hate crime

फिल्मकार अडूर गोपालकृष्णन. (फोटो साभार: ट्विटर)

अडूर गोपालकृष्णन को अगर जय श्री राम का नारा बर्दाश्त नहीं तो चांद पर चलें जाएं: भाजपा नेता

बीते 23 जुलाई को फिल्मकार अडूर गोपालकृष्णन के अलावा विभिन्न क्षेत्रों की 49 हस्तियों ने देश में धार्मिक पहचान के कारण घृणा अपराधों और मॉब लिंचिंग के बढ़ते मामलों पर चिंता प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था.

गोदरेज ग्रुप के चेयरमैन आदि गोदरेज. (फोटो: पीटीआई)

असहिष्णुता, घृणा अपराध की बढ़ती घटनाओं का विकास पर होगा गंभीर असर: आदि गोदरेज

गोदरेज ग्रुप के चेयरमैन और कारोबारी आदि गोदरेज ने कहा कि देश में सब कुछ ठीक नहीं है. हम एक ऐसे भारत की उम्मीद करते हैं जहां भय और संदेह का माहौल नहीं हो और राजनीतिक नेतृत्व पर जवाबदेह होने का भरोसा कर सकें.

New Delhi: Congress President Rahul Gandhi, senior party leaders Sonia Gandhi, AK Antony and Congress General Secretary K C Venugopal release party's manifesto for Lok Sabha polls 2019, in New Delhi, Tuesday, April 02, 2019. (PTI Photo/Kamal Singh)(PTI4_2_2019_000041B)

कांग्रेस का घोषणा पत्र: राजद्रोह क़ानून ख़त्म होगा, मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ बनेगा क़ानून

कांग्रेस ने अपना घोषणा पत्र जारी करते हुए गरीबों को 72 हज़ार रुपये सालाना देने और किसानों के लिए अलग बजट के प्रावधान का वादा किया. पार्टी ने क़र्ज़ न चुका पाने वाले किसानों के ख़िलाफ़ फौजदारी नहीं, दीवानी अपराध का केस दर्ज करने की बात कही है.

India's Prime Minister Narendra Modi arrives to launch a digital payment app linked with a nationwide biometric database during the "DigiDhan" fair, in New Delhi, India, December 30, 2016. REUTERS/Adnan Abidi

आठ साल की बच्ची के साथ हुई वहशियाना हरकत दिखाती है कि हम नीचता की किन गहराइयों में डूब चुके हैं

प्रधानमंत्री के नाम लिखे एक पत्र में रिटायर्ड नौकरशाहों ने कहा कि यह पत्र केवल सामूहिक शर्म या अपनी पीड़ा को आवाज़ देने के लिए नहीं बल्कि सामाजिक जीवन में ज़बरदस्ती घुसा दिए गए घृणा और विभाजन के एजेंडा के ख़िलाफ़ लिखा गया है.

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आप सांप्रदायिकता से लड़िए क्योंकि इसमें आप मारे जाते हैं

सांप्रदायिकता से इसलिए मत लड़िए कि कांग्रेस-बीजेपी करना है. ये पार्टियां या तो चुप रहकर सांप्रदायिकता करती हैं या फिर खुलेआम. इनके आने-जाने से यह लड़ाई कभी अंजाम पर नहीं पहुंचती है.

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हम असफल और डरपोक प्रेमियों के समाज में रहते-रहते हत्यारे हो चुके हैं

जिस समाज में प्रेम के ख़िलाफ़ इतने सारे तर्क हों, उस समाज को अंकित की हत्या पर कोई शोक नहीं है, वह फ़ायदे की तलाश में है.