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विश्वविद्यालयों में घटता आलोचनात्मक चिंतन का दायरा

विश्वविद्यालय परिसर को ऐसा होना ही चाहिए जहां भय न हो, आत्मविश्वास हो, ज्ञान की मुक्ति हो और जहां विवेक की धारा कभी सूखने न पाए. तमाम सीमाओं के बावजूद भारतीय विश्वविद्यालय कुछ हद तक ऐसा माहौल बनाने में सफल हुए थे. पर पिछले पांच-सात वर्षों से कभी सुधार, तो कभी ‘देशभक्ति’ के नाम पर ‘विश्वविद्यालय के विचार’ का हनन लगातार जारी है.

विश्वविद्यालयों में बढ़ता सरकारी हस्तक्षेप किसी बेहतरी का संकेत नहीं है

विश्वविद्यालय में यह तर्क नहीं चल सकता कि चूंकि पैसा सरकार (जो असल में जनता का होता है) देती है, इसलिए विश्वविद्यालयों को सरकार की तरफ़दारी करनी ही होगी. बेहतर समाज के निर्माण के लिए ज़रूरी है कि विश्वविद्यालय की रोज़मर्रा के कामकाज में कम से कम सरकारी दख़ल हो.

New Delhi: Baba Ramdev during Bharatatma Ashokji Singhal Vedik Puraskar 2018 award function, in New Delhi, Tuesday, Sept. 25, 2018. (PTI Photo/Ravi Choudhary) (PTI9_25_2018_000186B)

स्वायत्त संस्था की आपत्ति के बाद भी केंद्र ने रामदेव को शिक्षा बोर्ड की मंज़ूरी दी: रिपोर्ट

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा जांचे गए आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि रामदेव के पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट को भारतीय शिक्षा बोर्ड के गठन की मंज़ूरी के लिए पूरी प्रक्रिया को दो महीने में पूरा कर लिया गया था ताकि 2019 के लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता लागू होने से कुछ घंटे पहले इसे स्वीकृति मिल जाए.

फाइनल ईयर परीक्षाएं: विद्यार्थी की जान और यूजीसी की शान

अगर यूजीसी को अंतिम परीक्षा लेने का अपना निर्णय इतना उचित लग रहा है तो वह इसके तर्क विस्तार से क्यों नहीं बता रहा और उसमें जो विकल्प हो सकते हैं उन पर विचार क्यों नहीं कर रहा? हड़बड़ी में सिर्फ अपनी सत्ता स्थापित करने के लिए छात्रों के स्वास्थ्य की परवाह किए बिना शिक्षा की गुणवत्ता पर ज़ोर देना अमानवीयता है.

फाइनल वर्ष की परीक्षा कराने के यूजीसी के फ़ैसले में कुछ भी अनुचित या मनमाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

यूजीसी के 30 सितंबर तक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के अंतिम साल की परीक्षाएं कराने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर राज्य आपदा प्रबंधन क़ानून के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल कर इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें आयोग के सामने आवेदन करने की छूट है.

नई शिक्षा नीति बाज़ार के रास्ते के बचे रोड़े हटाने की कवायद भर है

अगर सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीर है, तो उसे इस पर संसद में बहस चलानी चाहिए. किसी बड़ी नीति में बदलाव के लिए हर तरह के विचारों पर जनता के सामने चर्चा हो. इस तरह देश की विधायिका को उसके अधिकार से वंचित रख शिक्षा नीति बदलना देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है.

तमिलनाडु में लागू नहीं होने देंगे तीन भाषा फॉर्मूलाः पलानीस्वामी

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर निराशा जताते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पलानीस्वामी ने कहा कि राज्य में कई दशकों से दो भाषा नीति का पालन किया जा रहा है, इसमें कोई बदलाव नहीं होगा. उन्होंने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दोबारा विचार करने का भी आग्रह किया.

क्या भारतीय शिक्षा व्यवस्था की सूरत बदलने में कारगर होगी नई शिक्षा नीति?

वीडियो: बीते दिनों केंद्रीय कैबिनेट ने देश की नई शिक्षा नीति को मंज़ूरी दी है. 34 साल बाद देश की शिक्षा नीति में हुए इस बदलाव को मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं. इस बारे में विभिन्न विशेषज्ञों से सृष्टि श्रीवास्तव की बातचीत.

नई शिक्षा नीति अत्यधिक विनियमित, कमज़ोर फंडिग मॉडल पेश करती है: मनीष सिसोदिया

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने नई शिक्षा नीति को ‘प्रगतिशील दस्तावेज़’ बताते हुए कहा कि इसमें मौजूदा शिक्षा प्रणाली की ख़ामियों की पहचान तो की गई है, लेकिन यह पुरानी परंपराओं के दबाव से मुक्त नहीं हो पा रहा है.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय बना शिक्षा मंत्रालय, नई शिक्षा नीति की घोषणा

केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि देश में 34 साल बाद शिक्षा नीति में परिवर्तन किया गया है. नई शिक्षा नीति में पांचवी कक्षा तक की शिक्षा मातृभाषा में देने की बात कही गई है, साथ ही एमफिल को ख़त्म किया गया है.

परीक्षाओं को लेकर यूजीसी के दिशानिर्देश राज्यों के लिए बाध्यकारीः एचआरडी अधिकारी

यूजीसी ने छह जुलाई को सभी संस्थानों को सितंबर के अंत तक टर्मिनल सेमेस्टर या अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित कराने की सलाह दी थी. पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र और पंजाब ने यूजीसी के इसका विरोध करते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है.

कोरोना वायरस: डेटॉल ने बंद किया साबुन को निष्प्रभावी दिखाने वाला विज्ञापन

लाइफबॉय साबुन बनाने वाली हिंदुस्तान यूनिलिवर लिमिटेड ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि जब कोरोना वायरस से बचाव के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साबुन और पानी का इस्तेमाल करने का दिशानिर्देश जारी किया है, तब डेटॉल हैंडवाश के विज्ञापन में साबुन की टिकिया को बेकार, निष्प्रभावी और कीटाणुओं से होने वाली बीमारी से नहीं बचा सकने वाला बताया जा रहा है.

The Union Minister for Human Resource Development, Dr. Ramesh Pokhriyal Nishank addressing at the inauguration of the first World Youth Conference on Kindness, in New Delhi on August 23, 2019.

कोरोना वायरसः एचआरडी मंत्रालय की सभी शिक्षकों, गैर शिक्षण कर्मियों को घर से काम करने की सलाह

मानव संसाधन एवं विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि इस अवधि के दौरान शिक्षकों को ड्यटी पर ही माना जाएगा. इसके साथ ही यह व्यवस्था अस्थाई और अनुबंधित शिक्षकों पर भी लागू रहेगी.

केंद्र ने राज्यों से कहा, स्कूल बंद होने से घरों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराएं या भत्ता दें

सुप्रीम कोर्ट ने इस सप्ताह राज्य सरकारों को नोटिस देकर पूछा था कि वे यह बताएं कि कोरोना वायरस की वजह से स्कूल बंद हैं. ऐसे में वे बच्चों को मिड-डे मील देना कैसे सुनिश्चित करेंगे. इसके बाद केंद्र सरकार का यह आदेश आया है.

जामिया हिंसाः पुलिस की कार्रवाई में 2.66 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान, एचआरडी को सौंपा बिल

जामिया मिलिया इस्लामिया में पिछले साल 15 दिसंबर को कैंपस के अंदर दिल्ली पुलिस की बर्बर कार्रवाई के दौरान 2.66 करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ था, जिसमें 4.75 लाख रुपये के 25 सीसीटीवी कैमरों के नुकसान को भी शामिल किया गया है.