के लिए कतारों में खड़े नज़र रहे हैं. जब द वायर की टीम नई दिल्ली में आरबीआई कार्यालय पहुंची तो उन्हें ब्लैक में इन नोटों को बदलने के अवैध प्रयास का पता चला. यहां 200 रुपये के अतिरिक्त भुगतान पर इन नोटों को बदले जाने की जानकारी मिली.

दिल्ली में भारतीय रिज़र्व बैंक के बाहर क्यों लगी लोगों की क़तारें?

वीडियो: रिज़र्व बैंक ने बीते मई में 2016 की नोटबंदी में लाए गए दो हज़ार रुपये के नोट को चलन से बाहर किए जाने की घोषणा करते हुए कहा था कि इन्हें 30 सितंबर तक बदला जा सकता है. बाद में यह समयसीमा सात अक्टूबर तक बढ़ाई गई. फिर कहा गया कि जो लोग अब भी नोट नहीं बदल सके, वे आरबीआई के 19 क्षेत्रीय कार्यालयों से जाकर नोट बदल सकते हैं.

बैंकों को 2,000 रुपये के नोटों की ‘बड़ी जमा राशि’ की सूचना आयकर विभाग को देनी होगी: रिपोर्ट

अगर नकदी जमा सावधि और बचत जमा के लिए 10 लाख रुपये और चालू खाता जमा के लिए 50 लाख रुपये की सीमा से ऊपर हैं, तो बैंकों को इसकी जानकारी आयकर विभाग को मुहैया करानी होगी. 

2,000 रुपये को नोटों की वापसी की जटिल प्रक्रिया का असली निशाना कौन है?

2,000 रुपये के नोट रखने वालों के लिए अब एक स्पष्ट प्रोत्साहन है कि वे बैंक में पैसे जमा करने के बजाय सिर्फ एक्सचेंज के लिए जाएं और आयकर उद्देश्यों के लिए जांच की जाए. हालांकि, नोट एक्सचेंज करने को काफी मुश्किल बना दिया गया है क्योंकि एक बार में सिर्फ 20,000 रुपये ही बदले जा सकते हैं.

क्या दो हज़ार रुपये के नोट की वापसी मोदी की नोटबंदी की विफलता का सबूत है?

वीडियो: 2,000 रुपये का नोट क्यों जारी किया गया था और इसकी वापसी क्यों हुई? क्या काला धन ख़त्म हो गया है? क्या भारत में इस नोट की ज़रूरत है?

कर्नाटक चुनाव परिणाम: क्या मोदी सरकार हार की बौखलाहट में फैसले ले रही है?

वीडियो: कर्नाटक चुनाव में भाजपा की हार के ठीक बाद किरेन रिजिजू का मंत्रालय बदला जाना, दिल्ली सरकार के अधिकारियों के तबादले के अधिकारों को लेकर अध्यादेश और फिर दो हज़ार रुपये के नोट को वापस लेना- ये निर्णय दिखाते हैं कि शायद पार्टी अब राजनीति में बहुत कुछ बदल देना चाहती है. इस बारे में द वायर की सीनियर एडिटर आरफ़ा ख़ानम शेरवानी का नज़रिया.

दो हज़ार रुपये के नोट और आंशिक नोटबंदी के पीछे का रहस्य

भारतीय रिज़र्व बैंक की तरफ से दो हज़ार रुपये मूल्यवर्ग के नोट को वापस लेने के निर्णय को सही ठहराने के लिए जो भी तर्क दिए गए हैं, उनमें से कोई भी मान्य नहीं है.

2016 के बाद से दो हज़ार रुपये के नकली नोटों की संख्या में 107 गुना वृद्धि: केंद्र सरकार

लोकसभा में दिए एक लिखित जवाब में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री ने बताया है कि वर्ष 2016 में 2,000 रुपये के 2,272 नकली नोट ज़ब्त किए गए थे, जिनकी संख्या 2020 में बढ़कर 2,44,834 हो गई.

वित्त वर्ष 2021-22 में 500 रुपये के जाली नोटों की संख्या 102 फीसदी बढ़ी: आरबीआई

आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में बैंकिंग प्रणाली में मिले 500 रुपये के जाली नोटों की संख्या में दोगुने से भी अधिक की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, दो हज़ार रुपये के जाली नोटों की संख्या में 54.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.