Dhaka

धर्मों से जुड़ी कट्टरताओं के कितने भी रूप हों, वे एक दूजे की पूरक ही होती हैं

जिस तरह भ्रष्टाचारियों को अपना भ्रष्टाचार भ्रष्टाचार नहीं लगता, उसी तरह कट्टरपंथियों को अपनी कट्टरता कट्टरता नहीं लगती. वे ‘दूसरी’ कट्टरताओं को कोसते हुए भी अपनी कट्टरताओं के लिए जगह बनाते रहते हैं और इस तरह दूसरी कट्टरताओं की राह भी हमवार करते रहते हैं.

बांग्लादेश हिंसा: जिस देश में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं, वह सभ्य कैसे कहला सकता है?

बांग्लादेश में हिंसा के नए चक्र से शायद हम एक दक्षिण एशियाई पहल के बारे में सोच सकें जो अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा और उनकी बराबरी के हक़ के लिए एक अंतरराष्ट्रीय समझौते का निर्माण करे.

बांग्लादेशः संस्थापक शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या मामले में पूर्व सेना अधिकारी को फांसी दी गई

बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर्रहमान की उनके परिवार सहित 15 अगस्त 1975 को हत्या कर दी गई थी. इस हमले में उनकी दोनों बेटियां बच गई थीं. देश की मौजूदा प्रधानमंत्री शेख हसीना उनकी बेटी हैं और हमले के समय वे जर्मनी में अपनी बहन के साथ थीं.

कोरोना: बांग्लादेश ने देश के संस्थापक की जयंती समारोह को टाला, मोदी का दौरा रद्द होने की संभावना

बांग्लादेश में कोरोना वायरस के तीन मामलों की पुष्टि के बाद शेख मुजीबुर रहमान की जयंती पर होने वाले शताब्दी समारोह को टाल दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समारोह में मुख्य अतिथि थे.

बांग्लादेश में ‘वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट’ के शिकार हिंदू अल्पसंख्यक

ग्राउंड रिपोर्ट: साल 1965 में तत्कालीन पाकिस्तान सरकार ने शत्रु संपत्ति अधिनियम बनाया था, जिसे अब वेस्टेड प्रॉपर्टी एक्ट के नाम से जाना जाता है. भारत के साथ जंग में हुई हार के बाद अमल में लाए गए इस क़ानून के तहत 1947 में पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से भारत गए लोगों की अचल संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया गया था.

भ्रष्टाचार के मामले में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया को पांच साल की क़ैद

2.5 लाख डॉलर के गबन के मामले में ढाका की विशेष अदालत ने सुनाई सज़ा. ज़िया के भगोड़े बेटे तारिक़ रहमान को 10 साल की सज़ा.

म्यांमार के सैनिकों ने रोहिंग्या महिलाओं के साथ किया सामूहिक बलात्कार: संयुक्त राष्ट्र दूत

संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत ने कहा कि उन्होंने सामूहिक बलात्कार की भयावह कहानियां सुनी हैं जिनमें कई महिलाओं और लड़कियों की जान चली गई.

भाजपा ने कारगिल के शहीदों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए किया

बहादुर सैनिकों की शहादत पवित्र श्रद्धांजलि की हक़दार है, लेकिन अगर सरकार ने हालात को ज़्यादा सक्षम तरीके से संभाला होता, तो शायद आज वे ज़िंदा होते.