Akbar Khan

पुलिस अकबर ख़ान की हत्या के आरोपियों को बचाती हुई क्यों दिखाई दे रही है?

अलवर मॉब लिंचिंग मामले में पुलिस की ओर से दाख़िल अधूरी चार्जशीट न सिर्फ जेल में बंद आरोपियों के लिए क़ानूनी तौर पर मुफ़ीद है, बल्कि इससे यह भी साफ़ होता है कि पुलिस का बाकी आरोपियों को पकड़ने का फ़िलहाल कोई इरादा नहीं है.

अलवर लिंचिंग: मेव पंचायत में उठी मांग, भाजपा विधायक ज्ञानदेव आहूजा हों गिरफ़्तार

गोतस्करी के संदेह में अकबर ख़ान के साथ एक भीड़ द्वारा मारपीट मामले में मेव पंचायत ने दावा किया कि विधायक आहूजा ने घटना के बाद भड़काऊ बयान दिए और आरोपियों का समर्थन किया इसलिए उन्हें षडयंत्र रचने के आरोप में गिरफ़्तार किया जाना चाहिए.

भाजपा सांसद बोले, गोरक्षा के नाम पर धंधा कर रहे हैं लोग

राजस्थान में सीकर से भाजपा सांसद सुमेधानंद सरस्वती के मुताबिक फ़र्ज़ी गोरक्षकों की वजह से वाकई में गोसेवा में लगे लोग और संत समाज बदनाम हो रहा है. उन्होंने ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की है.

मेवात के मुसलमानों का गायों से नाता हिंदुत्व की राजनीति में फिट नहीं बैठता

मेव समुदाय धार्मिक रूप से मुसलमान है लेकिन सांस्कृतिक रूप से हिंदू परंपराओं के क़रीब है. इनका गायों से एक सांस्कृतिक नाता है. कई ऐसे परिवार हैं, जिनके पास 500 से हज़ार गाएं हैं. यहां तक कि बेटियों की शादी में भी गाय देने की रीत है.

अकबर के गांव से ग्राउंड रिपोर्ट: यकीन की टूटती सांस और इंसाफ की आस

अकबर ख़ान अपने घर के अकेले कमाने वाले थे, अब उनके 60 साल के पिता पर बीमार बहू, बुज़ुर्ग पत्नी, 7 पोते-पोतियों और 5 गायों की ज़िम्मेदारी है. बेटे की मौत ने उन्हें इतना डरा दिया है कि वे किसी पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं. हर मिलने आने वाले से बस यही पूछ रहे हैं कि कहीं कोई जगह है जहां इंसाफ की फरियाद की जा सके.

अलवर लिंचिंग: राजस्थान सरकार को मानवाधिकार आयोग ने भेजा नोटिस

बीते हफ्ते अलवर में ‘गोरक्षकों’ द्वारा कथित पिटाई के बाद हुई अकबर खान की मौत पर स्वतः संज्ञान लेते हुए आयोग ने सरकार को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है.

अलवर लिंचिंग: भाजपा विधायक की मांग, ‘निर्दोष’ गोरक्षकों को रिहा किया जाए

रामगढ़ से भाजपा विधायक ज्ञानदेव आहूजा का कहना है कि जब पुलिस ने अकबर ख़ान की मौत पुलिस हिरासत में होना स्वीकार कर लिया है, तो आरोपी गोरक्षकों को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए.

कोलगांव से ग्राउंड रिपोर्ट: ‘मीट ही बेचना होता तो अकबर 60 हज़ार की गाय नहीं ख़रीदता’

अकबर का नाम ‘रकबर’ नहीं, अकबर ही है. जब वह अपना आधार बनवाने गए थे, तो बनाने वाला मेवाती उच्चारण नहीं समझ पाया और उनका नाम ‘रकबर’ लिख दिया. चचेरे भाई ने बताया कि उसे आधार में नाम सुधरवाने का कभी ख्याल ही नहीं आया. सात बच्चों का पेट पालने वाले आदमी ने सिस्टम का दिया नाम स्वीकार लिया.