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पी. चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- नोटबंदी का 2016 का निर्णय बेहद त्रुटिपूर्ण था

मोदी सरकार के नोटबंदी के निर्णय को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. वरिष्ठ वकील पी. चिदंबरम ने पांच सौ रुपये और हजार रुपये के नोट बंद करने फैसले को ‘गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण’ बताते हुए उच्चतम न्यायालय से कहा कि केंद्र सरकार वैध नोट से संबंधित कोई भी प्रस्ताव खुद से नहीं कर सकती है.

नोटबंदी का निर्णय आरबीआई के साथ काफ़ी चर्चा और तैयारी के साथ लिया गया था: केंद्र

मोदी सरकार के नोटबंदी के निर्णय को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. इस बारे केंद्र सरकार ने हलफ़नामा पेश करते हुए कहा है कि नोटबंदी के बारे में उसने फरवरी 2016 में आरबीआई के साथ विचार-विमर्श शुरू किया था और उसी के परामर्श पर यह फैसला लिया गया.

नोटबंदी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के सुनवाई स्थगित करने के आग्रह को ‘शर्मनाक’ बताया

मोदी सरकार के नोटबंदी के निर्णय को चुनौती देने वाली 58 याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ से केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल ने हलफ़नामा तैयार न होने की बात कहते हुए कार्रवाई स्थगित करने को कहा था. कोर्ट ने कहा कि संविधान पीठ ऐसे काम नहीं करती और यह बहुत असहज करने वाली स्थिति है.

नोटबंदी के छह साल: विपक्षी दलों ने ‘आर्थिक नरसंहार’ कहा, कांग्रेस ने की श्वेत पत्र लाने की मांग

नोटबंदी के छह साल पूरे होने पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री के सूट-बूट वाले मित्रों का काला धन सफेद करने की एक चालाकी भरी स्कीम थी.

जनता के पास 30.88 लाख करोड़ मुद्रा मौजूद, नोटबंदी के बाद से 72 फीसदी अधिक: रिपोर्ट

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 21 अक्टूबर 2022 को समाप्त पखवाड़े में भारतीय जनता के पास 30.88 लाख करोड़ रुपये की मुद्रा नकदी में उपलब्ध थी, जो कि नोटबंदी से पहले 4 नवंबर 2016 को उपलब्ध 17.97 लाख करोड़ रुपये से 72 फीसदी या 12.91 लाख करोड़ रुपये अधिक है. 

भाजपा से ज़्यादा हिंदुत्ववादी होकर क्या पाएगी आम आदमी पार्टी

कई जानकार कह रहे हैं कि अरविंद केजरीवाल के नोट-राग ने ज़रूरी मुद्दों व जवाबदेहियों से देशवासियों का ध्यान भटकाकर लाभ उठाने में भाजपा की बड़ी मदद की है. ये जानकार सही सिद्ध हुए तो केजरीवाल की पार्टी की हालत ‘माया मिली न राम’ वाली भी हो सकती है.

केजरीवाल ‘प्रो-हिंदू’ या ‘एंटी-हिंदू’ हो न हों, मोदी के नक़्शे-क़दम पर ज़रूर हैं

अरविंद केजरीवाल के ‘देश की तरक्की के लिए लक्ष्मी-गणेश का चित्र नोटों पर छापने’ की सलाह से पहले देश ने पैसों के बारे में ऐसा अहमक़ाना प्रस्ताव 2016 में देखा था, जब देश के प्रधानमंत्री ने अचानक चलन में रहे अस्सी फीसदी नोटों को रातोंरात अवैध बताकर भ्रष्टाचार और काले धन पर अंकुश लगाने का दावा किया था.

‘लक्ष्मण रेखा’ से वाक़िफ़, लेकिन नोटबंदी मामले की पड़ताल की जाएगी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने सवाल किया कि क्या सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक ने साल 2016 में 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बंद करने की नीति के माध्यम से काले धन, आतंकवाद के वित्तपोषण और नकली मुद्रा को रोकने के अपने घोषित उद्देश्यों को साध लिया है.

दिल्ली: पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए आम आदमी पार्टी की एलजी को बर्ख़ास्त करने की मांग

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना पर खादी विकास एवं ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष पद पर रहते हुए उनकी बेटी को अवैध तरीके से एक खादी लाउंज की डिज़ाइनिंग का ठेका देने का आरोप लगाया है. इससे पहले पार्टी ने दावा किया था कि नोटबंदी के बाद सक्सेना ने खादी ग्रामोद्योग के कर्मचारियों पर 1,400 करोड़ रुपये के चलन से बाहर हो चुके नोट बदलवाने का दबाव डाला था.

2016 के बाद से दो हज़ार रुपये के नकली नोटों की संख्या में 107 गुना वृद्धि: केंद्र सरकार

लोकसभा में दिए एक लिखित जवाब में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री ने बताया है कि वर्ष 2016 में 2,000 रुपये के 2,272 नकली नोट ज़ब्त किए गए थे, जिनकी संख्या 2020 में बढ़कर 2,44,834 हो गई.

क्या सरकार ही देश में अराजकता फैला रही है?

वीडियो: अग्निपथ से लेकर सीएए, कृषि क़ानून और नोटबंदी के कारण देश में विरोध की लहर को लेकर नरेंद्र मोदी के शासन के बारे में द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अपूर्वानंद की बातचीत.

भारत में लॉकडाउन ने छोटे व्यवसायों को भारी नुकसान पहुंचाया: सरकारी अध्ययन

लोकसभा में एक सवाल के जवाब में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री नारायण राणे ने बताया कि उनके मंत्रालय द्वारा कराए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान 67 फीसदी एमएसएमई तीन महीने से अस्थायी तौर पर बंद थे और 50 फीसदी से अधिक इकाइयों ने अपने राजस्व में 25 फीसदी से अधिक की गिरावट का सामना किया.

नोटबंदी के पांच साल बाद मोदी सरकार के पास इसकी सफलता बताने के लिए कुछ भी नहीं है

नोटबंदी के अप्रत्याशित फ़ैसले के ज़रिये बात चाहे काले धन पर अंकुश की हो, आर्थिक प्रणाली से नकद को कम करने या टैक्स-जीडीपी अनुपात बढ़ाने की, आंकड़े मोदी सरकार के पक्ष में नहीं जाते.

नोटबंदी के पांच साल बाद भी नकद राशि अपने उच्चतम स्तर पर पहुंची: रिपोर्ट

पिछले महीने आठ अक्टूबर को समाप्त हुए पखवाड़े पर नकदी 28.30 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर रही, जो कि नोटबंदी से पहले चार नवंबर 2016 की तुलना में 57.48 फीसदी अधिक है. उस समय जनता के हाथों में 17.97 लाख करोड़ रुपये की नकद राशि उपलब्ध थी.

क्या श्रमिकों का फैक्ट्रियों से खेतों में बड़ी संख्या में पलायन ‘विकास’ की गाड़ी का उल्टी दिशा में जाना है

सतत आर्थिक विकास के किसी भी दौर के साथ-साथ ग़रीबी में कमी आती है और श्रमबल कृषि से उद्योगों और सेवा क्षेत्रों की तरफ गतिशील होता है. हालिया आंकड़े दिखाते हैं कि देश में एक साल में क़रीब 1.3 करोड़ श्रमिक ऐसे क्षेत्रों से निकलकर खेती से जुड़े हैं. वैश्विक महामारी एक कारण हो सकता है, लेकिन मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों ने इसकी ज़मीन पहले ही तैयार कर दी थी.