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2019 में भारत में प्रदूषण के कारण दुनिया में सर्वाधिक 23.5 लाख से अधिक लोगों की मौत: लांसेट अध्ययन

‘द लांसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन में साल 2019 में भारत में सभी प्रकार के प्रदूषण के कारण 23.5 लाख से अधिक मौतें समय से पहले हुई हैं, जिसमें वायु प्रदूषण के कारण 16.7 लाख मौतें शामिल हैं. वैश्विक स्तर पर हर साल होने वाली 90 लाख मौतों के लिए सभी प्रकार का प्रदूषण ज़िम्मेदार है.

किसी भी राज्य ने महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी से मौत होने की पुष्टि नहीं की: केंद्र सरकार

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री भारती पवार ने संसद में बताया कि कोविड-19 के कारण देश में अब तक कुल 5,21,358 लोगों की मौत हुई है, जबकि केंद्र सरकार के अनुरोध पर 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा भेजे गए जवाब में किसी ने भी अपने यहां ऑक्सीजन की कमी के चलते मौत होने की पुष्टि नहीं की है.  

बीते एक साल में किसी राज्य से ऑक्सीजन की कमी के चलते हुई मौत की सूचना नहीं: केंद्रीय मंत्री

राज्यसभा में सवाल किया गया था कि पिछले एक साल में ऑक्सीजन की कमी के कारण कितनी मौतें हुईं. इस पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने कहा कि भारत सरकार राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा सूचित कुल मामलों और मृत्यु के आंकड़े रखती है. केंद्र को भेजे जवाब में किसी ने ऑक्सीजन की कमी के चलते किसी मृत्यु की सूचना नहीं दी है.

उत्तर प्रदेश सरकार का दावा- दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से किसी की मौत नहीं हुई

केंद्र की मोदी सरकार ने भी बीते जुलाई महीने में संसद को बताया था कि राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों ने ऑक्सीजन की कमी के कारण किसी भी मौत की विशेष रूप से रिपोर्ट नहीं की है. हालांकि एक महीने बाद अगस्त में पहली बार केंद्र ने स्वीकार किया था कि ऑक्सीजन की कमी से कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज़ों की मौत हुई है.

सिर्फ पंजाब और अरुणाचल ने दिए कोविड की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से मौत के आंकड़े: केंद्र

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने लोकसभा में बताया कि केंद्र ने कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर के दौरान राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों से ऑक्सीजन की कमी के चलते कोविड रोगियों की मृत्यु के आंकड़े मांगे थे, जहां केवल पंजाब तथा अरुणाचल प्रदेश ने केंद्र को जवाब भेजा है.

विषम मौसम के कारण देश में जून से अगस्त के बीच 400 से अधिक लोगों की मौत

भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून के कारण विषम मौसम की घटनाओं में पिछले तीन महीने में देशभर में कम से कम 435 लोगों की मौत हो गई. इनमें आकाशीय बिजली गिरने से जान गंवाने वाले 240 लोग शामिल हैं. यह संख्या कुल हताहतों का 50 फीसदी से अधिक है. इन घटनाओं में हुई मौतों में से एक तिहाई मौत महाराष्ट्र में हुई.

मानव स्वास्थ्य के लिए वायु प्रदूषण सबसे बड़े पर्यावरण ख़तरों में एक है: डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2005 के बाद पहली बार अपने नए वायु गुणवत्ता दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा है कि हर साल वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से 70 लाख लोगों की अकाल मृत्यु होने और लाखों लोगों के स्वास्थ्य के प्रभावित होने का अनुमान है.

यूपी: ‘बुखार’ के चलते कानपुर के गांव में 12 लोगों की मौत, पलायन को मजबूर हुए

ये मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर ज़िले के कुरसौली गांव का है. ज़िले के अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि उन्हें अभी तक मौतों के सही कारण का पता नहीं चल पाया है. उन्होंने कहा कि जिन लोगों की मृत्यु हुई है, उनमें से अधिकांश का डेंगू या मलेरिया का टेस्ट नहीं किया गया था, जबकि डेंगू पॉजिटिव आने वाले सभी लोग ठीक हो गए हैं. जांच में मलेरिया के एक भी मामले नहीं पाए गए.

भूख से मौत: झारखंड हाईकोर्ट ने कहा, हम लोगों के साथ जंगली जानवरों जैसा व्यवहार कर रहे हैं

झारखंड में कथित तौर पर भूख से मौत के मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य के सुदूरवर्ती इलाके में आज भी लोग आदिम युग में जी रहे हैं. राशन लेने के लिए उन्हें आठ किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है. इन्हें स्वास्थ्य की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है. पीने का शुद्ध पानी भी मयस्सर नहीं हो रहा है. जंगलों में रहने वाले इन लोगों की ज़मीन से ही सरकार खनिज निकाल रही है और ये लोग आज भी पत्ते और कंद-मूल खाकर जीवनयापन कर रहे हैं.

एलजी ने ऑक्सीजन की कमी से मौतों की जांच के लिए पैनल बनाने के प्रस्ताव को ठुकराया: मनीष सिसोदिया

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुईं मौतों की जांच के लिए कमेटी बनाने का प्रस्ताव फिर से नामंज़ूर कर दिया है. हालांकि, उपराज्यपाल कार्यालय के सूत्रों ने उपमुख्यमंत्री के बयान को भ्रामक बताते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन पहले ही किया जा चुका है. 

पहली बार केंद्र ने स्वीकार किया कि ऑक्सीजन की कमी से कोरोना मरीज़ों की मौत हुई थी

केंद्र सरकार ने कहा है कि आंध्र प्रदेश को छोड़कर किसी भी राज्य ने विशेष रूप से ऑक्सीजन की आपूर्ति की कमी के कारण कोविड-19 मरीज़ों की मौत की सूचना नहीं दी है. इससे पहले केंद्र सरकार ने राज्यसभा में कहा था कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश से ऑक्सीजन के अभाव में किसी भी मरीज़ की मौत की ख़बर नहीं मिली है.

इस सरकार के झूठ की कोई इंतिहा ही नहीं

बीते 20 जुलाई को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से राज्यसभा में कहा गया कि कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की अप्रत्याशित मांग के बावजूद किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में इसके अभाव में किसी व्यक्ति के मरने की उसे जानकारी नहीं है. उसके पास इस बात की जानकारी भी नहीं है कि दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलित किसानों में से अब तक कितने अपनी जान गंवा चुके हैं.

New Delhi: Chhattisgarh Finance Minister T.S. Singh Deo during the 32nd Goods and Services Tax (GST) Council meet, in New Delhi, Thursday, Jan.10, 2019. (PTI Photo/Atul Yadav) (PTI1_10_2019_000045B)

केंद्र ने नहीं मांगी दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों की जानकारी: छत्तीसगढ़

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में कहा है कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों की मौत की कोई ख़बर नहीं है. छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि केंद्र ने इन मौतों की जानकारी कभी नहीं मांगी और ऐसे बयान से देश को गुमराह किया है.

कोविड-19 को लेकर सावधान रहें, अगले तीन महीने काफी महत्वपूर्ण हैं: वीके पॉल

दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के बैठक में नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने दिल्ली सरकार से कहा है कि अनलॉक करने की गतिविधियों से कोविड मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि फिलहाल संक्रमण दर सबसे कम है. वहीं, आईसीएमआर के डॉ. समीरन पांडा ने कहा कि कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर के प्रभाव को कम करने के लिए टीकाकरण के प्रयास तेज़ किए जाने चाहिए.

यह कहना बिल्कुल ग़लत कि ऑक्सीजन की कमी के कारण कोई मौत नहीं हुईः दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री

राज्यसभा में केंद्र की मोदी सरकार की ओर से बताया गया है कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के दौरान राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में क्सीजन की कमी के कारण लोगों की मौत की कोई ख़बर नहीं है. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि केंद्र सरकार ने इस तरह की मौतों को लेकर कोई आंकड़ा नहीं मांगा था. दिल्ली सरकार ने इस तरह की मौतों का पता लगाने के लिए एक समिति का गठन किया था, लेकिन केंद्र ने उपराज्यपाल के ज़रिये इस समिति को भंग कर दिया.